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लेडी ट्रेन मैनेजर, थका लोको पायलट और पाइल्स पीड़ित कर्मी...ये वायरल खबरें बता रहीं रेलकर्मियों की टफ लाइफ

सोशल मीडिया पर वायरल तीन घटनाओं, महिला ट्रेन मैनेजर की मेहनत, ड्यूटी पूरी होने पर ट्रेन रोकने वाले लोको पायलट और बीमारी में छुट्टी न मिलने वाले कर्मचारी ने भारतीय रेलवे कर्मियों की कठिन और संघर्ष भरी जिंदगी की झलक दिखाई है.

लेडी ट्रेन मैनेजर, थका लोको पायलट और पाइल्स पीड़ित कर्मी...ये वायरल खबरें बता रहीं रेलकर्मियों की टफ लाइफ
ये वायरल खबरें बता रहीं रेलकर्मियों की टफ लाइफ

Tough Life of Railway Workers : भारतीय रेलवे की नौकरी को अक्सर लोग आरामदायक समझ लेते हैं, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर कई ऐसे किस्से देखने को मिले जिनसे पता चलता है कि रेल कर्मियों की लाइफ काफी मुश्किल और चुनौतीपूर्ण होती है. जिसमें से सबसे पहले हम बात कर रहे हैं मुंबई की एक महिला ट्रेन मैनेजर की, जिसका वायरल वीडियो इस धारणा को बदल रहा कि रेलवे की नौकरी आरामदायक या आसान होती है. सेंट्रल रेलवे में कार्यरत इस महिला ने अपनी ड्यूटी की एक झलक दिखाते हुए बताया कि समय पर ट्रेनों का संचालन सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों को कितनी मेहनत करनी पड़ती है. 

9 घंटे की पूरी शिफ्ट खड़े रहकर बिताते हैं

वीडियो में महिला रेलवे यार्ड के पास खड़ी ट्रेन के किनारे चलते हुए खुद को रिकॉर्ड करती नजर आती हैं. सफेद शर्ट और बैकपैक के साथ वह असमान पटरियों के पास सावधानी से चलते हुए बताती हैं कि उनकी ड्यूटी के दौरान उन्हें रोजाना लगभग 15,000 से 18,000 कदम चलना पड़ता है. उन्होंने कहा, मैं बढ़ा-चढ़ाकर नहीं कह रही हूं. मैं रोज 15 से 18 हजार कदम चलती हूं. सिर्फ मैं ही नहीं, रेलवे के पूरे ऑपरेटिंग विभाग के लोग इतना काम करते हैं. कई कर्मचारी तो अपनी 9 घंटे की पूरी शिफ्ट खड़े रहकर बिताते हैं. 

ड्यूटी पूरी होते ही लोको पायलट ने रोक दी यात्रियों से भरी ट्रेन

वहीं, दूसरी तरफ रेलवे नियमों की दुहाई और यात्रियों की बेबसी का एक अनोखा मामला बिहार के ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला. मालदा से सिलीगुड़ी जा रही डेमू ट्रेन (संख्या 75719) प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर दोपहर 2:52 बजे से करीब 3 घंटे तक खड़ी रही. वजह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि ट्रेन के लोको पायलट का अपनी ड्यूटी पूरी होने के बाद आगे जाने से इनकार करना था. 

ट्रेन अपने निर्धारित समय पर मालदा से रवाना हुई थी, लेकिन जैसे ही यह ठाकुरगंज पहुंची, ड्राइवर ने स्टेशन मास्टर को सूचित किया कि उसकी 9 घंटे की ड्यूटी पूरी हो चुकी है. लोको पायलट ने रेलवे के सुरक्षा नियमों (Safety Norms) का हवाला देते हुए कहा कि तय समय-सीमा के बाद ट्रेन चलाना परिचालन सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है. बता दें कि लोको पायलट को अधिकतम 9 से 10 घंटे की निरंतर ड्यूटी के बाद विश्राम का अनिवार्य अधिकार होता है, ताकि थकान की वजह से कोई बड़ी दुर्घटना न हो. 

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लोको पायलट ने पैंट उतारकर दिखा दिए घाव

इसके अलावा लखनऊ से रेलवे में बीमारी पर भी छुट्टी न मिलने का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां एक लोको पायलट को पाइल्स सर्जरी के बाद भी सिक लीव नहीं दी गई. आरोप है कि लीव से इनकार किए जाने के बाद परेशान होकर लोको पायलट राजेश मीना ने वरिष्ठ अधिकारी के सामने ही अपनी पैंट उतार दी और उन्हें ऑपरेशन के घाव दिखाए. इस घटना का वीडियो रेलवे कर्मचारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल हो गया है, जिसके बाद कर्मचारी संगठनों ने इसे अमानवीय व्यवहार करार दिया है.

तो इन तीन मामलों को बताने का मकसद हमारा एक ही है, वो ये कि भारतीय रेलवे की नौकरी को अक्सर लोग आरामदायक और आसान समझते हैं. लेकिन, आप इन तीन मामलों को जानेंगे तो आपको सच्चाई पता चलेगी कि असल में रेलवे की नौकरी कितनी संघर्षों से भरी और मुश्किल होती है. 

(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)

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