Assam Regiment Song: रिपब्लिक डे से पहले कर्तव्य पथ पर परेड की रिहर्सल चल रही थी. 20 जनवरी को अभ्यास के दौरान इंस्ट्रक्टर ने जवानों से माहौल हल्का करने के लिए कोई गीत गाने को कहा, तभी असम रेजीमेंट के जवानों ने एक सुर में अपना मशहूर रेजिमेंटल गीत गाना शुरू किया, 'बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है.' जोशीली आवाज, मुस्कुराते चेहरे और लय में थिरकते जवानों का यह वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर छा गया. लोग सिर्फ वीडियो ही नहीं, बल्कि इस गाने की कहानी जानने को भी बेताब हो गए.
Listen to the legendary regimental song of the Assam Regiment -
— TRIDENT (@TridentxIN) January 25, 2026
“Badluram Ka Badan.” pic.twitter.com/dqzZTQKkls
कहानी जो वर्ल्ड वॉर टू से जुड़ी है (Story Linked To World War Two)
यह गीत किसी कल्पना की देन नहीं, बल्कि एक सच्चे वीर जवान की याद में रचा गया है. राइफलमैन बदलूराम ब्रिटिश इंडियन आर्मी की फर्स्ट बटालियन असम रेजीमेंट का हिस्सा थे. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वे जापानी सेना के खिलाफ मोर्चे पर तैनात थे और युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए. कुछ समय बाद जापानी सेना ने कोहिमा इलाके को घेर लिया. सप्लाई लाइन कट गई, खाना खत्म होने लगा और हालात बेहद मुश्किल हो गए. दुर्गम पहाड़ और दुश्मन की गोलाबारी के कारण एयरड्रॉप भी नामुमकिन था.

जब शहीद का नाम बना जीवनदान (How A Martyr Saved His Unit)
इसी दौरान एक अनोखी बात सामने आई. बदलूराम की कंपनी के वाटर मास्टर ने राशन लिस्ट से उनका नाम हटाना भूल गया था. रोज उनके नाम का राशन दर्ज होता रहा. महीनों तक जमा हुआ यह अतिरिक्त राशन बाद में घिरे हुए सैनिकों के लिए संजीवनी बन गया. जब भूख से हाल बेहाल थे, तब इसी राशन ने जवानों को जिंदा रखा और लड़ने की ताकत दी. शहीद बदलूराम का यह अदृश्य योगदान इतिहास में अमर हो गया.

गाना बना असम रेजीमेंट की शान (Song Becomes Assam Regiment Pride)
1946 में मेजर पी टी पॉटर ने इस घटना को गीत का रूप दिया. आज यह गीत असम रेजीमेंट की पहचान है. शिलांग में पासिंग आउट परेड के दौरान रंगूट आज भी इसे गाते हैं. यह धुन जवानों के लिए हंसी नहीं, हौसले और भाईचारे की आवाज है. बदलूराम का बदन भले जमीन के नीचे है, लेकिन उनकी कहानी हर भारतीय जवान की रगों में दौड़ती है. यह वायरल वीडियो हमें याद दिलाता है कि भारतीय सेना का हर गीत एक इतिहास है और हर जवान एक मिसाल.
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