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मिल गया कैंसर का इलाज! मेंढक की आंतों में छिपा जादुई बैक्टीरिया, जापानी एक्सपर्ट की खोज ने चौंकाया

जापानी वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है, जिससे कैंसर मरीजों को उम्मीद दी है. जापानी ट्री फ्रॉग की आंतों में पाया गया बैक्टीरिया Ewingella americana कोलोरेक्टल कैंसर के इलाज में बेहद असरदार साबित हो सकता है. माउस मॉडल पर किए गए परीक्षण में सिर्फ एक इंजेक्शन से ट्यूमर पूरी तरह खत्म हो गया.

मिल गया कैंसर का इलाज! मेंढक की आंतों में छिपा जादुई बैक्टीरिया, जापानी एक्सपर्ट की खोज ने चौंकाया
  • जापान के वैज्ञानिकों ने Ewingella americana नामक बैक्टीरिया कोलोरेक्टल कैंसर के इलाज में बेहद प्रभावी पाया
  • चूहों पर परीक्षण में इस बैक्टीरिया की एक बार इंट्रावेनस इंजेक्शन से ट्यूमर पूरी तरह खत्म हो गया
  • यह बैक्टीरिया कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करता है और इम्यून सिस्टम को सक्रिय कर अपोप्टोसिस कराता है

कैंसर दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही इंसान डर जाता है. मॉर्डन जमाने में बदलते लाइफस्टाइल के बीच कोलोरेक्टल कैंसर (आंत और मलाशय का कैंसर) दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है, खासकर युवाओं में. ऐसे में पारंपरिक इलाज जैसे कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी के बावजूद कई मामलों में सफलता बेहद सीमित रहती है. लेकिन जापान के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जो कैंसर के इलाज में नई क्रांति ला सकती है और यह खोज हुई है एक छोटे से मेंढक की आंतों में

मेंढ़क की आंतों से जगी उम्मीद

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक जापान एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (JAIST) के रिसर्चर्स ने जापानी ट्री फ्रॉग यानी कि मेंढ़क की आंतों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया की जांच की. इस अध्ययन में पाया गया कि Ewingella americana नामक बैक्टीरिया कोलोरेक्टल कैंसर के इलाज में बेहद प्रभावी हो सकता है. जिससे दुनिया में कैंसर के इलाज को लेकर नई उम्मीद जगी है.

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कैसे किया गया शोध?

रिसर्चर्स ने जापानी ट्री फ्रॉग, फायर बेली न्यूट और ग्रास लिज़र्ड की आंतों से बैक्टीरिया के सैंपल लिए. जिनमें कुल 9 बैक्टीरिया स्ट्रेन में एंटी-ट्यूमर प्रभाव पाया गया. इनमें से Ewingella americana सबसे ज्यादा असरदार साबित हुआ.

चौंकाने वाला नतीजा: 100% ट्यूमर खत्म

माउस मॉडल यानी की चूहों पर किए गए परीक्षण में सिर्फ एक बार IV (इंट्रावेनस) इंजेक्शन देने से ट्यूमर पूरी तरह खत्म हो गया. यानी 100% कंप्लीट रिस्पॉन्स (CR),जो कि पारंपरिक इलाज से कहीं ज्यादा है.

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क्यों है यह तरीका खास?

बैक्टीरिया सीधे कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने का काम करता है. साथ ही इम्यून सिस्टम को सक्रिय कर अपोप्टोसिस (कैंसर कोशिकाओं का प्राकृतिक नाश) कराता है. जिससे शरीर में सूजन नहीं होती और बैक्टीरिया 24 घंटे में खून से गायब हो जाता है. 72 घंटे में शरीर की इन्फ्लेमेटरी प्रतिक्रिया सामान्य हो जाती है.

साइड इफेक्ट्स लगभग नहीं

कीमोथेरेपी के गंभीर साइड इफेक्ट्स के मुकाबले Ewingella americana बेहद सुरक्षित माना जा रहा है क्योंकि यह बैक्टीरिया सिर्फ ट्यूमर में जमा होता है और अन्य अंगों में नहीं फैलता.

कैंसर के बढ़ते खतरे और नई उम्मीद

अमेरिका में हर साल करीब 1.5 लाख लोग कोलोरेक्टल कैंसर से पीड़ित होते हैं, दुनिया में इसकी तादाद काफी ज्यादा है. यह बीमारी बुजुर्गों में ज्यादा होती थी, लेकिन अब युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं. जिसने मेडिकल एक्सपर्ट की भी चिंता बढ़ा दी है. साल 2019 में 20% केस 55 साल से कम उम्र के लोगों में पाए गए. इसी वजह से 2021 में स्क्रीनिंग की उम्र 50 से घटाकर 45 कर दी गई.

अगला कदम क्या होगा?

रिसर्चर्स अब इस बैक्टीरिया को अन्य कैंसर जैसे ब्रेस्ट और पैंक्रियाटिक कैंसर पर भी टेस्ट करेंगे. साथ ही, डोज फ्रैक्शन और डायरेक्ट ट्यूमर इंजेक्शन जैसी सुरक्षित डिलीवरी तकनीकों पर काम किया जाएगा. रिसर्चर्स का कहना है कि यह खोज साबित करती है कि प्रकृति में छिपी जैव विविधता नई मेडिकल टेक्नोलॉजी के लिए खजाना है. बस उसमें बेहतर खोज की जरूरत है

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