- पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत के 40% कच्चे तेल, 50% LNG और 90% LPG के आयात में बाधा आई है
- पिछले 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में तीन बार वृद्धि हुई है, जिससे उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ा है
- मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमत फरवरी से मई तक 69 डॉलर से बढ़कर 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है
पश्चिम एशिया में पिछले 85 दिनों से जारी संकट का साया भारत की ऑयल और गैस अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहा है. स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के रास्ते तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही बाधित होने से भारत पहुंचने वाला 40% कच्चा तेल, करीब 50% LNG और 90% LPG का आयात बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. संकट के दौरान सरकारी तेल और गैस कंपनियों ने पिछले दस दिनों में पेट्रोल-डीजल और CNG की रिटेल कीमतों में तीन बार बढ़ोतरी की है. लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल और डीजल पर सरकारी तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी काफी ज्यादा है.
पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा
पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हो गया है. 23 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 91 पैसे प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई. यह बढ़ोतरी पिछले 10 दिनों से भी कम समय में तीसरी बार हुई है. दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर से 99.51 रुपये प्रति लीटर हो गया है. वहीं डीजल 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर से 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गया है. वहीं दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में CNG की कीमत में एक रुपये प्रतिकिलो की बढ़ोतरी की गई है. 81.09 रुपये प्रति किलो और नोएडा में 89.70 रुपये प्रति किलो है. 8 दिन में सीएनजी के दाम में 4 रुपया प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है.
| शहर | पेट्रोल का रेट | डीजल का रेट |
| दिल्ली | 99.51 | 92.49 |
| मुंबई | 108.49 | 95.02 |
| कोलकाता | 110.64 | 97.02 |
| चेन्नई | 105.31 | 96.98 |
क्रूड ऑयल 109.31 डॉलर/बैरल तक पहुंचा
दरअसल मिडिल ईस्ट में जारी संकट और तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमत ऊंचे स्तर पर बनी हुई है. पेट्रोलियम मंत्रालय की Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की 22 मई की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने से फरवरी, 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की कीमत 69.01 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 84 दिनों से जारी युद्ध और टकराव की वजह से 21 मई, 2026 को बढ़कर 109.31 डॉलर/बैरल तक पहुंच गई. पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि अभी सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन होने वाला नुकसान करीब 750 करोड़ के आसपास है. इसमें पेट्रोल, डीजल और LPG का आयात खर्च शामिल है.

यानी, मिडिल ईस्ट युद्ध की वजह से कच्चे तेल की औसत कीमत फरवरी, 2026 के मुकाबले 21 मई, 2026 को 40.3 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गई, जो कि 58.39% की बढ़ोतरी है. मई महीने के पहले 21 दिनों के दौरान भी कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की कीमत 107.96 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है .

खाड़ी देशों से आता है 85% से ज़्यादा कच्चा तेल
भारत अपनी ज़रूरत का 85% से ज़्यादा कच्चा तेल और करीब 60% LPG अंतरर्राष्ट्रीय बाज़ार से आयात करता है. इसमें से करीब 40% कच्चा तेल और 90% LPG स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के ज़रिए भारत आती है. लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की वजह से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के ज़रिये कार्गो जहाज़ों की आवाजाही बुरी तरह से बाधित हो रही है, और कच्चे तेल के आयात पर भारत का कुल खर्च करीब 60% तक बढ़ चुका है.

पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले VAT/Sales Tax में कटौती नहीं
सरकारी तेल कंपनियों पर तेल आयात के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए भारत सरकार ने 27 मार्च, 2026 को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटाने का फैसला किया था. सरकार ने आसमान छूती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के इस दौर में तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे को कम करने के लिए taxation revenues छोड़ने का फैसला किया था. लेकिन संकट के इस दौर में राज्यों ने VAT/Sales Tax में कोई कमी नहीं की है. राज्य सरकारों को पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले VAT/Sales Tax से हर साल लाखों करोड़ रुपये की कमाई होती है. इसीलिए, संकट के इस दौर में भी राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर VAT/Sales Tax घटाने के लिए तैयार नहीं हैं.
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