- इजरायल ने तेहरान और इस्फहान के महत्वपूर्ण हवाई अड्डों पर हमले कर बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया.
- संयुक्त हमलों में इस्फहान और आसपास के इलाकों में कम से कम आठ लोगों की मृत्यु हुई है.
- इस्फहान में स्थित ईरान का परमाणु केंद्र इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य लक्षित क्षेत्र रहा है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने ईरान के प्रमुख शहरों तेहरान और इस्फहान को निशाना बनाते हुए हमलों की एक बड़ी श्रृंखला शुरू की. इन सैन्य ऑपरेशनों के तहत ईरान के महत्वपूर्ण हवाई अड्डों पर भी भीषण हमले किए गए, जिससे वहां बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की खबर है. एक स्थानीय प्रांतीय अधिकारी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस्फहान और उसके आसपास के इलाकों में हुए इन इजरायली और अमेरिकी संयुक्त हमलों में अब तक कम से कम 8 लोगों की जान जा चुकी है.
जानकारी के अनुसार ईरान के इस्फ़हान में परमाणु केंद्र है. इजराइल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के तहत इस रणनीतिक क्षेत्र को निशाना बनाया गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि हम ईरान में बहुत अच्छा कर रहे हैं और आप परिणाम देख रहे हैं. उन्होंने अपने इस दावे को दोहराया कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने के बेहद करीब था. उन्होंने आगे कहा कि वे पागल हैं और वे इसका इस्तेमाल कर लेते. इसलिए हमने दुनिया पर एक एहसान किया है. इससे पहले, अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में उन्होंने चेतावनी दी थी कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान पर "बहुत कड़ा" प्रहार करेगा और नए ठिकानों को शामिल करने के लिए हमलों का विस्तार करने की धमकी दी.
अमेरिका ने फिलहाल ईरान के पास अपने दो ताकतवर विमानवाहक पोत - USS जेराल्ड आर. फोर्ड और USS अब्राहम लिंकन पहले से ही तैनात कर रखे हैं. युद्ध के हालात को देखते हुए USS फोर्ड की तैनाती की अवधि बढ़ा दी गई है. USS अब्राहम लिंकन को जनवरी में दक्षिण चीन सागर से हटाकर मिडिल ईस्ट लाया जा चुका है. अब USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश के आने से इस इलाके में अमेरिका की पकड़ और भी मजबूत हो जाएगी.
तीन एयरक्राफ्ट कैरियर मिडिल ईस्ट में तैनात होने से अमेरिका की लड़ाकू क्षमता में भारी इजाफा हो जाएगा. आमतौर पर अमेरिका के एक विमान वाहक पोत पर लगभग 90 लड़ाकू विमान तैनात होते हैं. इस तरह ऐसे तीन पोत होने से क्षेत्र में अमेरिका के पास लगभग 250-270 लड़ाकू विमान उपलब्ध होंगे. अमेरिका ने मध्य-पूर्व में तैनाती बढ़ाकर ईरान को साफ संदेश दे दिया है कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं है.
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