सोचिए, आप एक आलीशान कॉर्पोरेट ऑफिस में बैठे हैं, वीकेंड पर लेट-नाइट पार्टियां हो रही हैं, लाइफ एकदम चकाचौंध से भरी है. और अचानक... एक दिन आपके पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाए. आपकी नौकरी चली जाए. आप क्या करेंगे? हताश होंगे? यह कहानी है डेविड और नेहा की है. जिन्होंने नौकरी जाने के झटके को अपने जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना लिया. और खुद के लिए फार्म्स बनाया.
एक मेमने ने बदल दी जिंदगी की राह
कहते हैं न कि जब ऊपर वाला कोई रास्ता चुनता है, तो उसके इशारे भी बड़े अजीब होते हैं. डेविड और नेहा का सपना तो था कि कभी अपना एक छोटा सा फार्म होगा, जहां कुत्ते-घोड़े दौड़ेंगे. लेकिन यह हकीकत में कैसे बदला, इसकी शुरुआत बेहद दिलचस्प है.
एक दिन नेहा रास्ते से गुजर रही थीं. वहां से भेड़ों का एक झुंड निकला. उसी वक्त एक भेड़ ने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन मां अपने नवजात मेमने को वहीं छोड़कर झुंड के साथ आगे बढ़ गई. नेहा का दिल पिघल गया. वह उस बेसहारा मेमने को उठाकर घर ले आईं. उसे बकरी का दूध पिलाया, पाला-पोसा. यहीं से शुरुआत हुई एक नए सफर की. उस मेमने को रखने के लिए उन्होंने पलवल के पास एक फार्म खोजा. वहां के मालिक से दोस्ती हुई, तो उसने गुड़गांव के पास अपनी जमीन पर कुछ नया शुरू करने का ऑफर दे दिया.
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बिना बिजली, पेड़ के नीचे कटीं तपती रातें
शुरुआत आसान नहीं थी. डेविड की नौकरी जा चुकी थी. लेकिन उनके भीतर एक अलग ही जुनून था. आप यकीन नहीं करेंगे, शुरुआती दो-तीन महीनों तक डेविड ने बिना बिजली के, चिलचिलाती गर्मी में, फार्म के एक पेड़ के नीचे सोकर रातें काटीं.
लेकिन जब दिल में कुछ कर गुजरने का संतोष हो, तो मुश्किलें भी बौनी लगने लगती हैं.उनके पास करीब 50 लाख रुपये की बचत थी, जिसे उन्होंने सूझबूझ से इस्तेमाल किया. डेविड को मिले सेवरेंस पैकेज का आधा हिस्सा उन्होंने फार्म में लगाया और आधा घर खरीदने में. ₹30 हजार महीने के किराए पर उन्होंने गुड़गांव के पास यह खूबसूरत फार्म तैयार किया.
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हरी वैन से घर-घर पहुंचाया स्वाद
जब फार्म में सब्जियां जरूरत से ज्यादा उगने लगीं, तो दोनों ने तय किया कि इन्हें बर्बाद नहीं होने देंगे. दोनों अपनी एक हरी वैन में सब्जियां भरते और गुड़गांव के सेक्टर-15 की सोसायटियों के बाहर जाकर खड़े हो जाते. सुबह-शाम टहलने निकलने वाले लोगों को रोकते, उनसे बात करते, अपने फार्म के बारे में बताते. वहीं से मिले इन्हें अपने पहले कुछ वफादार ग्राहक.
हर महीने 10 लाख की कमाई
अब बात करते हैं उस आंकड़े की जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे. जो काम एक शौक से शुरू हुआ था, आज वह हर महीने औसतन 10 लाख रुपये का बिजनेस दे रहा है.
डेयरी प्रोडक्ट्स: कुल कमाई का 50% हिस्सा.
पोल्ट्री (मुर्गी पालन): करीब 15 से 20%.
शुद्ध शहद: 15 से 20% (मौसम के हिसाब से).
गांव वालों को मिला रोज़गार और सही दाम
'माला फार्म्स' सिर्फ मुनाफा कमाने का जरिया नहीं है, यह समाज को वापस लौटाने का जरिया भी है. आज फार्म पर 6 लोग सीधे काम करते हैं, जिन्हें समय पर अच्छी सैलरी मिलती है. इसके अलावा, आस-पास के गांवों के 10 से ज्यादा किसान इनके साथ जुड़े हैं, जो इनके लिए पीली सरसों उगाते हैं. डेविड और नेहा उन्हें बीज और तकनीक देते हैं और उनकी फसल को सही और मुनासिब दाम पर खुद खरीदते हैं.
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सुकून ऐसा, जिसे कहते हैं 'नो रिटायरमेंट'
लोग अक्सर 60 साल की उम्र में रिटायर होकर जिस सुकून की तलाश करते हैं, वह डेविड और नेहा ने अपनी जवानी में ही हासिल कर लिया है. अब उन्हें छुट्टियां मनाने कहीं बाहर नहीं जाना पड़ता, उनका घर ही खुद एक खूबसूरत रिजॉर्ट बन चुका है. उनका कहना है, "जब आप अपने पैशन को ही अपना काम बना लेते हैं, तो रिटायरमेंट की जरूरत किसे होती है? यह कोई काम नहीं, यह तो हमारा स्ट्रेस-रिलीवर है."
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