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ये शख्स करता है दुनिया की सबसे खतरनाक नौकरी, मौत के साये में करता है ड्यूटी

World Toughest Job: चेर्नोबिल का 'रिएक्टर नंबर 4' आज एक विशाल कंक्रीट और स्टील के ढांचे के नीचे दफन है, लेकिन इसके पाताल में आज भी करीब 200 टन रेडियोएक्टिव ईंधन सुलग रहा है. लेकिन इससे हमें बचा कौन रहा है?

ये शख्स करता है दुनिया की सबसे खतरनाक नौकरी, मौत के साये में करता है ड्यूटी

World Most Dangerous Job: दुनिया में नौकरियां तो बहुत हैं, लेकिन क्या आप ऐसी जगह काम करने की कल्पना कर सकते हैं जहां मौत सिर्फ एक गलती की दूरी पर खड़ी हो? यूक्रेन के वैज्ञानिक अनातोलि डोरोशेंको हर महीने कम से कम एक बार ऐसी जगह कदम रखते हैं, जिसे 'धरती का नर्क' कहा जाए तो गलत नहीं होगा. वे चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र के उस मलबे के नीचे जाते हैं, जहां 1986 में इतिहास का सबसे भयानक परमाणु विस्फोट हुआ था.

चेर्नोबिल का 'रिएक्टर नंबर 4' आज एक विशाल कंक्रीट और स्टील के ढांचे के नीचे दफन है, लेकिन इसके पाताल में आज भी करीब 200 टन रेडियोएक्टिव ईंधन सुलग रहा है. अनातोलि इसी रेडियोएक्टिव भूलभुलैया में जाते हैं ताकि दुनिया एक और बड़े खतरे से बची रहे.

रेडियोएक्टिव भूलभुलैया में ड्यूटी

अनातोलि 'इंस्टीट्यूट फॉर सेफ्टी प्रॉब्लम्स ऑफ न्यूक्लियर पावर प्लांट्स' (ISPNPP) में शोधकर्ता हैं. उनका काम रिएक्टर के नीचे स्थित कंट्रोल रूम और गलियारों की जांच करना है. धमाके के समय ये हिस्से तबाह हो गए थे, लेकिन आज भी वहां रेडियोएक्टिविटी का स्तर इतना अधिक है कि शरीर कांप जाए. वहां की दीवारों, फर्श और हवा, हर चीज में जहर घुला हुआ है.

हैरानी की बात यह है कि इस भूलभुलैया के कुछ हिस्सों में रेडिएशन इतना ज्यादा है कि अनातोलि को अपना काम महज 4 मिनट के भीतर खत्म करके बाहर भागना पड़ता है. अगर वे वहां ज्यादा देर रुके, तो रेडिएशन उनके शरीर के अंगों को हमेशा के लिए डैमेज कर सकता है.

डर को बनाया हथियार

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अनातोलि बताते हैं कि इस काम में 'डर' उनका सबसे बड़ा दुश्मन नहीं, बल्कि सबसे अच्छा दोस्त है. उनका मानना है कि जब तक आपको डर लगेगा, तब तक आप सावधान रहेंगे. जिस दिन डर खत्म हुआ और आप इस माहौल के आदी हो गए, समझो मौत करीब है. वे कहते हैं, "अगर आप रेडिएशन को नजरअंदाज करने लगे, तो आप छोटी-छोटी चीजों जैसे दस्ताने या लोहे के टुकड़े की रेडियोएक्टिविटी को भूल जाएंगे, जो जानलेवा हो सकता है."

'एलीफेंट फुट' क्या है?

इस सफर में अनातोलि का सामना 'कोरियम' से होता है. यह एक ऐसा खतरनाक पदार्थ है जो धमाके के वक्त अत्यधिक गर्मी के कारण परमाणु ईंधन और कंक्रीट के पिघलने से बना था. यह देखने में किसी ज्वालामुखी के लावे जैसा लगता है. इसी का एक हिस्सा 'एलीफेंट फुट' (हाथी का पैर) कहलाता है. ये दुनिया के सबसे जहरीले और रेडियोएक्टिव कचरे में से एक है.

रिएक्टर का मुख्य हिस्सा भारी कंक्रीट के नीचे दबा है, इसलिए वहां सीधे जाना नामुमकिन है. अनातोलि और उनके साथी गलियारों में सेंसर लगाते हैं और डेटा इकट्ठा करते हैं ताकि यह समझा जा सके कि मलबे के भीतर परमाणु ईंधन की स्थिति क्या है. अगर वे यह निगरानी छोड़ दें, तो अंदर चल रही प्रक्रियाएं अनियंत्रित हो सकती हैं. ये भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं.

कैसे करते हैं खुद की सुरक्षा?

इस खतरनाक मिशन पर जाने के लिए अनातोलि को खास किस्म के सुरक्षा कवच पहनने पड़ते हैं. इसमें कई लेयर वाले कपड़े, रेस्पिरेटर और पॉलिथीन के सूट शामिल होते हैं. काम खत्म करके बाहर आने की प्रक्रिया और भी जटिल है. उन्हें कई चेकपॉइंट्स से गुजरना पड़ता है, उनकी बॉडी को स्कैन किया जाता है और उनके कपड़ों को या तो पूरी तरह साफ किया जाता है या नष्ट कर दिया जाता है.

इतनी चुनौतियों के बावजूद 38 साल के अनातोलि अपनी नौकरी से प्यार करते हैं. उनका कहना है कि वे तब तक यह जोखिम उठाते रहेंगे जब तक उन्हें कोई रिप्लेसमेंट नहीं मिल जाता.

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