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अमेरिका को ग्लूस्टरशायर मिलना ईरान के लिए बहुत बुरा क्यों है?

ब्रिटेन के ठिकानों का उपयोग करके अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर सकता है, साथ ही अपनी प्रमुख संपत्तियों को ईरानी जवाबी हमलों को सीमा से बाहर रख सकता है.

अमेरिका को ग्लूस्टरशायर मिलना ईरान के लिए बहुत बुरा क्यों है?
अमेरिका को अपना सैन्य अड्डा देकर ब्रिटेन ने ईरान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
  • ब्रिटेन ने अमेरिका को दो सैन्य अड्डों का उपयोग करने की अनुमति दी है
  • ग्लूस्टरशायर का फेयरफोर्ड अड्डा और हिंद महासागर का डिएगो गार्सिया अड्डा अ
  • अमेरिका ने फेयरफोर्ड में बी-1 लांसर और सी-5 गैलेक्सी जैसे बड़े विमान उतार कर अपने अभियान को मजबूत किया है
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ब्रिटेन सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि मध्य पूर्व युद्ध के दौरान ईरान के खिलाफ कुछ अभियानों के लिए अमेरिका ने ब्रिटिश सैन्य अड्डों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने "ईरान को क्षेत्र में मिसाइल दागने से रोकने के लिए विशिष्ट रक्षात्मक अभियानों" के लिए इन सैन्य अड्डों का इस्तेमाल शुरू किया है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने 28 फरवरी को ईरान के साथ शुरू हुए अमेरिका-इजरायल युद्ध में कोई भूमिका निभाने से पहले इनकार करके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नाराज कर दिया था. बाद में उन्होंने "विशिष्ट और सीमित रक्षात्मक उद्देश्य" के लिए दो ब्रिटिश सैन्य अड्डों का उपयोग करने के अमेरिकी अनुरोध को स्वीकार कर लिया. ये अड्डे पश्चिमी इंग्लैंड के ग्लूस्टरशायर में फेयरफोर्ड और हिंद महासागर में चागोस द्वीप समूह पर स्थित ब्रिटेन-अमेरिका का डिएगो गार्सिया अड्डा हैं.

क्यों है ईरान के लिए खतरा

  1. ग्लूस्टरशायर और ईरान के बीच की सीधी हवाई दूरी लगभग 5,062 किलोमीटर (3,145 मील) है. खासकर ग्लूस्टर और तेहरान के बीच की उड़ान दूरी लगभग 4,544 किमी बताई गई है.
  2. शनिवार को फेयरफोर्ड में एक अमेरिकी वायु सेना का बी-1 लांसर बमवर्षक विमान उतरा, जिसे एएफपी के एक फोटोग्राफर ने देखा. एक अमेरिकी सी-5 गैलेक्सी विमान भी अड्डे के रनवे पर देखा गया. ब्रिटेन का ये फैसला ईरान के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है.
  3. ब्रिटेन के ग्लूस्टरशायर स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड का अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए उपयोग ईरान के लिए बेहद हानिकारक है, क्योंकि इससे ईरानी क्षेत्र पर सीधे और भारी हवाई हमले करना संभव हो जाता है, विशेष रूप से लंबी दूरी के बी-2 बमवर्षकों का उपयोग करके.
  4. इसके जरिए अब ईरान पर और तेज और भारी बमबारी संभव हो गई है. अब अमेरिका ईरानी ठिकानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर और लंबे समय तक बमबारी करने में सक्षम हो गया है.
  5. ब्रिटेन के ठिकानों का उपयोग करके अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर सकता है, साथ ही अपनी प्रमुख संपत्तियों को ईरानी जवाबी हमलों को सीमा से बाहर रख सकता है.

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