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ब्रिक्स में तारिक रहमान क्यों नहीं गए? बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री का जवाब-'बुलाया ही नहीं'

कबीर ने कहा कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की पहली यात्रा बहुपक्षीय नहीं हो सकती. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम द्विपक्षीय दौरों और चर्चाओं पर अधिक जोर दे रहे हैं. जब माहौल अनुकूल होगा और आपसी सम्मान बना रहेगा, तो द्विपक्षीय यात्राएं होंगी."

ब्रिक्स में तारिक रहमान क्यों नहीं गए? बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री का जवाब-'बुलाया ही नहीं'
बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री ने तारिक रहमान के ब्रिक्स में नहीं आने का अजीब कारण बताया है.
  • बांग्लादेश द्विपक्षीय दौरों और चर्चाओं पर अधिक ध्यान दे रहा है और बहुपक्षीय यात्राओं से परहेज कर रहा है
  • बांग्लादेश भारत के साथ द्विपक्षीय यात्रा की व्यवस्था के लिए अनुकूल समय का इंतजार कर रहा है
  • भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि दिसंबर में समाप्त हो रही है, जिसे लेकर बांग्लादेश गंभीरता से काम करेगा

बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान ब्रिक्स समिट में बुलाने के बाद भी नहीं आए. अब बांग्लादेश ने इस पर बहुत अजीब बयान दिया है. बांग्लादेश का कहना है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया था और इसके बजाय बिम्सटेक अध्यक्ष को निमंत्रण दिया गया था.

हुमायूं कबीर का गजब बयान

विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उचित तरीके से आमंत्रित नहीं किया गया था. उन्होंने कहा कि रहमान को यह निमंत्रण प्रधानमंत्री के रूप में नहीं बल्कि सात देशों के संगठन बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में दिया गया था. ये बातें कबीर ने तब कहीं जब उनसे पूछा गया कि क्या रहमान शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे तो उन्होंने सवालों की झड़ी लगा दी. उन्होंने कहा, ‘‘हम कैसे जाएं? क्या बांग्लादेश सरकार से किसी को आमंत्रित किया गया है? हमारे प्रधानमंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया. आपको किसने बताया कि हमारे प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया गया था?''

ब्रिक्स संगठन में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे. 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल करने के लिए इसका विस्तार किया गया और 2025 में इंडोनेशिया भी इसमें शामिल हो गया. 

एक कारण ये भी बताया

कबीर ने कहा कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की पहली यात्रा बहुपक्षीय नहीं हो सकती. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम द्विपक्षीय दौरों और चर्चाओं पर अधिक जोर दे रहे हैं. जब माहौल अनुकूल होगा और आपसी सम्मान बना रहेगा, तो द्विपक्षीय यात्राएं होंगी. जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं है.'' मंत्री ने कहा कि बांग्लादेश समय अनुकूल होने पर भारत की द्विपक्षीय यात्रा की व्यवस्था करने के लिए काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि ढाका अपने राष्ट्रीय हित से जुड़े हर मामले को गंभीरता से निपटाएगा. 30 साल की गंगा जल बंटवारा संधि की समाप्ति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘जहां भी हमारा राष्ट्रीय हित शामिल है, हम पूरी गंभीरता और कुशलता के साथ कार्य करेंगे.'' आपको बता दें कि वर्ष 1996 में हस्ताक्षरित भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि दिसंबर में समाप्त होने वाली है.

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