- पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की रिविजन प्रक्रिया पूरी होकर कुल मतदाताओं की संख्या 7.04 करोड़ से अधिक हो गई है
- SIR के दौरान 63 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिनमें मृत्यु, स्थानांतरण और दोहराव प्रमुख कारण हैं
- बांकुड़ा जिले में लगभग 1.18 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, अंतिम सूची में वोटर संख्या 29.15 लाख रह गई है
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की रिविजन प्रक्रिया (SIR) पूरी हो गई है. शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने बताया कि अब वोटर लिस्ट में कुल वोटर्स की संख्या 7.04 करोड़ से ज्यादा है. उन्होंने बताया कि SIR की प्रक्रिया के बाद 63 लाख से ज्यादा वोटर्स के नाम हटाए गए हैं. पिछले साल नवंबर तक SIR शुरू होने से पहले तक बंगाल में 7.66 करोड़ से ज्यादा वोटर्स थे.
शनिवार को SIR के बाद वोटर लिस्ट जारी होने के बाद अब लोग परेशान हो रहे हैं. शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, बांकुड़ा जिले में इस पूरी प्रक्रिया के दौरान करीब 1.18 लाख वोटर्स के नाम लिस्ट से हटाए गए हैं.
जिला प्रशासन के एक सीनियर अफसर ने बताया कि बांकुड़ा में 4 नवंबर तक 30.33 लाख से ज्यादा वोटर्स थे. 16 दिसंबर को जब ड्राफ्ट लिस्ट जारी हुई तो ये संख्या घटकर 29.01 लाख हो गई. इसके बाद सुनवाई और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान 4 हजार नाम और हटाए गए. कुछ नए नाम भी जोड़े गए. इसके बाद जिले में वोटर्स की कुल संख्या 29.15 लाख हो गई. इस तरह से कुल 1.18 लाख नाम हट गए हैं.
क्यों हटाए गए नाम?
बांकुड़ा को ऐसा जिला माना जाता है जहां राजनीतिक रूप से सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों की मजबूत पकड़ है. चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, नाम हटाने के प्रमुख कारणों में मृत्यु, स्थानांतरण, दोहराव और संबंधित व्यक्ति का पता न चलना शामिल है. वहीं, नए नामों को सभी आवश्यक सत्यापन के बाद ही जोड़ा गया है. अन्य जिलों के विस्तृत आंकड़े अभी आने बाकी हैं.
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— CEO West Bengal (@CEOWestBengal) February 28, 2026
पूरे बंगाल में हटाए गए वोटर्स के नाम
अधिकारियों के अनुसार, 16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट सूची में शामिल 7.08 करोड़ मतदाताओं को तीन श्रेणियों में बांटा गया है- 'स्वीकृत', 'हटाए गए' और 'विचाराधीन'. आयोग के सूत्रों ने यह भी बताया कि उत्तर कोलकाता के कुछ इलाकों में करीब 17,000 नाम स्वीकृत सूची से गायब पाए गए हैं, जिससे राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं.
अगस्त 2025 तक राज्य में कुल मतदाता संख्या 7.66 करोड़ थी, जो पहली चरण की जांच के बाद घटकर 7.08 करोड़ रह गई थी. यानी प्रारंभिक जांच में ही 58 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए थे.
4 नवंबर से शुरू हुई थी SIR की प्रक्रिया
2002 के बाद यह पहला राज्यव्यापी व्यापक पुनरीक्षण अभियान था, जिसकी शुरुआत 4 नवंबर 2025 को हुई थी. आयोग ने 116 दिनों में प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी कर इसे 'अंतिम लेकिन गतिशील सूची' बताया है, क्योंकि कई मामलों में निर्णय अभी बाकी है. दूसरे चरण में 1.67 करोड़ मतदाताओं के मामलों की सुनवाई की गई, जिनमें 1.36 करोड़ 'तार्किक विसंगतियों' वाले और 31 लाख ऐसे मतदाता थे जिनकी मैपिंग स्पष्ट नहीं थी. फिलहाल लगभग 60 लाख मतदाता अभी भी विचाराधीन श्रेणी में हैं, जिनके नामों को लेकर अंतिम निर्णय आगामी पूरक सूचियों में लिया जाएगा.
वोटर लिस्ट आने के बाद परेशान लोग
इस बीच, संशोधित सूची में अपना नाम जांचने के लिए राज्यभर में जिला निर्वाचन कार्यालयों और साइबर कैफे के बाहर लंबी कतारें देखी गईं. बांकुड़ा, उत्तर 24 परगना और कोलकाता के कई इलाकों में लोग नोटिस बोर्ड पर लगी सूचियों के पन्ने पलटते, मोबाइल से तस्वीरें लेते और अधिकारियों की मदद से अपनी प्रविष्टि तलाशते नजर आए. ऑनलाइन सूची पूरी तरह उपलब्ध न होने के कारण साइबर कैफे में भी अचानक भीड़ बढ़ गई. विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव और लाखों नामों के हटने के कारण यह प्रक्रिया अब प्रशासनिक के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील और चर्चा का विषय बन गई है.
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