Cooling homes without AC: जब दोपहर में सूरज सिर पर चढ़ता है, तो कंक्रीट की छतें तवे की तरह तपने लगती हैं. जयपुर में इसी 'तवे' को लोगों ने उपजाऊ खेत बना दिया. यहां के बाशिंदों ने अपनी छतों को खाली छोड़ने के बजाय वहां छोटे-छोटे बाग-बगीचे और ऑर्गेनिक सब्जियां उगा दी हैं. अब धूप सीधे लेंटर पर पड़ने के बजाय पौधों और मिट्टी पर गिरती है. नतीजा? नीचे कमरे का तापमान 5 से 7 डिग्री तक गिर गया, यानी घर के अंदर कुदरती एयर कंडीशनर चालू.

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गर्मी का गेम ओवर, हरियाली की एंट्री (Green Solution to Beat the Heat)
इस पूरे मिशन के पीछे एक ऐसे शख्स का हाथ है, जिसने मोटी तनख्वाह वाली अपनी कॉर्पोरेट नौकरी को लात मारकर मिट्टी से जुड़ने का फैसला किया.
उन्होंने लोगों को सिखाया कि छतों पर हल्के वजन वाले बॉक्स और बेड तैयार करके उनमें पौधे कैसे उगाएं. ये पौधे न सिर्फ सूरज की तपिश सोखते हैं, बल्कि वाष्पीकरण (evaporation) के जरिए हवा में ऐसी ठंडक घोलते हैं कि आपको लगेगा ही नहीं कि बाहर लू चल रही है.
ताजी सब्जियां भी और बिजली बिल की बचत भी (Save Electricity and Grow Organic Food)
सबसे मजेदार बात तो ये है कि इस 'देसी फ्रिज' से लोगों की रसोई भी महक रही है. छत पर ही ताजी भिंडी, टमाटर और मिर्च मिल रही है और उधर AC न चलने से बिजली का बिल भी आधा हो गया.

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हालांकि, एक्सपर्ट्स की एक छोटी सी नसीहत है, ये 'कुलिंग फंडा' आजमाने से पहले देख लें कि आपकी छत का ढांचा इतना वजन सहने लायक है या नहीं. जहां मुमकिन है, वहां तो यह स्कीम 'सोने पे सुहागा' है.
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कुल मिलाकर, जयपुर का यह मॉडल साबित करता है कि अगर इंसान कुदरत से हाथ मिला ले, तो महंगी मशीनों की जरूरत नहीं पड़ती. यह सिर्फ एक गार्डन नहीं, बल्कि भविष्य के शहरों के लिए एक सस्टेनेबल लाइफस्टाइल है.
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
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