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फैक्ट्री वर्कर 18 महीने में बन गया सॉफ्टवेयर डेवलपर, बताया- कैसे सीखा, वो भी एकदम फ्री

संभव वखारिया की कहानी यह सिखाती है कि अगर लगन और फोकस हो, तो इंटरनेट के जरिए कुछ भी सीखा जा सकता है. शुरुआत शून्य से हो, तब भी एक-दो साल की मेहनत जिंदगी बदल सकती है.

फैक्ट्री वर्कर 18 महीने में बन गया सॉफ्टवेयर डेवलपर, बताया- कैसे सीखा, वो भी एकदम फ्री
फैक्ट्री में काम करने वाला 18 महीनों में बना सॉफ्टवेयर डेवलपर

Inspirational Success Story: कभी सब्जी फैक्ट्री में दिन के 10 घंटे काम करने वाला एक युवक आज फुल-स्टैक डेवलपर है. पुणे के संभव वखारिया की यह संघर्ष भरी कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

फैक्ट्री से शुरू हुई जिंदगी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पहले संभव वखारिया की जिंदगी बिल्कुल अलग थी. वह एक सब्जी फैक्ट्री में काम करते थे, जहां उनका ज्यादातर समय पैकिंग और छंटाई में बीतता था. लगातार शारीरिक मेहनत, कम आराम और आर्थिक परेशानियों ने उन्हें कॉलेज छोड़ने पर मजबूर कर दिया था. उनके लिए यह वक्त बेहद मुश्किल और निराशाजनक था.

आर्थिक तंगी ने छुड़वाई पढ़ाई

संभव ने बताया कि पैसों की कमी के कारण उन्हें कॉलेज छोड़ना पड़ा. उस समय उन्हें लगने लगा था कि अब उनके पास आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं बचा है. लेकिन किस्मत ने वहीं से नया मोड़ लिया. एक दोस्त ने उन्हें कोडिंग सीखने की सलाह दी. सीमित बचत और माता-पिता की मदद से संभव ने एक लैपटॉप खरीदा और फैक्ट्री की नौकरी छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने कुछ महीनों तक खुद को पूरी तरह ऑनलाइन पढ़ाई में झोंक दिया. इंटरनेट उनके लिए क्लासरूम बन गया.

बिना कोर्स, बिना फीस सीखी कोडिंग

संभव ने बताया कि उन्होंने महंगे कोर्स करने के बजाय ऑनलाइन उपलब्ध कंटेंट पर भरोसा किया. उन्होंने पहले एचटीएमएल, सीएसएस और जावास्क्रिप्ट सीखी, फिर रिएक्ट पर काम करना शुरू किया. वे रोज़ प्रैक्टिस करते, प्रोजेक्ट बनाते और गलतियों से सीखते रहे. उनकी पहली इंटर्नशिप आसान नहीं थी. काम का दबाव ज्यादा था और सीखने को बहुत कुछ था. लेकिन इसी दौर ने उनमें आत्मविश्वास और तकनीकी समझ पैदा की. इसी बीच निजी जिंदगी में भी मुश्किलें आईं, जब उनके दादा को दिल का दौरा पड़ा. इस वजह से उन्हें कुछ समय के लिए काम रोकना पड़ा.

फिर से की शुरुआत

परिवार की स्थिति संभलने के बाद संभव ने दोबारा फ्रीलांस प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया और धीरे-धीरे खुद को मजबूत किया. उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा बिल्कुल साफ-सुथरी नहीं रही, बल्कि अनिश्चितता और संघर्ष से भरी रही. संभव की यह कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई. लोग उनकी मेहनत और ईमानदारी की तारीफ कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा- यह सच में बहुत प्रेरणादायक है, आगे बढ़ते रहो. दूसरे ने कहा- कमाल है, आपने बहुत अच्छा किया है. एक और यूजर ने लिखा- इंटरनेट बिल वसूल हो गया ऐसी पोस्ट देखकर.

सीख क्या है?

संभव वखारिया की कहानी यह सिखाती है कि अगर लगन और फोकस हो, तो इंटरनेट के जरिए कुछ भी सीखा जा सकता है. शुरुआत शून्य से हो, तब भी एक-दो साल की मेहनत जिंदगी बदल सकती है.

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संज्ञा सिंह
Chief Sub Editor
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