Hachiko The World's Most Loyal Dog: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से सामने आई पालतू कुत्ते मोती की कहानी इन दिनों लोगों की आंखें नम कर रही है, जिस घर में उसका मालिक जगदीश अब कभी नहीं लौटेगा, उसी घर में मोती आज भी उदास बैठा है, खाना पानी छोड़ चुका है और उस कमरे को निहार रहा है जहां उसने अपने मालिक को आखिरी बार देखा था. मोती की कहानी सुनते ही दुनिया के सबसे मशहूर वफादार कुत्ते हाचिको की याद ताजा हो जाती है.
-
बिकिनी सीन करने में कृति सेनन को क्यों लगे 12 साल? बोलीं- 6-7 साल पहले ऐसा नहीं कर पातीं -
AI एक्ट्रेस टिली नॉरवुड को पसंद है ये बॉलीवुड फिल्म, कृति सेनन के सामने सुनाया फेमस डायलॉग -
‘AI एक्टर्स इंसानी एक्टर्स की जगह नहीं ले सकते’, बोलीं एलाइन वैन डेर वेल्डन -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
नो इंडियंस अलाउड से मेयर तक का सफर, NDTV समिट में रोहतक से लंदन गई मां-बेटे की जोड़ी ने बताई अपनी जर्नी -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके? -
NDTV World Summit 2026: हॉकी चैंपियन नेहा गोयल का बड़ा खुलासा! दर्द में भी जीत का जश्न -
Ashwini Vaishnaw के ऑफिस में कुर्सी के पीछे क्यों लगी है कील? NDTV World Summit में खोला राज -
NDTV World Summit : क्या AI छीन लेगा नौकरियां? माइक वॉल्श ने दिया चौंकाने वाला जवाब
कुछ दशकों पहले जापान में एक कुत्ता अपने मालिक के लौटने का इंतजार करते हुए रोज स्टेशन पहुंचता था. मालिक तो इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन हाचिको का इंतजार दस साल तक खत्म नहीं हुआ. आज शिवपुरी का मोती भी कुछ ऐसा ही कर रहा है. फर्क बस इतना है कि जगह बदली है, देश बदला है, लेकिन कुत्ते का दिल वही है. मोती और हाचिको, दोनों की कहानियां यह बतलाती हैं कि इंसान और जानवर के रिश्ते में कोई स्वार्थ नहीं होता, सिर्फ भरोसा होता है, वो भी ऐसा जो मौत के बाद भी जिंदा रहता है.

Photo Credit: Getty Images
जापान के टोक्यो शहर का शिबुया स्टेशन. यहीं 1925 से 1935 तक एक क्रीम रंग का कुत्ता रोज ठीक 3 बजे आकर खड़ा रहता था...नाम था हाचिको. उसके मालिक प्रोफेसर हाइडेसाबुरो उएनो (Professor Hidesaburo Ueno) हर शाम इसी स्टेशन पर ट्रेन से उतरते थे, लेकिन एक दिन वो लौटकर नहीं आए. प्रोफेसर की यूनिवर्सिटी में अचानक मौत हो गई. हाचिको को ये खबर कभी समझ नहीं आई.
वफादारी जो आदत बन गई (loyal dog Hachiko)
अगले दिन भी हाचिको आया, फिर उसके अगले दिन भी...बारिश हो या बर्फ, भीड़ हो या सन्नाटा, हाचिको का इंतजार नहीं रुका. शुरुआत में स्टेशन कर्मचारी उसे भगाते रहे, बच्चे छेड़ते रहे, लेकिन वक्त के साथ वही लोग उसका ख्याल रखने लगे. उसे खाना मिलने लगा, सहानुभूति मिलने लगी.

Photo Credit: japannews
अखबार से पूरी दुनिया तक (Akita dog loyalty)
1932 में एक अखबार में हाचिको की कहानी छपी और जापान के लोग भावुक हो उठे. लोग दूर-दूर से उसे देखने आने लगे. वफादारी की ये मिसाल स्कूलों में पढ़ाई जाने लगी. 1934 में शिबुया स्टेशन के बाहर उसकी प्रतिमा भी लगाई गई, जो आज भी मौजूद है.
आखिरी सांस, अमर कहानी (pet dog emotional story)
8 मार्च 1935 को हाचिको की मौत हो गई. उसकी अस्थियां उसके मालिक की कब्र के पास रखी गईं. आज उसकी कहानी किताबों, फिल्मों और मूर्तियों में जिंदा है.

Photo Credit: Getty Images
ठीक वैसे ही जैसे हाल ही में भारत में वायरल हुआ एक वीडियो, जिसमें एक पालतू कुत्ता अपने मालिक के जाने के बाद भी उसकी राह देखता रहा. ये कहानियां बताती हैं कि जानवरों का प्यार बिना शर्त होता है.
ये भी पढ़ें:- हाथी की पॉटी से बनती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, क्यों नहीं होती कड़वी, जानें
ये भी पढ़ें:- पौधे कैसे लेते हैं सांस, कैमरे में पहली बार कैद हुआ अद्भुत नजारा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं