मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच अमेरिका ने अपने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को एक ऐतिहासिक सैन्य सफलता घोषित किया है. यूएस ने दावा किया है कि महज 25 दिनों के भीतर अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ढांचे को पूरी तरह चरमरा दिया है, जिसके बाद ईरान अब शांति की गुहार लगा रहा है. अमेरिका ने कहा है कि ट्रंप सिर्फ धमकी नहीं देते, अगर ईरान नहीं रुका तो वो तबाही मचा देंगे.
'9000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला, 140 जहाज खाक'
व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका ने अब तक 9 हजार से ज्यादा दुश्मन ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया है. इस आक्रामक कार्रवाई का परिणाम यह है कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में 90% तक की भारी गिरावट आई है. सबसे बड़ा नुकसान ईरानी नौसेना को हुआ है. अमेरिका ने 140 से ज्यादा ईरानी नौसैनिक जहाजों को तबाह कर दिया है. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से महज तीन सप्ताह के भीतर दुनिया के किसी भी हिस्से में यह किसी नौसेना का सबसे बड़ा विनाश है.
Press Secretary Karoline Leavitt Briefs Members of the Media, Mar. 25, 2026 https://t.co/5d7o7lbLgr
— The White House (@WhiteHouse) March 25, 2026
'5000 पाउंड के बमों से अंडरग्राउंड बेस तबाह'
होर्मुज स्ट्रेट में ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिकी सेना ने ईरान के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को सुनियोजित तरीके से खत्म कर दिया है. वीकेंड पर अमेरिका ने 5 हजार पाउंड के कई भारी-भरकम बम गिराकर ईरान के उन अंडर ग्राउंड ठिकानों को तबाह कर दिया, जहां एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें और मोबाइल लॉन्चर छिपाकर रखे गए थे.
'परमाणु हथियार बनाने के मंसूबे चकनाचूर'
अमेरिका का कहना है कि यह सैन्य अभियान अपने निर्धारित समय से काफी आगे चल रहा है. इस ऑपरेशन ने ईरान के परमाणु हथियार बनाने के मंसूबों को ऑपरेशन मिडनाइट हैमर की तुलना में कहीं अधिक बुरी तरह कुचल दिया है. राष्ट्रपति ट्रंप और युद्ध विभाग ने अनुमान लगाया था कि इस ऑपरेशन को पूरा करने में लगभग चार से छह हफ्ते लगेंगे.
व्हाइट हाउस प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 बड़ी बातें
- ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में 9,000 से अधिक हमले हुए, जिससे ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले लगभग खत्म हो गए.
- अमेरिका का दावा है कि 140 से ज्यादा ईरानी नौसैनिक जहाज नष्ट हुए, इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा नौसैनिक नुकसान बताया गया.
- अमेरिका ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों और रक्षा उद्योग को निशाना बनाया ताकि तेल और व्यापार मार्ग सुरक्षित रहें.
- अमेरिका के अनुसार ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता बुरी तरह कमजोर हो चुकी है और अब ईरान बातचीत की तलाश में है.
- अमेरिका ने बातचीत के चलते ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोके, लेकिन समझौता न हुआ तो और बड़े हमलों की चेतावनी दी.
यह भी पढ़ें: ईरान का बड़ा दावा, कहा - हमने अमेरिका के F-18 को मार गिराया
'घुटनों पर आया ईरान'
अमेरिका का दावा है कि अपना शीर्ष नेतृत्व, नौसेना, वायु सेना और एयर डिफेंस सिस्टम खोने के बाद ईरान को अपनी हार का एहसास हो गया है और उसकी अपनी रक्षा करने की क्षमता हर घंटे कम हो रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने बातचीत की इच्छा जताई है. पिछले तीन दिनों की सकारात्मक बातचीत के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने अस्थायी रूप से ईरानी ऊर्जा संयंत्रों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हवाई हमलों को टाल दिया है.
व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि ईरान के पास अपने परमाणु मंसूबों को हमेशा के लिए छोड़ने का एक और मौका है, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप की प्राथमिकता हमेशा शांति है. अमेरिका ने चेतावनी भी दी है कि अगर ईरान ने हार नहीं मानी और कोई नई गलती की, तो राष्ट्रपति ट्रंप पहले से भी ज्यादा भयानक प्रहार करेंगे. राष्ट्रपति ट्रंप सिर्फ धमकियां नहीं देते, वे तबाही मचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
यह भी पढ़ें: क्या है 82nd एयरबोर्न डिवीजन? आसमान से बरसने वाली US की सबसे घातक फोर्स, दुनिया के किसी भी कोने में घुसने में माहिर
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं