- मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि पति के नौकरी के कारण दूसरे शहर जाने पर पत्नी का उसके पीछे जाना जरूरी नहीं होता
- तमिलनाडु के शिवगंगा में 16 साल से अलग रह रहे दंपत्ति के तलाक मामले में निचली अदालत ने याचिका खारिज की थी
- पति ने पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाया था लेकिन निचली अदालत ने पति की गलती को भी माना था
तलाक के केस में सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि नौकरी या रोजगार के सिलसिले में जब पति को दूसरे शहर जाना पड़े, तो पत्नी का उसके पीछे-पीछे जाना कोई कानूनी या नैतिक बाध्यता नहीं है. पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह मशहूर 'वोडाफोन' विज्ञापन के पग (कुत्ते) की तरह हर जगह पति के पीछे चले.
निचली अदालत ने खारिज की थी तलाक की अर्जी
दरअसल, तमिलनाडु के शिवगंगा के एक दंपत्ति की शादी साल 1992 में हुई थी और बीते 16 साल से दोनों अलग-अलग रह रहे थे. 67 वर्षीय पति ने पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी लगाई थी. हालांकि, निचली अदालत ने पति की याचिका यह कहकर खारिज कर दी थी कि वह खुद अपनी पत्नी को छोड़कर दूसरे शहर कमाने गया था, इसलिए गलती पति की ही है.
Wife cannot be expected to follow husband like pug in Vodafone ad: Madras High Court
— Bar and Bench (@barandbench) September 3, 2026
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पत्नी को 7 लाख रुपये भरण-पोषण के रूप में देने होंगे
मद्रास हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति एम.डी. सुमति की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल की परिस्थितियां ऐसी हो सकती हैं, जहां पत्नी को साथ रखना संभव न हो. यदि पति सेना में है, तो बैरक में वैवाहिक घर नहीं बसाया जा सकता. इसके अलावा, पत्नी खुद भी कहीं नौकरी कर सकती है. कोर्ट ने माना कि 16 साल से अलग रह रहे इस दंपत्ति के बीच अब बहुत कड़वाहट आ चुकी है और वे दोबारा साथ नहीं रह सकते. हाईकोर्ट ने शादी को खत्म करते हुए पति को आदेश दिया कि वह पत्नी को 7 लाख रुपये भरण-पोषण के रूप में दे.
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