विज्ञापन

22 सालों का रिकॉर्ड टूटा, 40% कम हुई बारिश, अब 'सूरज डिम' कर El Nino को रोकने की है तैयारी

Monsoon Update: भारत में 40% कम बारिश और El Nino के खतरे के बीच, वैज्ञानिकों ने 'सूरज को डिम' करने की तकनीक खोजी है. जानें कैसे काम करता है ये मेगा प्लान.

22 सालों का रिकॉर्ड टूटा,  40% कम हुई बारिश, अब 'सूरज डिम' कर El Nino को रोकने की है तैयारी
Marine Cloud Brightening: सूरज को 'डिम' करके कम होगा El Nino का खतरा, अमेरिका के वैज्ञानिकों ने नई रिसर्च में बताया पूरा प्लान.
AI

El Nino Effect In India: 122 सालों में 5वां सबसे सूखा जून, 40% कम बारिश, 50% से ज्यादा सूखे की मार झेलता मध्य भारत और 23% घट चुकी खरीफ की बुवाई. ये आंकड़े बता रहे हैं कि अल नीनो (El Nino) ने भारत में तबाही मचाना शुरू कर दिया है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की चेतावनी के बाद भारत सरकार भी अलर्ट मोड पर है और PMO को इमरजेंसी मीटिंग बुलानी पड़ी है. लेकिन इस ग्लोबल संकट के बीच अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक अनोखा प्लान तैयार किया है.

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया (UC San Diego) और स्क्रिप्स इंस्टीट्यूशन ऑफ ओशनोग्राफी (SIO) की वैज्ञानिक कैथरीन रिके की 'साइंस एडवांसेज' जर्नल में पब्लिश नई रिसर्च के मुताबिक, समंदर के ऊपर बादलों को खारे पानी के स्प्रे से चमकाकर सूरज की रोशनी को कम किया जा सकता है. ऐसा करने से El Nino के कारण होने वाली भयंकर गर्मी और मौसम की तबाही को रोका जा सकेगा. वैज्ञानिकों का सुझाव है कि मरीन क्लाउड ब्राइटनिंग (MCB) नाम की इस तकनीक से सूरज की तेज किरणों को वापस अंतरिक्ष में रिफ्लेक्ट किया जा सकेगा. इससे प्रशांत महासागर का पानी ठंडा हो जाएगा. नतीजतन, El Nino बहुत ज्यादा ताकतवर नहीं बन पाएगा और हम इसके बुरे असर से बच सकेंगे.

कहां से आया यह अनोखा आइडिया?

साल 2019-2020 में ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में भयंकर आग लगी थी. इस आग से निकले लाखों टन धुएं ने वैज्ञानिकों को यह आइडिया दिया. उस आग के धुएं ने भी आसमान में एक मोटी चादर बना ली थी, जिसने सूरज की रोशनी को रोका. इससे 'La Niña' (El Niño का उल्टा और ठंडा रूप) की स्थिति बन गई थी. इसी घटना के आधार पर वैज्ञानिकों ने अपना कंप्यूटर मॉडल तैयार किया, जिससे पता चला कि सूरज की रोशनी कम करके El Nino का असर काफी हद तक घटाया जा सकता है.

क्या यह तरीका पूरी तरह सेफ है?

यह तरीका सुनने में जितना अच्छा लगता है, इसे लागू करना उतना ही मुश्किल है. टेक्सास A&M यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंड्रयू डेसलर का मानना है कि मौसम के साथ छेड़छाड़ करना खतरनाक हो सकता है. वैज्ञानिकों को डर है कि अगर इस तकनीक में कुछ भी गलत हुआ, तो यह एक बड़ी राजनीतिक समस्या या दो देशों के बीच युद्ध का कारण बन सकता है. रिसर्चर्स का भी यही कहना है कि इस आइडिया को असल दुनिया में आजमाने से पहले अभी कई सालों की रिसर्च और टेस्टिंग की जरूरत है.

भारत में अल नीनो का असर

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने साफ चेतावनी दी है कि अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है. भारत में इसका असर आंकड़ों में साफ दिख रहा है. इस साल पूरे जून में सिर्फ 99.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. 

साल 1901 के बाद से यह भारत का पांचवां सबसे सूखा जून रहा है. बारिश ही नहीं, गर्मी ने भी रिकॉर्ड तोड़े हैं. जून का औसत अधिकतम तापमान 35.67 डिग्री सेल्सियस रहा (सामान्य से 1.06 डिग्री ज्यादा), जो इसे इतिहास का 15वां सबसे गर्म जून बनाता है.

जुलाई के पहले 8 दिनों में थोड़ी राहत जरूर मिली, क्योंकि सामान्य 65.1 मिमी के मुकाबले 92.3 मिमी बारिश हुई. लेकिन खतरा अभी टला नहीं है. मौसम विभाग (IMD) का अनुमान है कि जुलाई में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) की केवल 94% बारिश ही होगी. बता दें कि IMD 1971 से 2020 की अवधि को LPA मापने के लिए इस्तेमाल करता है.

खेतों में सूखा, 23% बुवाई घटी (El Nino Effect)

मानसून की इस बेरुखी ने भारत की आधी से ज्यादा खेती को खतरे में डाल दिया है. काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) के फेलो डॉ. विश्वास चितले के मुताबिक, IMD का पूर्वानुमान 90% (LPA) होने से सूखे का डर और गहरा गया है. कृषि मंत्रालय का डेटा बताता है कि जून तक खरीफ फसलों की बुवाई 23% गिरकर सिर्फ 182.72 लाख हेक्टेयर रह गई है. पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 236.46 लाख हेक्टेयर था. धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और कपास की बुवाई पर भी तगड़ी मार पड़ी है.

आंकड़ों को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने एक हाई-लेवल मीटिंग की. इसमें देश के 262 सबसे संवेदनशील जिलों के लिए एक एग्रीकल्चर कंटिजेंसी प्लान तैयार किया गया है. साथ ही, ICAR ने सभी कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए अल नीनो से निपटने की एक खास SOP भी जारी कर दी है.

अल नीनो क्या है? (El Nino Kya Hai)

अल नीनो दरअसल ENSO (एल नीनो-दक्षिणी दोलन) नाम के क्लाइमेट पैटर्न का एक हिस्सा है. इसकी दूसरी अवस्था ला नीना (La Nina) है (जो मौसम को ठंडा करती है), और तीसरी अवस्था न्यूट्रल होती है. हर कुछ सालों में प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं. इससे समंदर की सारी गर्मी दक्षिण अमेरिका के तट की तरफ खिसक जाती है. यही गर्मी पूरे ग्लोबल एटमॉस्फियर का सिस्टम बिगाड़ देती है. इससे कहीं भयंकर सूखा पड़ता है तो कहीं बाढ़ आती है. अगर इसमें जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) से होने वाले प्रदूषण को भी जोड़ दें, तो अल नीनो दुनिया को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान पहुंचाता है.

ये भी पढ़ें:- दिल्ली-NCR में बारिश का रेड अलर्ट, जगह-जगह जलजमाव से ट्रैफिक का बुरा हाल

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
El Nino, Monsoon 2026, IMD, Science Journal, Weather Update
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com