- दिशा सालियान की मौत की जांच अब बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो करेगी
- शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियान मामले से अपना कोई लेना-देना न होने का दावा किया
- आदित्य ठाकरे ने भाजपा पर उन्हें बदनाम करने और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाया
बॉलीवुड अभिनेता दिवंगत सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर रहीं दिशा सालियान की मौत की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो करेगी. बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दिशा सालियान केस को CBI को ट्रांसफर किए जाने के फैसले पर शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे की प्रतिक्रिया सामने आई है. ठाकरे ने इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर उन्हें बदनाम करने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया है.
आदित्य ठाकरे का बयान: 'मेरा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं'
जब शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे से बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दिशा सालियान केस CBI को ट्रांसफर करने और क्या उन्हें लगता है कि यह मामला अब अपने अंजाम तक पहुंचने वाला है, इस बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "यह एक ऐसा विषय है जिससे मेरा कोई लेना-देना नहीं है और मैंने इसके बारे में सोचा भी नहीं है. मैं इस पर जवाब क्यों दूं?"
ठाकरे ने आगे कहा, "देखिए, भारतीय जनता पार्टी सभी को बदनाम करने का प्रयास करती है. उन्होंने सालों तक राहुल गांधी को 'पप्पू' बनाने की कोशिश की. उसी तरह, उन्होंने पिछले छह सालों से मुझे भी बदनाम करने का प्रयास किया है. जो कोई भी BJP को परेशान करता है, उन्हें उससे समस्या होती है और वे उससे लड़ सकते हैं. जब आपका किसी विषय से कोई लेना-देना ही नहीं है, तो किसी भी चीज़ पर क्यों बोलें या उसे अहमियत क्यों दें? यही मेरा स्पष्ट रुख है."
राम कदम का पलटवार: 'तत्कालीन सरकार मामले को क्यों रफा-दफा करना चाहती थी?'
दूसरी ओर, दिशा सालियान मामले में भाजपा नेता राम कदम ने पलटवार करते हुए कहा कि आदित्य ठाकरे दावा कर रहे हैं कि उनका इस केस से कोई संबंध नहीं है, फिर तत्कालीन ठाकरे सरकार इस मामले को रफा-दफा करने के पीछे क्यों पड़ी हुई थी? वे आखिर किसे बचाने का प्रयास कर रहे थे? सवाल यह उठता है कि ठाकरे का इस केस से संबंध है या नहीं, यह तो जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद ही तय होगा.
सबूत मिटाने के लगे गंभीर आरोप
राम कदम ने आगे सवाल उठाते हुए कहा, "दिशा सालियान मामले में कौन दोषी है? उसकी मौत के लिए कौन जिम्मेदार है और किसने उसे प्रताड़ित किया? दिशा के परिवार और पूरे देश का यही सवाल है कि जब आदित्य ठाकरे के पिता (उद्धव ठाकरे) मुख्यमंत्री थे, तब पुलिस इस मामले की गहराई से जांच क्यों नहीं कर रही थी? क्या पुलिस सबूत मिटने का इंतजार कर रही थी? सीसीटीवी फुटेज से लेकर तमाम अहम सबूत मिटाए जा रहे थे, आखिर यह सब किसके कहने पर हो रहा था? यही सवाल महाराष्ट्र के तत्कालीन नेताओं को कटघरे में खड़ा करता है. किसी के सिर्फ कह देने से यह तय नहीं होता कि उसका कोई संबंध है या नहीं, यह तो जांच एजेंसी ही तय करेगी."
पीड़ित परिवार के न्याय का सवाल
राम कदम ने भावुक रुख अपनाते हुए कहा, "असली दुख तो दिशा के पिता का है, जो छह साल, दो महीने और 25 दिनों से रोते हुए न्याय की गुहार लगा रहे थे. जबकि उस वक्त की ठाकरे सरकार सबूत मिटने के लिए किस बात का इंतजार कर रही थी? यही सबसे बड़ा सवाल है."
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