जरा सोचिए, आप अपनी पसंदीदा कॉफी शॉप पर जाएं और पता चले कि वह इसलिए बंद है क्योंकि वहां का स्टाफ हिस्ट्री की क्लास ले रहा है. कॉफी शॉप और हिस्ट्री क्लास! हाल ही में दक्षिण कोरिया में बिल्कुल ऐसा ही होगा.
22 जून को, स्टारबक्स साउथ कोरिया के अपने सभी 2,000 स्टोर्स को आधे दिन के लिए बंद रखेगा. उन्होंने ऐसा किसी छुट्टी या जश्न के लिए नहीं किया, बल्कि अपने कर्मचारियों को दूसरों की भावनाओं का सम्मान करने (सोशल सेंसिटिविटी) की ट्रेनिंग देने और आधुनिक कोरियाई इतिहास पर एक लेक्चर देने के लिए किया है. ये सब उसको एक मार्केटिंग में हुई गलती के कारण करना पड़ रहा है.
क्या गड़बड़ हुई?
यह सब एक बड़ी मार्केटिंग गलती से शुरू हुआ. स्टारबक्स ने 18 मई को अपने नए टम्बलर के लिए एक प्रोमो चलाया, जिसे 'टैंक डे' नाम दिया गया.
तारीख का यह चुनाव बहुत बुरा था क्योंकि 18 मई 1980 के ग्वांगजू नरसंहार की बरसी थी. दक्षिण कोरिया के इतिहास का एक काला दौर जब सेना ने लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शन को हिंसक रूप से कुचल दिया था और सैकड़ों लोग मारे गए थे.
ग्वांगजू नरसंहार कई लोगों के लिए एक दर्दनाक याद है. 10 दिनों तक चली हिंसा के दौरान, पैराट्रूपर्स ने सैन्य तानाशाह चुन डू-ह्वान के खिलाफ लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शनों को कुचल दिया.

स्टारबक्स ने अपने प्रमोशन की तारीख को 'टैंक डे' का नाम दिया. इसमें 'थ्वैक ऑन द डेस्क' वाला स्लोगन भी शामिल था. कोरियाई लोगों के लिए, यह वाक्यांश दर्दनाक यादें ताजा कर देता है. 1987 में, पुलिस ने एक छात्र कार्यकर्ता को इतना प्रताड़ित किया कि उसकी मौत हो गई. इस मामले को छिपाने की कोशिश में, पुलिस ने जनता से झूठ बोला और दावा किया कि छात्र की मौत सदमे से हुई थी, क्योंकि एक अधिकारी ने डेस्क पर जोर से हाथ मारा था जिससे 'थ्वैक' की आवाज आई थी. उस झूठ ने पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया. यह मामला दक्षिण कोरिया के लोकतंत्र आंदोलन में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ.
शिनसेगे ग्रुप ने बताया कि मार्केटर्स ने सुझावों के लिए एक AI टूल की मदद लेने के बाद 'थ्वैक' (thwack) स्लोगन चुना था.
कॉफी मग बेचने के लिए पुलिस की बर्बरता और एक दुखद तारीख से जुड़े वाक्यांश का इस्तेमाल करने पर लोगों में तुरंत गुस्सा फैल गया. लोगों ने ब्रांड का बहिष्कार करना शुरू कर दिया, ग्राहकों ने विरोध में अपने स्टारबक्स मग तोड़ दिए और सरकारी मंत्रालयों ने भी कंपनी से अपने संबंध खत्म कर लिए.
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स्टारबक्स को क्या करना पड़ा?
विरोध इतना जबरदस्त था कि स्टारबक्स कोरिया के CEO सोन जंग-ह्यून को नौकरी से निकाल दिया गया. ग्लोबल हेड ऑफिस ने मामले में दखल देते हुए कहा कि हालांकि यह गलती जानबूझकर नहीं की गई थी, लेकिन ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था.
स्टाफ को ट्रेनिंग देने के लिए आधे दिन तक स्टोर बंद करना सस्ता नहीं था. कंपनी को बिक्री में नुकसान के तौर पर अनुमानित 2.1 बिलियन वॉन का नुकसान होने का अनुमान है. भारतीय करसी के हिसाब से यह लगभग 12.8 करोड़ रुपये है.

