- अमेरिका ने फारस की खाड़ी में ईरान के प्रमुख द्वीपों पर सैन्य कार्रवाई की योजना बनाई है
- होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अबू मूसा, ग्रेटर टुनब और लेसर टुनब द्वीपों का रणनीतिक महत्व है
- ईरान ने भी इन द्वीपों पर मीडियम रेंज की मिसाइलें तैनात की हैं, ऐसे में अमेरिका का हमला करना आसान नहीं होगा
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के फिलहाल थमने के संकेत नहीं मिल रहे हैं. अमेरिका ने पश्चिम एशिया में और अधिक सैनिक भेजने के बाद अब ईरान के द्वीपों पर नजर गड़ा दिया है. इस तरफ 5,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान के द्वीपों पर हमला करने की योजना को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी है. ट्रम्प ने खुद भी जमीनी आक्रमण की संभावना से इनकार नहीं किया है और ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र - खार्ग द्वीप पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है.
अमेरिका की ईरान के द्वीपों पर नजर
फारस की खाड़ी में ईरान के कई द्वीप हैं. इसमें से होर्मुज स्ट्रेट के पास अबू मूसा, ग्रेटर टुनब और लेसर टुनब तीन प्रमुख द्वीप स्थित हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सैनिक यहां हमला कर सकते हैं. हालांकि इन द्वीपों पर हमला करना आसान नहीं है, ईरान ने हाल ही में यहां मीडियम रेंज की मिसाइलें तैनात की हैं.
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अमेरिका ने पश्चिम एशिया में 5000 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं और अब ईरान के रणनीतिक द्वीपों पर नजर गड़ा दिया है. होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित अबू मूसा, ग्रेटर टुनब और लेसर टुनब द्वीपों पर अमेरिका बड़े हमले कर सकता है.#MiddleEast #America pic.twitter.com/y3a09552vX
— NDTV India (@ndtvindia) March 28, 2026
अबू मूसा
क्षेत्रफलः 12.8 वर्ग किलोमीटर
1971 में UAE से लिया कब्जा
ग्रेटर टुनब
क्षेत्रफलः 10.65 वर्ग किलोमीटर
1971 में UAE से लिया कब्जा
लेसर टुनब
क्षेत्रफलः 2 वर्ग किलोमीटर
1971 में UAE से लिया कब्जा

फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के कब्जे वाले तीन अन्य द्वीप भी तेहरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए दबाव बनाने के किसी भी प्रयास में उतने ही महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, जो वैश्विक तेल और गैस प्रवाह के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता है.

अमेरिकी समाचार एजेंसी एक्सियोस ने 26 मार्च को बताया कि पेंटागन ईरान के खिलाफ संभावित "अंतिम प्रहार" के लिए कई सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिनमें अबू मूसा और तुनब द्वीप समूह पर कब्जा करना भी शामिल है.
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका क़ेशम, लारक और खार्ग जैसे अन्य ईरानी द्वीपों पर भी कब्जा करने पर विचार कर रहा है. ईरान के दक्षिणी तटरेखा पर 400 से अधिक द्वीप फैले हुए हैं.

ईरानी द्वीप पर कब्ज़ा करने की तैयारी कर रहे हैं दुश्मन: स्पीकर
इससे पहले ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर ग़ालिबाफ ने भी कहा था कि कुछ सूचनाएं यह संकेत देती हैं कि “दुश्मन” एक क्षेत्रीय देश के समर्थन से ईरान के एक द्वीप पर कब्ज़ा करने के लिए अभियान की तैयारी कर रहे हैं. यदि वे एक कदम भी आगे बढ़ाते हैं, तो उस क्षेत्रीय देश की सभी महत्वपूर्ण अवसंरचनाएं (ईरान के) बिना किसी रोक-टोक के लगातार हमलों के दायरे में आ जाएंगी. उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्र में अमेरिका की सभी गतिविधियों खासकर उसके सैनिकों की तैनाती पर करीबी नजर रख रहा है.
ईरान के खर्ग द्वीप पर अमेरिका का हमला
14 मार्च को अमेरिका ने ईरान के अहम खर्ग द्वीप पर बड़ी बमबारी की थी. ट्रंप ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा था, "मेरे निर्देश पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मिडिल ईस्ट के इतिहास में सबसे शक्तिशाली बमबारी हमलों में से एक को अंजाम दिया. ईरान के सबसे अहम ठिकाने खर्ग द्वीप पर मौजूद हर सैन्य ठिकाने को पूरी तरह से तबाह कर दिया. हमारे हथियार दुनिया के अब तक के सबसे शक्तिशाली और आधुनिक हथियार हैं, लेकिन इंसानियत के नाते मैंने द्वीप पर मौजूद तेल के बुनियादी ढांचे को तबाह न करने का फैसला किया है."

खर्ग द्वीप ईरान के लिए एक बेहद अहम केंद्र है और कच्चे तेल के निर्यात के लिए उसके सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है. ईरान के तेल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी में स्थित इस द्वीप पर मौजूद सुविधाओं के जरिए ही आगे भेजा जाता है.
गौरतलब है कि इजरायल और अमेरिका की ओर से 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों में ईरान को बड़ा नुकसान हुआ है. युद्ध में अब तक हजारों लोग मारे गए हैं.
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