British government loan 1917: मध्य प्रदेश के सीहोर से एक दिलचस्प मामला सामने आया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सेठ जुम्मा लाल रूठिया ने साल 1917 में British government को 35 हजार रुपये कर्ज दिया था. अब उनके पोते विवेक रूठिया इस ऐतिहासिक loan recovery को लेकर ब्रिटिश क्राउन को legal notice भेजने की तैयारी में हैं.

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1917 का कर्ज, 2026 की मांग (35000 rupees loan case)
बताया जा रहा है कि प्रथम विश्व युद्ध के दौर में ब्रिटिश प्रशासन को धन की जरूरत थी, तब सीहोर के रईस व्यापारी जुम्मा लाल रूठिया ने मदद की. बदले में लिखित दस्तावेज दिए गए, जिसमें कर्ज लौटाने का वादा था.

परिवार का दावा है कि आजादी के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया. कहा जा रहा है कि, 1917 में 35000 रुपये आज के हिसाब से ब्याज सहित एक करोड़ से ज्यादा हो सकते हैं. उनके पास वसीयत और लिखत-पढ़त के कागजात मौजूद हैं.
कानूनी लड़ाई की तैयारी (Legal Notice to British Crown)
International law के अनुसार, एक संप्रभु देश अपने पुराने वित्तीय दायित्वों से मुकर नहीं सकता. हालांकि, कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि agreement में समय सीमा का जिक्र अहम होता है, फिर भी British government legal notice की तैयारी ने इस मामले को चर्चा में ला दिया है. रूठिया परिवार सीहोर में दान और सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता है. कहा जाता है कि शहर की बड़ी हिस्सेदारी उनकी जमीन पर बसी है. देखा जाए तो यह सिर्फ पैसों का मसला नहीं, बल्कि 109 साल पुराने वादे और इंसाफ की तलाश की कहानी है.
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