स्टारबक्स ने ऐसा पहले भी किया है!
असल में, यह पहली बार नहीं है जब स्टारबक्स ने अपने स्टाफ को कुछ सिखाने के लिए अपनी दुकानें बंद की हों.
2018 में, कंपनी को अमेरिका में लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था. दो अश्वेत व्यक्ति, रैशॉन नेल्सन और डोंटे रॉबिन्सन, फिलाडेल्फिया में एक स्टारबक्स में बिजनेस मीटिंग के लिए गए थे. जब वे अपने तीसरे साथी के आने का इंतजार कर रहे थे, तो उनमें से एक ने वॉशरूम इस्तेमाल करने के लिए कहा. स्टाफ ने मना कर दिया क्योंकि उन्होंने अभी तक कुछ भी खरीदा नहीं था.
जब उन लोगों ने चुपचाप जाने से इनकार कर दिया और इंतजार करते रहने का फैसला किया, तो स्टोर के स्टाफ ने पुलिस बुला ली. पुलिस आई, दोनों लोगों को हथकड़ी लगाई और उन्हें कैफे से बाहर ले गई. लोग बहुत गुस्से में थे और उन्होंने स्टारबक्स पर नस्लवाद का आरोप लगाया.
इस बड़ी गड़बड़ी को ठीक करने के लिए, स्टारबक्स ने एक बड़ा कदम उठाया. उन्होंने पूरे अमेरिका में 8,000 स्टोर एक दोपहर के लिए बंद कर दिए और 1,75,000 कर्मचारियों को जरूरी ट्रेनिंग दी. मकसद उन्हें यह सिखाना था कि लोगों के साथ बराबरी का व्यवहार कैसे किया जाए और यह पक्का किया जाए कि हर कोई उनके कैफे में स्वागत महसूस करे, चाहे वे कोई भी हों.
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कॉफी पूरी दुनिया में मशहूर हो रही है
कॉफी का बिजनेस हर जगह तेजी से बढ़ रहा है. दुनिया भर में कॉफी मार्केट की कीमत 38.1 लाख करोड़ रुपये है. भारत में भी कॉफी का चलन तेजी से बढ़ रहा है. भारतीय कॉफी मार्केट की कीमत 2020 में 13,000 करोड़ रुपये थी और 2027 तक इसके बढ़कर 32,000 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है.

क्योंकि इसमें बहुत पैसा कमाया जा सकता है, इसलिए कंपनियां हमारा ध्यान खींचने के लिए लगातार क्रिएटिव मार्केटिंग करने की कोशिश करती रहती हैं. लेकिन कभी-कभी, वे हद पार कर जाती हैं और लोगों को बुरी तरह नाराज कर देती हैं.
बड़े ब्रांड्स ऐसी गलतियां करती रहे हैं
इस मामले में स्टारबक्स अकेली नहीं है. दूसरे बड़े ब्रांड्स ने भी ऐसी ही लापरवाह गलतियां की हैं. 2017 में डव ने बॉडी वॉश का एक विज्ञापन चलाया जिसमें एक अश्वेत महिला को गोरी महिला में बदलते हुए दिखाया गया था. लोगों ने इसे बहुत ज्यादा नस्लवादी बताया, जिसके कारण डव को विज्ञापन हटाना पड़ा और गलती करने के लिए माफी मांगनी पड़ी.
2013 में हुंडई कंपनी ने अपने नए मॉडल को प्रमोट करने के लिए एक बहुत ही असंवेदनशील विज्ञापन बनाया, जिसमें एक आदमी कार के एग्जॉस्ट धुएं से अपनी जान देने की कोशिश कर रहा था. उन्हें लोगों की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा और उन्हें तुरंत माफी मांगकर वीडियो हटाना पड़ा.
आखिरकार, इससे यह पता चलता है कि कंपनी चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, या भले ही वे अपने विज्ञापन लिखने के लिए स्मार्ट AI टूल्स का इस्तेमाल करें, थोड़ी समझदारी और मानवीय संवेदना की हमेशा जरूरत होती है.
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