- मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहम ने मेकरफील्ड उपचुनाव में जीत हासिल कर लेबर पार्टी की लीडरशिप की संभावना बढ़ाई है
- कीर स्टारमर की लोकप्रियता सबसे कम है और पार्टी के कई सदस्य आगामी सम्मेलन में बदलाव चाहते हैं
- बर्नहम ने गाजा युद्धविराम की मांग की और इजरायल की गैर-कानूनी बस्तियों की आलोचना की है
पिछले महीने काउंसिल चुनावों के खराब नतीजों के बाद, UK के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर पर अपनी ही पार्टी के भीतर से इस्तीफा देने का दबाव था. इसी बीच, मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहम ने एक बड़ा प्लान बनाया – उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफील्ड चुनाव क्षेत्र से संसदीय सीट जीतना. और अब, कुछ ही हफ्तों बाद, उन्होंने ठीक वैसा ही कर दिखाया है. इस हफ्ते गुरुवार को हुए एक अहम उपचुनाव में बर्नहम ने आसानी से जीत हासिल की. इस जीत ने उनके लिए लेबर पार्टी और यूनाइटेड किंगडम की लीडरशिप के लिए स्टारमर को चुनौती देने का रास्ता साफ कर दिया है.
स्टार्मर सबसे कम लोकप्रिय प्रधानमंत्री
उनके समर्थकों का मानना है कि सितंबर में होने वाले लेबर पार्टी के अगले सालाना सम्मेलन तक स्टार्मर की जगह लेने के लिए वे सबसे अच्छे उम्मीदवार हैं. पार्टी में कई लोग बदलाव चाहते हैं, क्योंकि कई गलतियों के बाद मई की शुरुआत में हुए स्थानीय चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था. 2024 के आम चुनावों में भारी बहुमत से जीतने के बावजूद, लेबर पार्टी अभी पोल में पिछड़ रही है और अक्सर 'रिफॉर्म' पार्टी से पीछे दूसरे नंबर पर रहती है. इप्सोस (Ipsos) के अनुसार, 1970 के दशक के आखिर में पोलिंग शुरू होने के बाद से स्टार्मर सबसे कम लोकप्रिय प्रधानमंत्री रहे हैं.
बर्नहम पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं. मीडिया में उन्हें "किंग ऑफ द नॉर्थ" कहा जाता है और वे लंदन के राजनीतिक एलीट (खास वर्ग) से बाहर के 'सॉफ्ट-लेफ्ट' (नरमपंथी वामपंथी) दावेदार हैं. 'द टाइम्स' के अनुसार, अगर 56 वर्षीय मेयर उपचुनाव जीत जाते हैं, तो शीर्ष पद के लिए बर्नहम के प्रतिद्वंद्वियों - जिनमें मौजूदा नेता कीर स्टारमर भी शामिल हैं - से पीछे हटने के लिए कहा जा सकता है.
बर्नहम एक कामकाजी परिवार से आते हैं; उनके पिता रॉय ब्रिटिश टेलीकॉम में टेलीफोन इंजीनियर थे और उनकी मां आइलीन मेडिकल रिसेप्शनिस्ट थीं. वे मैनचेस्टर और लिवरपूल के बीच बसे गांव कल्चेथ में पले-बढ़े. बर्नहम ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंग्लिश की पढ़ाई की – वे और उनके भाई अपने परिवार के ऐसे पहले सदस्य थे, जिन्होंने यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की.
बर्नहम और दुनिया
लेबर पार्टी के साथ बर्नहम के मतभेद सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दों तक ही सीमित नहीं हैं. अक्टूबर 2023 के आखिर में, जब लेबर पार्टी का एक बड़ा हिस्सा इजरायल का समर्थन कर रहा था, तब बर्नहम ने लंदन के मेयर सादिक खान और स्कॉटिश लेबर नेता अनस सरवर के साथ मिलकर गाजा में युद्धविराम की मांग की. बर्नहम ने इजरायल की गैर-कानूनी बस्तियों और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आलोचना की है. उन्होंने 2012 में 'लेबर फ्रेंड्स ऑफ फिलिस्तीन' के साथ वेस्ट बैंक का दौरा किया था और उसी साल जुलाई में 'फिलिस्तीन सॉलिडैरिटी कैंपेन' से कहा था कि देश का दर्जा "कोई तोहफा नहीं है जो दिया जाए, बल्कि एक अधिकार है जिसे मान्यता दी जानी चाहिए".
इजरायल का समर्थन भी
हालांकि, वह इजरायल का भी समर्थन करते हैं. 2015 से 'लेबर फ्रेंड्स ऑफ इजरायल' के सदस्य रहे बर्नहम ने अपने उस समय के लीडरशिप कैंपेन के दौरान कहा था कि अगर वह सफल हुए, तो उनकी पहली सरकारी यात्रा इजरायल की होगी. उन्होंने इजरायल के बहिष्कार के कैंपेन को "दुर्भावनापूर्ण" भी बताया. हालांकि वह तथाकथित 'आतंकवाद के खिलाफ युद्ध' के कड़े आलोचक थे, फिर भी उन्होंने इराक युद्ध के पक्ष में वोट दिया और दो बार इसकी जांच के खिलाफ वोट किया. 2023 में, उन्होंने माना कि भले ही इराकी नेता सद्दाम हुसैन को हटाने का कारण मौजूद था, लेकिन "मैं उस गुस्से, बयानबाजी और जल्दबाजी को सही नहीं ठहरा सकता, जिसके साथ यह किया गया, और ना ही बाद की स्थिति के लिए किसी योजना की कमी को."
उन्होंने UK के 'इंडिपेंडेंट' अख़बार में लिखा, "इस वजह से, US-UK की कार्रवाई में बेगुनाह नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और अन्याय की भावना ने कुछ लोगों को आतंकवाद की राह पर धकेल दिया. अगर अमेरिका में हुए 9/11 के जवाब का मकसद आतंकवाद को जड़ से खत्म करना था, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि नतीजा इसके ठीक उलट रहा."
बर्नहम का नाटो प्रेम भी
बर्नहम ने यूरोपीय संघ से UK के बाहर निकलने की आलोचना की है. पिछले साल एक कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अपनी ही पार्टी की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की कि वह ब्रेक्जिट से हुए आर्थिक नुकसान के बारे में खुलकर नहीं बोल पाई. एक अलग कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वे अपनी जिंदगी में UK को फिर से यूरोपीय संघ में शामिल होते देखेंगे. उन्होंने NATO का मजबूती से समर्थन किया है और कहा है कि अगर जेरेमी कॉर्बिन की सरकार चुनी जाती है और गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला करती है, तो वे उनके कैबिनेट से इस्तीफा दे देंगे. हालांकि उन्होंने अभी के लिए दक्षिणपंथी 'रिफॉर्म UK' पार्टी से मिल रही चुनौती को तो रोक लिया है, लेकिन हो सकता है कि वे हमेशा ऐसा ना कर पाएं, भले ही वे देश के सबसे बड़े पद पर पहुंच जाएं.
ये भी पढ़ें-
इजरायल और हिज्बुल्लाह युद्धविराम के लिए हुए सहमत, ईरान-अमेरिका ने की मध्यस्थता: रिपोर्ट
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं