अमेरिका के लॉस एंजिलिस में रहने वाले भारतीय मूल के सचिन एच जैन ने एक्स पर अपने परिवार के संघर्ष की एक प्रेरणादायक कहानी शेयर की है. उन्होंने बताया कि 1970 के दशक में अमेरिका पहुंचने के बाद उनकी मां की छोटी-सी बेबीसिटिंग नौकरी ने परिवार को इतना संभाल दिया कि वे अपना पहला घर खरीद सके. सचिन ने लिखा, कि जब उनका परिवार अमेरिका पहुंचा, उस समय उनके पिता एनेस्थीसियोलॉजी की रेजिडेंसी कर रहे थे और अतिरिक्त काम भी करते थे ताकि घर का खर्च चल सके. ऐसे में परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी में उनकी मां ने भी हाथ बंटाने का फैसला किया.
एक नोटिस से शुरू हुआ सफर
सचिन के अनुसार, उनकी मां को अपार्टमेंट बिल्डिंग के नोटिस बोर्ड पर एक हाथ से लिखा विज्ञापन दिखा, बेबीसिटर की जरूरत है. उन्होंने उस पर जवाब दिया और एक नर्स के बच्चे की देखभाल का काम शुरू कर दिया, जिसके बदले उन्हें कुछ डॉलर प्रतिदिन मिलने लगे. धीरे-धीरे उनकी मेहनत और भरोसे की वजह से यह काम बढ़ता गया. अपार्टमेंट के अन्य परिवार भी अपने बच्चों को उनके पास छोड़ने लगे और उनका छोटा-सा घर एक तरह के डे-केयर में बदल गया. जल्द ही वह बिल्डिंग में सबसे भरोसेमंद बेबीसिटर बन गईं.
When my mother first came to this country in the 1970s, my father was busy with his anesthesiology residency and moonlighting to make ends meet.
— Sachin H. Jain, MD, MBA (@sacjai) February 9, 2026
One day, she saw an advertisement on a corkboard in the apartment building where they lived, “babysitter needed.” She decided to… pic.twitter.com/u494Ena5Em
मेहनत की कमाई से खरीदा पहला घर
सचिन ने बताया, कि उनकी मां बच्चों को संभालने के साथ-साथ घर पर रोटियां बनाती थीं, जिन्हें देखकर बच्चे हैरान हो जाते और कहते, मिसेज जैन के पास मैजिक है. काम बढ़ने के साथ उनकी मां की कमाई करीब 200 डॉलर प्रति सप्ताह तक पहुंच गई. एक साल के भीतर उन्होंने लगभग 10,000 डॉलर (करीब 9 लाख रुपये) की बचत कर ली. यही रकम बाद में परिवार के पहले घर की डाउन पेमेंट बनी.
सोशल मीडिया पर लोगों ने किया सलाम
सचिन ने अपने पोस्ट में लिखा, कि वह अपने माता-पिता के साहस और मेहनत से हमेशा प्रेरित रहेंगे, जिन्होंने सब कुछ छोड़कर एक नए देश में नई शुरुआत की. यह कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. लोगों ने उनकी मां के संघर्ष, हिम्मत और जज़्बे को सलाम किया. एक यूजर ने लिखा, माता-पिता का त्याग घर बनने से पहले ही परिवार की नींव तैयार कर देता है. वहीं, कई लोगों ने अपने प्रवासी परिवारों की ऐसी ही संघर्ष भरी कहानियां भी शेयर कीं.
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