Indian In London: भारतीय कंपनी के को-फाउंडर और CEO की लंदन ट्रिप कड़वे अनुभव में बदल गई. अब बेंगलुरु (Bengaluru) के एंटरप्रेन्योर ने एक्स पर लंदन ट्रिप (London Trip) का अपना अनुभव साझा किया है. डीपटेक स्टार्टअप के CEO ने बताया कि कैसे सेंट्रल लंदन के यूस्टन स्टेशन के बाहर दो लोगों ने बड़ी ही शातिर तरीके से उनका लगेज चुराने की कोशिश की. इस खतरनाक अनुभव के बाद उन्होंने बताया कि लंदन से 1000 गुना ज्यादा सेफ अपना इंडिया है. भारतीय CEO की पोस्ट पर काफी लोगों ने प्रतिक्रियाएं दी हैं और लंदन में लोगों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
बैग चोरी करने आए चोर
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बेंगलुरु (Bengaluru) की डीप-टेक मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप इथेरियल मशीन्स (Ethereal Machines) के को फाउंडर कौशिक मुड्डा (Kaushik Mudda) ने अपनी लंदन ट्रिप का अनुभव साझा किया है. कौशिक ने बताया कि लंदन में पहली रात में उनका बैग चोरी होते-होते बच गया.
कौशिक ने बताया कि जब वह कैब के बाहर निकले तो देखा कि एक और आदमी का हाथ डिक्की के अंदर था. वह शख्स उनका बैग चुराने की कोशिश कर रहा था. तुरंत कौशिक ने बिना देरी किए हुए उस आदमी को धक्का दिया और अपना बैग पकड़ा. इस तरह से उनका बैग चोरी होने से बच गया. पर बैग चुराने की कोशिश कर रहे चोर मौके से फरार हो गए. इस घटना के बाद भारतीय डीप टेक कंपनी के सीईओ की पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी.

Photo Credit: X/kaushakimudda
कमेंट्स में लोगों ने शेयर किया अपना अनुभव
उन्होंने कहा कि लंदन से 1000 गुना ज्यादा अपना भारत सुरक्षित है. जैसे ही यह पोस्ट उन्होंने एक्स पर किया तो कमेंट्स की भरमार हो गई. एक के बाद एक लोग अपनी प्रतिक्रिया देने लगे. कई ऐसे कमेंट्स रहे, जिनमें लोगों ने अपने अनुभव साझा किए. एक यूजर ने लिखा कि इसलिए मैंने उबर या ब्लैक कैब नहीं ली... बस यूं ही एक टैक्सी में बैठ गया जिसका ड्राइवर सस्ते दामों की पेशकश करने के लिए स्टेशन पर आया था. एक अन्य यूजर ने कहा कि जी हां, एकदम सही... यहां भारत में लोग लूटपाट नहीं करते, सिर्फ टैक्स ही आपको लूटते हैं.
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एंटरप्रेन्योर कौशिक की पोस्ट में जैनिल सेठ नाम के एक यूजर ने लिखा कि लंदन के यूस्टन स्टेशन (Euston Station) के बाहर मुझे भी कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ. मेरे साथ मौजूद व्यक्ति वॉशरूम गया था और मैं बेंच पर बैठकर अपने बैग की रखवाली कर रही थी. तभी किसी ने मुझसे रास्ता पूछा और मैंने सहज रूप से अपने बैग की तरफ देखा. तभी एक आदमी उन्हें चुराने ही वाला था. दोनों तुरंत भाग गए.
वहीं, स्वामीनाथन सेंधिल ने कमेंट्स में लिखा, "वह इलाका चोरी के लिए बदनाम है. मैं वहां के अस्पताल में काम करता था. मेरे एक सहकर्मी के साथ लूटपाट हुई और छह महीने में दो बार उसका फोन चोरी हो गया. दूसरी बार तो उसने हार मान ली और खुद ही फोन चोरों को दे दिया. मेरी बहन का फोन भी पास ही कोवेंट गार्डन में चोरी हो गया था. दुर्भाग्य से, रोज़मर्रा के अपराध और गश्ती दल की निगरानी कम हो गई है और इसका कारण अपर्याप्त धन के कारण कर्मचारियों की कमी बताया जा रहा है. किसी एक को दोष देना मुश्किल है, यह ज़्यादातर व्यवस्था की खामी है.
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