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हाई-फाई कॉर्पोरेट जॉब छोड़ी, फिर करनी पड़ी दूसरों के घर की सफाई... श्वेता की कहानी बदल देगी प्रोफेशनल्स की सोच

नौकरी छोड़ने के बाद दूसरी नौकरी नहीं मिली, आत्मविश्वास टूटने लगा और पहचान खोने का डर सताने लगा. लेकिन फिर उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया जिसने साबित कर दिया कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और जिंदगी दोबारा शुरू की जा सकती है.

हाई-फाई कॉर्पोरेट जॉब छोड़ी, फिर करनी पड़ी दूसरों के घर की सफाई... श्वेता की कहानी बदल देगी प्रोफेशनल्स की सोच
एक शहर, एक नौकरी या एक पद हमेशा इंसान की पहचान नहीं होता.

कई लोग मानते हैं कि बड़ी सैलरी, विदेशी नौकरी और लक्जरी लाइफ मिल जाए तो जिंदगी पूरी तरह सेट हो जाती है. लेकिन, सच यह है कि जिंदगी कभी भी करवट बदल सकती है. एक शहर, एक नौकरी या एक पद हमेशा इंसान की पहचान नहीं होता. ऐसी ही कहानी है श्वेता की, जो कभी लंदन में शानदार सैलरी वाली प्रोडक्ट हेड थीं. ब्रांडेड कपड़े, महंगे जूते, लग्जरी लाइफ और कॉर्पोरेट पहचान, सब कुछ था उनके पास. लेकिन, जब पति की नौकरी के कारण उन्हें मेलबर्न शिफ्ट होना पड़ा, तो जिंदगी अचानक बदल गई. नई जगह पर नौकरी नहीं मिली, आत्मविश्वास टूटने लगा और पहचान खोती महसूस हुई. लेकिन फिर उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया जिसने साबित कर दिया कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और जिंदगी दोबारा शुरू की जा सकती है.

प्रोडक्ट हेड से नई शुरुआत तक का सफर

श्वेता एक लाइफ कोच हैं और सोशल मीडिया पर अपने अनुभव शेयर करती रहती हैं. उन्होंने हाल ही में लाइफ ऑडिट नाम की वीडियो सीरीज शुरू की, जिसमें उन्होंने अपने करियर और जिंदगी के उतार-चढ़ाव के बारे में खुलकर बात की.

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लंदन में श्वेता एक बड़ी कंपनी में प्रोडक्ट हेड थीं. उनकी सैलरी शानदार थी और लाइफस्टाइल भी किसी सपने जैसी लगती थी. वो खुद बताती हैं कि उनके पास ब्रांडेड मेकअप, डिजाइनर कपड़े और जूतों का बड़ा कलेक्शन था. जिंदगी में किसी चीज की कमी नहीं थी. लेकिन मेलबर्न आने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए.

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नौकरी नहीं मिली तो टूटने लगा आत्मविश्वास

मेलबर्न पहुंचने के बाद श्वेता ने नई नौकरी की तलाश शुरू की. लेकिन काफी कोशिशों के बाद भी उन्हें उनकी प्रोफाइल के मुताबिक काम नहीं मिला. धीरे-धीरे इसका असर उनके आत्मविश्वास और पर्सनालिटी पर पड़ने लगा. उन्हें लगने लगा कि शायद अब उनकी पहचान खत्म हो गई है.

आज के समय में बहुत से लोग अपनी नौकरी को ही अपनी पूरी पहचान मान लेते हैं. जब नौकरी चली जाती है या करियर रुक जाता है, तो इंसान खुद को कमजोर महसूस करने लगता है. श्वेता ने भी यही दौर झेला.

एयरबीएनबी की सफाई से मिली नई उम्मीद

आखिरकार उन्हें एयरबीएनबी प्रॉपर्टी मैनेजमेंट का काम मिला. इस नौकरी में उन्हें अपार्टमेंट की सफाई करनी पड़ती थी, बेडशीट बदलनी होती थीं और मेहमानों के सवालों के जवाब देने होते थे. साथ ही वो बच्चों को इंग्लिश भी पढ़ाने लगीं.

पहले की कॉर्पोरेट जिंदगी के मुकाबले यह काम बिल्कुल अलग था. लेकिन श्वेता ने इसे शर्म की तरह नहीं बल्कि एक नई शुरुआत की तरह लिया. वो कहती हैं कि इस नौकरी ने उन्हें दोबारा जिंदगी का एहसास कराया.

कोई काम छोटा नहीं होता

श्वेता की कहानी सिर्फ करियर बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सोच को बदलने वाली कहानी है जिसमें लोग काम को स्टेटस से जोड़कर देखते हैं. जिंदगी में कभी भी हालात बदल सकते हैं, लेकिन जो इंसान सीखना और आगे बढ़ना नहीं छोड़ता, वही आखिर में मजबूत बनकर निकलता है.

उनकी कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो नौकरी खोने, करियर रुकने या नई शुरुआत से डरते हैं. क्योंकि कई बार जिंदगी हमें नीचे नहीं गिराती, बल्कि एक नई दिशा दिखाने की कोशिश करती है.

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