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70 साल की उम्र में भी अकेले चला रहीं ढाबा! 30 साल से मेहनत कर रही बुजुर्ग महिला की कहानी रुला देगी

पश्चिम बंगाल की 70 वर्षीय दीपाली घोष पिछले 30 साल से अकेले एक जर्जर होटल चलाकर जीवन गुजार रही हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हुई उनकी कहानी के बाद लोग मदद के लिए आगे आ रहे हैं.

70 साल की उम्र में भी अकेले चला रहीं ढाबा! 30 साल से मेहनत कर रही बुजुर्ग महिला की कहानी रुला देगी
30 साल से मेहनत कर रही बुजुर्ग महिला की कहानी रुला देगी

पश्चिम बंगाल की एक 70 वर्षीय महिला की संघर्ष भरी कहानी सोशल मीडिया पर लोगों का दिल छू रही है. यह कहानी है दीपाली घोष की, जो पिछले करीब 30 वर्षों से एक छोटे से सड़क किनारे खाने के होटल को अकेले चला रही हैं. यही उनकी रोजी-रोटी का एकमात्र सहारा है और यही उनकी रहने की जगह भी. इस भावुक कहानी को इंस्टाग्राम पर स्टोरीटेलर अराधना चटर्जी ने शेयर किया है, जिसमें उन्होंने लोगों से दीपाली की मदद करने और उनकी दुकान को नया रूप देने की अपील की है.

पति की मौत के बाद अकेले संभाली जिम्मेदारी

वीडियो में बताया गया है कि पति के निधन के बाद दीपाली घोष ने इस छोटे से ‘राइस होटल' को चलाकर अपनी जिंदगी आगे बढ़ाई. वह रोज खुद बाजार से सामान लाती हैं, खाना बनाती हैं, बर्तन साफ करती हैं और दुकान की पूरी व्यवस्था अकेले संभालती हैं. हालांकि, अब हालात पहले जैसे नहीं रहे. लॉकडाउन के बाद उनके ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गई है. आज उनकी दुकान पर मुश्किल से पांच ग्राहक ही आते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है.

देखें Video:

दुकान ही घर, काम ही सहारा

दीपाली की दुकान की हालत काफी जर्जर है. धुएं से काली दीवारें, पुराने बर्तन, बिखरा सामान और कमजोर छत उनके संघर्ष की कहानी बयां करते हैं. दुकान के एक कोने में लकड़ी का एक छोटा सा पट्टा है, जिस पर वह रात में सोती हैं. दीपाली कहती हैं, 'मुझे अपने खाने और दवाइयों के लिए काम करना ही पड़ेगा.' उम्र बढ़ने के साथ उनकी सुनने की क्षमता भी कमजोर हो गई है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने काम करना नहीं छोड़ा. उन्होंने साफ कहा कि वह वृद्धाश्रम नहीं जाना चाहतीं. उनका कहना है, 'मैं इस दुकान को ही चलाते रहना चाहती हूं. इसे छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहती.

मदद के लिए आगे आए लोग

वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भावुक हो गए. कई लोगों ने दुकान को फिर से बनाने और आर्थिक मदद करने की इच्छा जताई है. कुछ लोगों ने लोकेशन मांगकर खुद जाकर मदद करने की बात भी कही. अराधना चटर्जी ने भी लोगों से अपील की है कि छोटे-छोटे सहयोग से दीपाली की जिंदगी को थोड़ा आसान बनाया जा सकता है, ताकि वह सम्मान के साथ अपना काम जारी रख सकें.

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संज्ञा सिंह
Chief Sub Editor
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