प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में स्लोवाकिया पहुंच गए हैं. वहां वो स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. उनका वहां के कारोबारियों से भी मिलने का कार्यक्रम है. स्लोवाकिया के 1993 में आजाद होने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है. पीएम मोदी की इस यात्रा से पहले एनडीटीवी के साइंस एडिटर पल्लव बागला ने स्लोवाकिया के मोखोव्से न्यूक्लियर पावर प्लांट की यात्रा की.
कैसा है मोखोव्से न्यूक्लियर पावर प्लांट
बागला के मुताबिक मोखोव्से न्यूक्लियर पावर प्लांट में चार न्यूक्लियर यूनिट हैं. इनमें से यूनिटें चालू हैं और एक शुरू होने के लिए तैयार है. मोखोव्से न्यूक्लियर पावर प्लांट से करीब 200 मेगावाट बिजली पैदा होगी.
प्रधानमंत्री मोदी खुद टेक्नोलॉजी में रुचि रखते हैं. उनकी स्लोवाकिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर समझौता होना है. स्लोवाकिया ने भारत को डीकमीशनिंग (प्लांट बंद करने) और वेस्ट डिस्पोजल (कचरा निपटान) की टेक्नोलॉजी देने का प्रस्ताव दिया है. बागला के मुताबिक मोखोव्से न्यूक्लियर पावर प्लांट के चार रिएक्टर रूस के रोसाटॉम (Rosatom) द्वारा बनाए गए 500 मेगावाट के रिएक्टर हैं. भारत का कुडनकुलम स्थित रिएक्टर 1000 मेगावाट के हैं.
कितना है भारत और स्लोवाकिया के बीच व्यापार
भारत और स्लोवाकिया के बीच एक अरब डॉलर का व्यापार होता है. प्रधानमंत्री की इस यात्रा के बाद इसके बढ़ने की उम्मीद है.भारत का टाटा ग्रुप की मौजूदगी पहले से ही स्लोवाकिया में है. भारत के राजा-महाराजा पहले यहां स्पा आदि के लिए आते थे, लेकिन अब प्रधानमंत्री टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और हाई-टेक टेक्नोलॉजी पर बातचीत के लिए आ रहे हैं. न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत-स्लोवाकिया का सहयोग कैसे होता है, यह तो समय ही बताएगा. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्लोवाकिया का पहला दौरा बहुत दिलचस्प है.
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