Lathmar Holi Mathura: गुलाल अभी हवा में ही था, ढोल की थाप पर लोग झूम ही रहे थे कि अचानक माहौल में एक अजीब सी घबराहट घुलती दिखी. मथुरा की लठमार होली का जोश इस बार कुछ ऐसा नजर आया कि रंगों के पीछे छिपा खतरा भी साफ दिखने लगा. भीड़ का सैलाब, संकरी गलियां और एक पल की अफरा तफरी...बस यहीं से शुरू होती है ये कहानी. मथुरा की गलियों में उमड़ा हुजूम ऐसा लगा जैसे सैलाब ने रास्ता मांग लिया हो. ढोल थमे नहीं थे, मगर दिलों की धड़कनें जरूर तेज हो गईं. लठमार होली का ये मंजर सिर्फ जश्न का नहीं, एहतियात की एक खामोश याद दिलाता हुआ नजर आया.
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Photo Credit: X/@Benarasiyaa
भीड़ का सैलाब और बेचैनी (Massive Crowd and Rising Anxiety)
उत्तर प्रदेश के मथुरा में मनाई जाने वाली Lathmar Holi हर साल हजारों श्रद्धालुओं और सैलानियों को खींच लाती है. बरसाना और नंदगांव की गलियां राधा कृष्ण की परंपरा से जुड़ी इस होली में रंगों से सराबोर रहती हैं, लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर वायरल Mathura crowd video ने लोगों को चौंका दिया. वीडियो में पुलिस लकड़ी की बैरिकेडिंग से भीड़ को रोकती दिखी, जैसे ही बैरिकेड हटाया गया, लोगों का सैलाब अचानक आगे बढ़ पड़ा. यह नजारा किसी stampede risk की आहट जैसा लगा.
क्यों बढ़ता है खतरा? (Why Does Risk Increase in Mass Gatherings?)
भारत में बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण हमेशा एक चुनौती रही है. संकरी गलियां, सीमित निकास और ज्यादा संख्या में लोगों की मौजूदगी हालात को नाजुक बना देती है. पिछले साल मथुरा के श्रीजी मंदिर में Laddoo Holi के दौरान भी धक्का-मुक्की में कई लोग घायल हुए थे. ऐसी घटनाएं बताती हैं कि Holi crowd management कितना जरूरी है. इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @guyfrommathura नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है.
क्या कहते हैं दिशा निर्देश? (What Do Official Guidelines Say?)
NDMA guidelines के मुताबिक आयोजन स्थल की क्षमता, एंट्री एग्जिट प्लान और CCTV मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है. प्रशासन ने Holi 2026 के लिए महाकुंभ मॉडल जैसा phased entry system अपनाने की बात कही है. भीड़ में जरा सी अफवाह या घबराहट बड़ा हादसा बन सकती है. यही वजह है कि Mathura Holi safety अब सिर्फ जश्न नहीं, जिम्मेदारी का मसला बन गया है. लठमार होली हमारी विरासत और जज्बात का हिस्सा है, लेकिन हिफाजत सबसे जरूरी है. जश्न का मजा तभी है जब हर कोई सुरक्षित घर लौटे.
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