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दिल्ली पुलिस में ACP और अब UPSC में 42वीं रैंक, चंपारण की अपूर्वा वर्मा की सक्सेस स्टोरी

UPSC Success Story: यूपीएससी परीक्षा में 42वीं रैंक हासिल करने वालीं अपूर्वा वर्मा दिल्ली पुलिस में एसीपी के पद पर तैनात हैं. उन्होंने ड्यूटी के दौरान ही परीक्षा की तैयारी की और टॉप-50 में अपनी जगह बनाई.

दिल्ली पुलिस में ACP और अब UPSC में 42वीं रैंक, चंपारण की अपूर्वा वर्मा की सक्सेस स्टोरी
UPSC Success Story: दिल्ली पुलिस की अधिकारी ने हासिल की 42वीं रैंक

UPSC Success Story: संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC का रिजल्ट हाल ही में जारी हुआ है. इस बड़ी परीक्षा में पास होने वाले उम्मीदवारों की कहानियां अब सामने आ रही हैं. किसी ने संघर्ष के बाद ये मुकाम हासिल किया तो कोई ऑनलाइन कोचिंग के सहारे IAS बनने जा रहा है. ऐसी ही एक कहानी दिल्ली पुलिस में तैनात एसीपी अपूर्वा वर्मा की भी है, जिन्होंने यूपीएससी परीक्षा में 42वीं रैंक हासिल की है. अपूर्वा ने अपनी ड्यूटी करते हुए इस परीक्षा की तैयारी की और टॉप-50 में अपनी जगह बना ली. अपूर्वा ने UPSC निकालने के बाद अपनी पूरी जर्नी के बारे में बताया और कहा कि इसमें दिल्ली पुलिस ने भी उनका साथ दिया. 

पति भी हैं सिविल सर्वेंट

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए अपूर्वा वर्मा ने कहा, "यह प्रयास बहुत खास था क्योंकि मैंने अपनी ड्यूटी निभाते हुए इसे पूरा किया. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. यह वाकई बेहद खास अनुभव है. विभाग ने भी मेरा बहुत सहयोग किया और पढ़ाई के लिए मुझे छुट्टियां भी दीं. मेरे पति भी एक सिविल सेवक हैं, जिन्होंने मेरा काफी समर्थन किया."

दादा और नाना से मिली प्रेरणा

अपूर्वा वर्मा ने बताया कि मेरे पेरेंट्स और खासतौर पर दादा जी और नाना जी, दोनों ही इनफ्लुएंशल पर्सनैलिटी रहे हैं. उन दोनों से भी मुझे प्रेरणा मिली और घर में माता-पिता दोनों की तरफ से एक ऐसा माहौल मिला, जिसमें अकेडमिक्स की इज्जत करना सिखाया गया, वो चीज लगातार डेवलप होती गई और सोचा कि यूपीएससी में एंटर करते हैं. भगवान का भी आशीर्वाद रहा कि आज यहां तक पहुंचे हैं. 

बिहार के चंपारण से आती हैं अपूर्वा

UPSC में 42वीं रैंक हासिल करने वालीं अपूर्वा वर्मा ने बताया कि, मैं चंपारण के नरकटियागंज से आती हूं. मेरे दादा जी वहां टीपी वर्मा कॉलेज में प्रिसिंपल थे. मेरे पिता एक सिविल इंजीनियर हैं. बचपन में हमने अपना टाइम वहां गुजारा था. इसके बाद फादर ने बोकारो स्टील प्लांट में ज्वाइन किया, फिर हम वहीं शिफ्ट हो गए और पढ़ाई वहीं हुई. अपूर्वा ने कहा कि चंपारण में आज भी काफी खामिया हैं, जब बच्चे पढ़ने जाते हैं तो उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. 

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मुकेश बौड़ाई
Chief Copy Editor
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