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बाप रे! समोसे का ये रूप देख चकरा जाएगा सिर, अकबर और टीपू सुल्तान भी थे इसके मुरीद

जिसे आप आज नुक्कड़ की दुकान पर चटनी में डुबोकर खाते हैं, वो कभी सुल्तानों की मेज का 'कोहिनूर' हुआ करता था. 500 साल पुरानी एक किताब ने समोसे के ऐसे शाही खानदान का राज खोला है, जिसके आगे आज का आलू वाला समोसा भी पानी भरने लगे

बाप रे! समोसे का ये रूप देख चकरा जाएगा सिर, अकबर और टीपू सुल्तान भी थे इसके मुरीद
समोसे का 'DNA' टेस्ट...500 साल पहले आलू नहीं, ये शाही चीज भरी जाती थी!
@Dr_TheHistories

500 year old Samosa recipe: सोचिए, जिस समोसे को आप चाय के साथ चटकारे लेकर खाते हैं, वो कभी राजा महाराजाओं की थाली की शान हुआ करता था. आलू वाला समोसा तो कल की बात है, असली 'शाही समोसा' तो कुछ और ही था. मांडू के सुल्तान से लेकर अंग्रेजों तक, इस समोसे के सफर की कहानी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है. सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस 500 साल पुरानी रेसिपी ने खाने के शौकीनों के होश उड़ा दिए हैं.

अरे भाई, आप जिसे नुक्कड़ का 'आलू वाला समोसा' समझ रहे हैं, असल में वो किसी जमाने में राजमहलों का शहजादा था. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आजकल एक ऐसी दास्तान वायरल हो रही है, जिसने समोसे के चाहने वालों को हैरान कर दिया है. बात हो रही है 16वीं सदी की एक फारसी पांडुलिपि (Manuscript) की, जिसका नाम है 'निमतनामा' (Ni'matnama) यानी 'खुशियों की किताब'. इसे 1501 से 1510 के बीच मांडू (मध्य प्रदेश) के सुल्तान के लिए लिखा गया था. यकीन मानिए, इस किताब में दर्ज समोसे की रेसिपी आज के समोसे से कोसों दूर और बेहद लजीज थी.

सम्राटों की पसंद और शाही जायका (Mandu Sultan Samosa)

ये कोई मामूली कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि इतिहास का वो गवाह है जो शहंशाह अकबर और टीपू सुल्तान के हाथों से होते हुए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी तक पहुंचा और आज लंदन के 'ब्रिटिश म्यूजियम' की शोभा बढ़ा रहा है. इसमें जिस समोसे का जिक्र है, उसमें आलू का नामोनिशान नहीं था. अब आप कहेंगे भला बिना आलू के कैसा समोसा? तो जनाब, उस दौर में आलू और मिर्च भारत आए ही नहीं थे. उस वक्त समोसे के पेट में भुने हुए बैंगन का गूदा, सोंठ (सूखा अदरक) और प्याज लहसुन के साथ पका हुआ कीमा भरा जाता था, फिर इसे शुद्ध देसी घी में तब तक तला जाता था जब तक वो सोने जैसा सुनहरा न हो जाए.

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समोसे का सात समंदर पार का सफर (The Global Journey of Samosa)
जैसे जैसे वक्त बदला, ये शाही डिश महलों से निकलकर आम जनता के बीच पहुंची. अमीरों का ये 'लजीज कीमा समोसा' धीरे धीरे सस्ता और शाकाहारी होता गया और आलू ने इसकी जगह ले ली. हालांकि, कुछ लोग इसे अरब की देन बताते हैं, तो कुछ इसे शुद्ध हिंदुस्तानी आविष्कार मानते हैं, लेकिन हकीकत यही है कि ये समोसा असल में एक 'इमिग्रेंट' (प्रवासी) है, जिसने भारत आकर यहां के रंग ढंग पूरी तरह अपना लिए. आज भले ही ये महज एक स्नैक हो, पर इसकी हर परत में सदियों पुराना इतिहास और शाही नवाबी छिपी हुई है.

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समोसा सिर्फ एक नाश्ता नहीं, बल्कि एक चलती फिरती हिस्ट्री क्लास है. ये हमें बताता है कि कैसे वक्त के साथ स्वाद और संस्कृति बदलती है. अगली बार जब आप समोसा खाएं, तो याद रखिएगा कि आप उसी चीज का लुत्फ उठा रहे हैं, जिसे कभी बड़े बड़े सुल्तान शौक से खाते थे.

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

लेखक के बारे में
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शालिनी सेंगर
Senior Sub Editor
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