UClean Founder Arunabh Sinha Success story: सोचिए, एक लड़का जो बिहार के एक ऐसे गांव से आता है जहां बिजली-पानी का अता-पता नहीं. उसका सपना बस इतना था कि कैसे भी पड़ोस के जगमगाते शहर में 'टाटा स्टील' की नौकरी मिल जाए. लेकिन किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था. ये कहानी है यूक्लीन (UClean) के फाउंडर अरुणभ सिन्हा की, जिन्होंने जीरो से हीरो तक का सफर तय किया है.

गांव से आईआईटी बॉम्बे तक
अरुणभ का बचपन जमशेदपुर के पास डिमना गांव में बीता. वहां 20-20 घंटे लाइट नहीं रहती थी, जबकि पास ही टाटा शहर जगमगाता था. दिल में बस एक ही आग थी कि 'टाटा स्टील' में नौकरी लेनी है. इसी जिद में उन्होंने आईआईटी की तैयारी की और पहले ही झटके में आईआईटी बॉम्बे पहुंच गए.
लाखों की नौकरी और एक 'जिद'
आईआईटी के बाद टाटा स्टील नहीं, बल्कि उससे दोगुनी सैलरी वाली एक कंसल्टिंग जॉब मिल गई. लेकिन कहानी तो अब शुरू होनी थी. उन्होंने वो शानदार जॉब छोड़ी, अपना पहला बिजनेस किया, उसे बेचा और फिर ट्रीबो होटल्स (Treebo Hotels) के साथ जुड़ गए. यहां उन्होंने एक बड़ी बीमारी पकड़ी. होटल्स में आने वाली 60% शिकायतें गंदे कपड़ों और लॉउन्ड्री की होती थीं.
लाल बत्ती का सपना और धोबी बनने की जिद
अरुणभ ने तय कर लिया कि वो लॉउन्ड्री बिजनेस करेंगे. लेकिन जैसे ही ये बात घर में कही, कोहराम मच गया. जिस मां ने बेटे को लाल बत्ती वाली गाड़ी में देखने का सपना पाला हो, उसे पता चले कि बेटा 'धोबी' बनने जा रहा है. रिश्तेदारों ने ताने मारे कि 'धोबी ही बनना था तो आईआईटी क्यों किया?' समाज में आज भी इस काम को वो इज्जत नहीं मिलती, लेकिन अरुणभ तो अपने धुन के पक्के थे.

जब जलकर खाक हो गया पहला सपना
वसंत कुंज में उन्होंने अपनी जमा-पूंजी से पहला स्टोर खोला. सोचा था लोग खुद आकर कपड़े धोएंगे (लॉउन्ड्रोमैट मॉडल). सात दिन बीत गए और सिर्फ एक कस्टमर आया. मॉडल बुरी तरह फेल हो गया. तब उन्होंने होम डिलीवरी शुरू की और बिजनेस धीरे-धीरे चलने लगा. लेकिन एक रात, स्पा के तेल लगे तौलिए ड्रायर में छोड़ने की वजह से पूरे स्टोर में भयंकर आग लग गई. 20 लाख का नुकसान और सब कुछ राख. ये वो पल था जहां अच्छे-अच्छे टूट जाते हैं. लेकिन यहीं से 'हीरो' की असली वापसी होती है.
राख से उठने की कहानी
जेब में पैसे नहीं थे, लेकिन हिम्मत बाकी थी. रात को ही उन्होंने मशीन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी के सीईओ को लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक मैसेज ठोका- "मैं इंडिया में लॉउन्ड्री रिवॉल्यूशन लाना चाहता हूं, और देखिए मेरी मशीनें जल गई हैं." अमेरिकी सीईओ इस 'देसी लड़के' के जुनून से इतना इम्प्रेस हुआ कि उसने मुफ्त में पूरा स्टोर दोबारा खड़ा कर दिया. बस शर्त ये थी कि अरुणभ अगले 3 साल सिर्फ उसी की मशीनें इस्तेमाल करेंगे. डूबते को तिनके का सहारा मिला और डील पक्की हो गई.
और फिर जो हुआ, वो इतिहास है
इसके बाद अरुणभ ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. पीआर के एक स्मार्ट दांव से (100 करोड़ की फंडिंग की अफवाह उड़ाकर) उन्होंने सोहा अली खान और कुणाल खेमू जैसे बॉलीवुड सितारों को अपना पार्टनर बनाया. आज यूक्लीन के भारत समेत कई देशों में 900 से ज्यादा स्टोर्स हैं. सोमालिया, घाना, मंगोलिया तक में उनके ब्रांड का डंका बज रहा है. जिस कंपनी की शुरुआत एक जले हुए स्टोर से हुई थी, आज उसका साल का टर्नओवर 210 करोड़ रुपये है और कंपनी मुनाफे में चल रही है. यानी महीने के करीब 17 करोड़ रुपए.
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