विदेश में नौकरी करना कई लोगों का सपना होता है, लेकिन हकीकत अक्सर उम्मीदों से अलग होती है. पेरिस में रहने वाले एक भारतीय युवक ने हाल ही में बताया कि यूरोप में नौकरी ढूंढना भारत जितना आसान नहीं है. उनका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
पारस नाम के इस युवक ने अपने वीडियो में बताया कि भारत और यूरोप के जॉब सिस्टम में काफी अंतर है. उन्होंने कहा, कि भारत में कॉलेज के दौरान ही कैंपस प्लेसमेंट के जरिए छात्रों को नौकरी मिल जाती है, जबकि यूरोप में ऐसा सिस्टम लगभग नहीं है.
भारत बनाम यूरोप: प्लेसमेंट सिस्टम
भारत में स्टूडेंट्स को कॉलेज से ही कंपनियां जॉब ऑफर करती हैं. अगर आपके पास सही स्किल्स और थोड़ी बहुत नेटवर्किंग है, तो नौकरी मिलना आसान हो जाता है. लेकिन, यूरोप में ऐसा कोई संगठित प्लेसमेंट सिस्टम नहीं है. यहां जॉब फेयर होते हैं, लेकिन उनमें भी नौकरी पाना पूरी तरह आपकी मेहनत और कोशिशों पर निर्भर करता है.
देखें Video:
नेटवर्किंग है सबसे जरूरी
पारस के अनुसार, यूरोप में नौकरी पाने के लिए नेटवर्किंग बेहद अहम है. उन्होंने बताया कि LinkedIn जैसे प्लेटफॉर्म पर कनेक्शन बनाना जरूरी है. उनका कहना है कि लगभग 90% काम नेटवर्किंग के जरिए ही आगे बढ़ता है.
इंटरव्यू प्रोसेस में भी अंतर
उन्होंने यह भी बताया, कि भारत में जहां कई कंपनियां 4-5 इंटरव्यू राउंड लेती हैं, वहीं यूरोप में आमतौर पर 2-3 राउंड में ही चयन प्रक्रिया पूरी हो जाती है. कई बार कंपनियां कैंडिडेट को कैफे में बुलाकर अनौपचारिक बातचीत के जरिए भी उसे समझने की कोशिश करती हैं.
Paras के अनुसार, यूरोप में नौकरी पाने के लिए सिर्फ डिग्री काफी नहीं होती. खुद को बेहतर तरीके से एक्सप्रेस करना. आइडियाज शेयर करना और लोगों से जुड़ना. ये सब बहुत जरूरी है.
(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)
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