Watermelon Price in India: सोशल मीडिया पर तरबूज के दाम '7 रुपये किलो' जमकर ट्रेंड कर रहा है. यह इसलिए ट्रेंड कर रहे हैं, क्योंकि ईरान-इजरायल संघर्ष (ईरान युद्ध) के कारण निर्यात रुकने से मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी देशों में जाने वाला बहुत सारा तरबूज भारतीय स्थानीय बाजार में आ गया है. इस अधिक आपूर्ति से देश में कीमतें गिरकर 6-7 रुपये प्रति किलो तक आ गई हैं. दरअसल, ईरान में चल रहे युद्ध और खाड़ी देशों के साथ बढ़ते तनाव की वजह से भारत से तरबूज और खरबूजे (muskmelon) का निर्यात काफी कम हो गया है. इसका सीधा असर भारत के फलों के व्यापार पर पड़ा है. खासकर रमजान के समय, जब गल्फ देशों में इन फलों की सबसे ज्यादा मांग होती है.
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कौन-कौन से देश भारतीय तरबूज ज्यादातर खरीदते हैं?
दरअसल, रमजान के महीने में भारत से कतर, UAE, बहरीन और ओमान में बड़ी मात्रा में तरबूज जाता है. रमजान के दौरान ये देश भारत से बड़ी मात्रा में तरबूज मंगवाते हैं, लेकिन इस बार हालात बिगड़ने से निर्यात रुक गया.
निर्यात रुकने के बाद क्या हुआ?
जो तरबूज और खरबूजे गल्फ देशों में भेजे जाने थे, वे अब भारत के घरेलू बाजार में ही आ रहे हैं. एक ही बार में बहुत अधिक माल आने की वजह से आपूर्ति बढ़ गई यानी बाजार में फल ज्यादा हो गया और इससे दाम गिर गए.
आजादपुर मंडी में दाम कितने गिरे?दिल्ली की आजादपुर मंडी यानी एशिया की सबसे बड़ी फलों की मंडियों में से एक में फरवरी में कीमत 3,275 रुपये प्रति क्विंटल और मार्च में कीमत 2,301 रुपये प्रति क्विंटल है यानी एक महीने में लगभग 29% की गिरावट, लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि पिछले साल (मार्च 2025) की तुलना में आज की कीमतें अभी भी ज्यादा हैं. तब दाम सिर्फ 1,482 रुपये प्रति क्विंटल थे.
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दाम क्यों नहीं घटे?दिल्ली और बेंगलुरु में क्विक कॉमर्स ऐप्स जैसे Blinkit, Swiggy Instamart आदि पर अभी भी तरबूज दिल्ली में 100 रुपये प्रति किलो से अधिक, बेंगलुरु में 80 रुपये प्रति किलो के आसपास है.
सोशल मीडिया पर क्या कहा जा रहा है?कुछ लोगों ने दावा किया है कि स्थानीय बाजारों में दाम बेहद गिर गए हैं. कर्नाटक की कृषि उद्यमी अरुणा उर्स ने बताया कि कुछ जगहों पर तरबूज सिर्फ ₹7 प्रति किलो में बिक रहा है. कारण वही जो माल खाड़ी देशों के लिए था, वह अब भारतीय बाजार में भर रहा है.
Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.
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