जर्मनी में पढ़ाई और काम करने का सपना देखने वाले हजारों छात्रों के लिए एक सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है. जर्मनी में काम कर रहे एक इंटरनेशनल स्टूडेंट मीसुम अब्बास ने इंस्टाग्राम पर 'जर्मनी में जीवन की वास्तविकता' शीर्षक से एक पोस्ट शेयर कर वहां की वास्तविक जीवनशैली और खर्चों का पूरा हिसाब सामने रखा है. अब्बास का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति 'अमेरिकन ड्रीम' के बजाय लॉन्ग टर्म स्टेबिलिटी चाहता है, तो उसे जर्मनी चुनना चाहिए, लेकिन यहां आकर अमीर बनने की उम्मीद रखना गलत है.
कमाई ठीक, लेकिन बचत बेहद कम
मीसुम अब्बास के मुताबिक, जर्मनी में औसतन सालाना 30,000 यूरो की सैलरी को अच्छा माना जाता है. हालांकि, टैक्स और अन्य कटौतियों के बाद हाथ में लगभग 2,100 यूरो ही आते हैं. इसमें से सबसे बड़ा हिस्सा किराए में चला जाता है, जो करीब 800 से 1,200 यूरो तक होता है. इसके अलावा किराने का सामान- 250–350 यूरो, ट्रांसपोर्ट- 150–250 यूरो, यूटिलिटी बिल- 150–200 यूरो, फोन बिल- 20–40 यूरो. इन सभी खर्चों के बाद महीने के आखिर में सिर्फ 150–200 यूरो ही बच पाते हैं.
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बचत की उम्मीद है तो बजट पर फिर सोचिए
अब्बास ने साफ शब्दों में कहा, अगर आप यहां आकर अपनी सैलरी का आधा हिस्सा बचाने की सोच रहे हैं, तो अपने बजट पर दोबारा विचार करें. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर कोई व्यक्ति अच्छी क्वालिटी ऑफ लाइफ, सस्ती शिक्षा और भविष्य की सुरक्षा चाहता है, तो जर्मनी उसके लिए सही जगह है.
टैक्स ज्यादा, लेकिन सुरक्षा भी मजबूत
मीसुम के अनुसार, जर्मनी में ज्यादा टैक्स देने के बदले लोगों को बेहतर हेल्थकेयर, बेरोजगारी भत्ता और पेंशन जैसी सुविधाएं मिलती हैं. साथ ही यहां के मजबूत लेबर लॉज की वजह से जॉब सिक्योरिटी भी काफी अच्छी है. उन्होंने कहा, जर्मनी आपको जल्दी अमीर नहीं बनाएगा, लेकिन मेडिकल बिल्स की वजह से आपको दिवालिया भी नहीं करेगा.
सोशल मीडिया पर बंटी राय
पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं. एक यूजर ने लिखा, इस सैलरी में अकेले कार रखना या 1,200 यूरो का किराया देना सही फाइनेंशियल बैलेंस नहीं है. दूसरे ने सवाल उठाया, अगर भारत में बेहतर जिंदगी मिल सकती है, तो फिर इतना महंगा किराया देकर विदेश क्यों जाएं? वहीं तीसरे यूजर ने सलाह दी, पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करें. हममें से कई ज्यादा सैलरी वाले लोग भी ऐसा करते हैं, इसमें कोई शर्म नहीं.
जर्मनी बनाम अमेरिका की बहस फिर तेज
इस पोस्ट ने एक बार फिर विदेश जाने वाले छात्रों के बीच बहस छेड़ दी है- क्या ज्यादा अवसरों वाला अमेरिका बेहतर है या सुरक्षित और स्थिर जर्मनी. मीसुम अब्बास के मुताबिक, दोनों में से कोई भी गलत नहीं है, बस दोनों का रास्ता अलग-अलग है.
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