- मलेशिया के प्रधानमंत्री ने इजरायल को सरकारी आतंकवाद बढ़ावा देने वाला बताया, लेकिन पाकिस्तान पर टिप्पणी से बचे
- उन्होंने पाकिस्तान में स्टेट टेररिज्म को स्वीकार किया, पर इस मुद्दे पर बोलना बहुत संवेदनशील बताया
- अनवर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की, बावजूद इसके अमेरिकी निवेश का खुले दिल से स्वागत किया
ब्रिक्स के लिए दिल्ली पहुंचे मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू एनडीटीवी ने किया. बातचीत में मलेशिया के प्रधानमंत्री खुद कई मुद्दों पर क्लियर नहीं दिखाई दिए. उन्होंने इज़रायल को 'स्टेट टेररिज़्म' (सरकारी आतंकवाद) को बढ़ावा देने वाला बताया, लेकिन पाकिस्तान के 'स्टेट स्पॉन्सर ऑफ़ टेररिज़्म' होने के मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया. इस बारे में उनसे एनडीटीवी की तरफ से काफी सवाल किए गए पर उन्होंने कोई क्लियर स्टैंड नहीं लिया.
NDTV के विष्णु सोम के साथ एक खास इंटरव्यू में, इब्राहिम ने गाजा में हमास के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई की कड़ी निंदा की, लेकिन जब भारत के प्रति पाकिस्तान की आतंकवाद से जुड़ी नीति की बात आई, तो वे कुछ नहीं कह पाए.
इब्राहिम ने NDTV से कहा, "हमास सिर्फ 20 साल पुराना है, लेकिन फिलिस्तीन पर कब्जा 70 साल पुराना है. मलेशिया और भारत में हम उपनिवेशवाद से वाकिफ हैं. हम इजरायल द्वारा फिलिस्तीन पर कब्जे को मंजूरी नहीं दे सकते. लगातार बमबारी और हत्याएं बहुत भयानक हैं. गाजा में इजरायल की कार्रवाई स्टेट टेररिज्म है."
पाकिस्तान पर क्या बोले
इब्राहिम ने पाकिस्तान को भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश कहने से इन्कार करते हुए कहा, "मैं इतनी दूर नहीं जाऊंगा. मुझे पता है कि भारत में ऐसा कहना बहुत संवेदनशील बात है. मैं मोदी जी का करीबी दोस्त हूं और हम पाकिस्तानियों के साथ भी बातचीत करते हैं."
जब उनसे पाकिस्तान-समर्थित आतंकवाद के बारे में तथ्य और आंकड़े पेश किए गए, जिसमें भारत में हजारों लोगों की जान गई है, तो इब्राहिम ने तर्क दिया कि उनकी किसी भी खुफिया एजेंसी ने यह पुष्टि नहीं की है कि आतंकवादी गतिविधियों को पाकिस्तान से निर्देश मिल रहे थे. साथ ही, उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ा कि उनका यह मतलब नहीं है कि आतंकवादी घटनाएं नहीं हुईं.
भारत को महान सभ्यता, महान संस्कृति और महान इतिहास वाला एक महान देश बताते हुए इब्राहिम ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत और पाकिस्तान के बीच के मुद्दों का समाधान हो जाएगा.
सबसे दिलचस्प बात इस इंटरव्यू की ये रही कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की, लेकिन अमेरिकी निवेश का स्वागत किया. उन्होंने अमेरिका से आए पैसों से कोई परहेज नहीं किया.उन्होंने ईरान युद्ध के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया. साथ ही आज ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के साथ हुई अपनी मीटिंग के बारे में बताया.
चीन के रवैये की आलोचना की
इस इंटरव्यू की सबसे महत्वपूर्ण बात ये रही कि मलेशिया के प्रधानमंत्री ने साउथ चाइना सी में चीन के रवैये की आलोचना की. उन्होंने पुष्टि की कि भारत के साथ रक्षा मामलों पर बातचीत हुई है, जिसमें संभवतः ब्रह्मोस भी शामिल था. हालांकि, उन्होंने कहा कि इसकी बारीकियों पर फैसला एक्सपर्ट्स करेंगे.
इसके साथ ही उन्होंने कंफर्म किया कि जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण पर भारत के साथ बातचीत हुई थी. इसके बाद उन्होंने बताया कि वह केरल के उस मौलवी से कल मिलेंगे, जिन्होंने कहा था कि 'महिलाओं को घरों में ही रहना चाहिए', लेकिन वह महिलाओं के बारे में ऐसी सोच नहीं रखते. उन्होंने बताया कि वह फिर भी यह मीटिंग क्यों कर रहे हैं.
यह भी पढ़ें-
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं