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ना सैलरी बढ़ी, ना मिला प्रमोशन… फिर भी रुक गया नौकरी छोड़कर जा रहा बेस्ट कर्मचारी, सिर्फ बॉस ने पूछा एक सवाल!

यह कहानी बताती है कि सही समय पर सही सवाल पूछना कितना जरूरी होता है. कभी-कभी समाधान पैसे में नहीं, बल्कि समझ और संवाद में छिपा होता है.

ना सैलरी बढ़ी, ना मिला प्रमोशन… फिर भी रुक गया नौकरी छोड़कर जा रहा बेस्ट कर्मचारी, सिर्फ बॉस ने पूछा एक सवाल!
कर्मचारी ने दिया इस्तीफा… बॉस ने पूछा एक सवाल और बदल गया फैसला!

किसी भी कंपनी के लिए अच्छा कर्मचारी खोना बड़ा नुकसान होता है. अक्सर कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को रोकने के लिए सैलरी बढ़ाने का सहारा लेती हैं. लेकिन, एक को-फाउंडर ने सिर्फ एक सवाल पूछकर अपने कर्मचारी को कंपनी छोड़ने से रोक लिया. अब आप सोच रहे होंगे कि भला ऐसा बॉस ने क्या पूछ लिया होगा कि कर्मचारी ने नौकरी छोड़ने के अपने फैसले को ही बदल दिया. तो आइए आगे आपको बताते हैं...

अचानक आया इस्तीफा, बॉस भी रह गई हैरान

डिजिटल क्रिएटिव्स की को-फाउंडर प्रीति मलिक ने एक ऐसी घटना शेयर की, जिसने उन्हें लीडरशिप का बड़ा सबक दिया. उन्होंने बताया कि एक दिन उन्हें एक ऐसे कर्मचारी का इस्तीफा मिला, जिसकी उम्मीद उन्हें बिल्कुल नहीं थी. मीटिंग के दौरान कर्मचारी ने साफ कहा, मैं अब यहां काम जारी नहीं रख पाऊंगा.

एक सवाल जिसने बदल दी पूरी कहानी

इस स्थिति में जहां आमतौर पर लोग सैलरी बढ़ाने की बात करते हैं, वहीं प्रीति ने एक अलग सवाल पूछा- अगर आप अपनी आदर्श नौकरी डिजाइन करें, तो वह कैसी होगी? इस सवाल के जवाब ने पूरी समस्या को सामने ला दिया. बातचीत के दौरान पता चला कि कर्मचारी पैसे के लिए नौकरी नहीं छोड़ रहा था, बल्कि उसके काम और उसकी रुचि में मेल नहीं था. वह ऑटोमेशन से जुड़ा काम पसंद करता था, लेकिन उसे बार-बार ऐसे टास्क दिए जा रहे थे जो उसे पसंद नहीं थे. इससे उसका फोकस टूटता था और वह परेशान हो गया था.

सिर्फ सैलरी नहीं, संतुष्टि भी जरूरी

समस्या समझने के बाद प्रीति मलिक ने कर्मचारी का रोल थोड़ा बदल दिया और उसे वही काम दिया, जिसमें उसकी रुचि थी. इस बदलाव के बाद कर्मचारी ने नौकरी छोड़ने का फैसला वापस ले लिया. प्रीति मलिक का कहना है, कि कर्मचारियों को रोकना सिर्फ पैसे या सुविधाओं पर निर्भर नहीं करता. असल में जरूरी यह है कि कर्मचारी को लगे कि उसका काम मायने रखता है और वह उसमें आगे बढ़ सकता है. उन्होंने कहा, अगर मैंने वह एक सवाल नहीं पूछा होता, तो मैं एक अच्छे और भरोसेमंद कर्मचारी को खो देती.

सोशल मीडिया पर लोगों ने किया सपोर्ट

इस कहानी को सोशल मीडिया पर काफी सराहा गया. एक यूजर ने लिखा, कई बार समस्या परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि रोल की क्लैरिटी होती है. दूसरे ने कहा, लीडर्स को पहले सुनना चाहिए, फिर निर्णय लेना चाहिए.

(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)

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