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जल्दबाजी में बुक की Rapido, ड्राइवर निकला क्लास का टॉपर! कहानी सुनकर भावुक हुआ इंटरनेट

रैपिडो बुक करने वाले युवक को जब पता चला कि उसका ड्राइवर उसका पुराना क्लास टॉपर है, तो यह मुलाकात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. जानिए इस कहानी से मिला जिंदगी का बड़ा सबक.

जल्दबाजी में बुक की Rapido, ड्राइवर निकला क्लास का टॉपर! कहानी सुनकर भावुक हुआ इंटरनेट
ड्राइवर निकला क्लास का टॉपर!

कहते हैं जिंदगी हमेशा सीधी रेखा में नहीं चलती. कभी ऊपर तो कभी नीचे, हालात हर किसी की कहानी बदल सकते हैं। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसी ही कहानी वायरल हो रही है, जिसमें एक युवक ने जल्दबाजी में राइड बुक की और जब ड्राइवर आया तो वह उसका पुराना क्लास टॉपर निकला. इस मुलाकात ने इंटरनेट पर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.

कैसे हुई मुलाकात?

यह कहानी एक्स अकाउंट 'भारत माता का सेवक' द्वारा शेयर की गई. पोस्ट की शुरुआत इस लाइन से हुई- 'उसने जल्दबाजी में रैपिडो बुक की, उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि राइडर उसकी ही क्लास का टॉपर निकलेगा'. उमर नाम के युवक को जल्दी थी, इसलिए उसने फटाफट रैपिडो पर राइड बुक कर ली. जब बुकिंग डिटेल्स सामने आईं तो राइडर का नाम देखकर वह चौंक गया- चंदन. उसे लगा कहीं यह वही चंदन तो नहीं, जो कभी उनकी क्लास का टॉपर हुआ करता था. जब राइडर पहुंचा तो उमर ने मजाक में कहा, अरे रैपिडो भैया! इस पर चंदन मुस्कुराते हुए बोला, पहले OTP बता दो.

छोटी सी बातचीत, बड़ा संदेश

रास्ते में दोनों के बीच बातचीत हुई. उमर ने पूछा, कि वह कब से रैपिडो चला रहा है. चंदन ने सहजता से जवाब दिया, जिंदगी हमेशा प्लान के मुताबिक नहीं चलती दोस्त, लेकिन ठीक है. उमर ने हैरानी जताते हुए याद दिलाया कि वह तो क्लास का टॉपर था. इस पर चंदन ने हंसते हुए कहा, मैंने भी नहीं सोचा था कि मैं राइडर बनूंगा और तुम मेरे कस्टमर. जिंदगी अनप्रेडिक्टेबल है. बैठो, सुरक्षित छोड़ दूंगा. पोस्ट के अंत में लिखा गया कि नंबर, डिग्री या टॉपर होना किसी का भविष्य तय नहीं करता.  ईमानदारी से किया गया हर काम सम्मान के योग्य है.

सोशल मीडिया पर क्या बोले लोग?

यह कहानी वायरल होते ही लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं. कुछ यूजर्स ने कहा, कि टॉपर को राइडर के रूप में देखना दिल को थोड़ा उदास कर देता है. वहीं, कई लोगों ने इस परिप्रेक्ष्य को बदलते हुए लिखा कि सफलता हमेशा सीधी राह पर नहीं मिलती और हर काम में गरिमा होती है. कई लोगों ने अपने अनुभव भी शेयर किए, जहां पढ़ाई में आगे रहने वाले सहपाठी बाद में आर्थिक दबाव या पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अलग रास्तों पर चले गए.

(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)

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