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ट्रंप की घुड़की के बाद इंग्लैंड का सरेंडर, ब्रिटेन ने मिलिटरी बेस पर हो गई यूएस आर्मी की एंट्री

फेयरफोर्ड में शनिवार को अमेरिकी वायु सेना के बी-1 लांसर बमवर्षक विमान को उतरते हुए देखा गया. बेस के रनवे पर एक अमेरिकी सी-5 गैलेक्सी विमान भी उतरा.

ट्रंप की घुड़की के बाद इंग्लैंड का सरेंडर, ब्रिटेन ने मिलिटरी बेस पर हो गई यूएस आर्मी की एंट्री
  • ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ अभियानों के लिए सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है
  • अमेरिकी बी-1 लांसर बमवर्षक विमान ग्लूस्टरशायर के आरएएफ फेयरफोर्ड बेस पर उतरा है
  • ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने शुरुआती सैन्य समर्थन से इनकार किया, फिर बाद में अनुमति दे दी
लंदन:

ब्रिटेन सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि मिडिल ईस्ट युद्ध के दौरान ईरान के खिलाफ कुछ अभियानों के लिए अमेरिका ने ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. ब्रिटेन द्वारा सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने के बाद अमेरिकी बमवर्षक विमान ब्रिटेन के ग्लूस्टरशायर में उतरा. 146 फीट लंबा बी-1 लांसर विमान शुक्रवार शाम को ग्लूस्टरशायर के आरएएफ फेयरफोर्ड में पहुंचा.

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने आखिरकार ब्रिटेन के ठिकानों से ईरानी मिसाइल स्थलों के खिलाफ अमेरिकी रक्षात्मक कार्रवाई की इजाजत दे दी. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और केमी बैडेनोच सहित कई ब्रिटिश राजनेताओं ने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने में देरी के लिए स्टारमर की आलोचना की थी.

स्टारमर ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि युद्ध गैरकानूनी हो सकता था और इसमें एक सुनियोजित और कारगर योजना का अभाव था.

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने "ईरान को क्षेत्र में मिसाइल दागने से रोकने के लिए विशिष्ट रक्षात्मक अभियानों" के लिए इन सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल शुरू किया है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने 28 फरवरी को ईरान के साथ शुरू हुए अमेरिका-इजरायल युद्ध में कोई भूमिका निभाने से पहले इनकार करके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नाराज कर दिया था.

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बाद में उन्होंने "विशिष्ट और सीमित रक्षात्मक उद्देश्य" के लिए दो ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का उपयोग करने के अमेरिकी अनुरोध को स्वीकार कर लिया. ये ठिकाने पश्चिमी इंग्लैंड के ग्लूस्टरशायर में फेयरफोर्ड और हिंद महासागर में चागोस द्वीप समूह पर स्थित ब्रिटेन-अमेरिका का डिएगो गार्सिया बेस हैं.

फेयरफोर्ड में शनिवार को अमेरिकी वायु सेना के बी-1 लांसर बमवर्षक विमान को उतरते हुए देखा गया. बेस के रनवे पर एक अमेरिकी सी-5 गैलेक्सी विमान भी देखा जा सकता था, वहीं बाहर युद्ध-विरोधी प्रदर्शनकारी विरोध कर रहे थे.

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ट्रम्प ने कहा था कि वह "ब्रिटेन से खुश नहीं हैं" और स्टारमर का मज़ाक उड़ाते हुए कहा था, "हम विंस्टन चर्चिल से नहीं निपट रहे हैं."

पूर्व मानवाधिकार वकील स्टारमर ने अपने शुरुआती फैसले का बचाव करते हुए कहा कि ब्रिटेन के पास "हमेशा एक वैध आधार और एक सुविचारित योजना होनी चाहिए." उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि अपना रुख बदलना सही था, क्योंकि अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान द्वारा मिसाइलों और ड्रोन से की गई जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्र में ब्रिटिश हितों और सहयोगियों को खतरे में डाल दिया था.

स्टारमर की सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के सांसद पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर द्वारा 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में इराक पर आक्रमण के लिए दिए गए विनाशकारी समर्थन से अभी भी चिंतित हैं.

शुक्रवार को प्रकाशित 1,045 ब्रिटिश नागरिकों के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 56 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना ​​था कि स्टारमर का ब्रिटेन को शुरुआती हमलों में शामिल न करना सही था. केवल 27 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वह गलत था.

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चंदन वत्स
Chief Sub Editor
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