अमेरिका और ईरान के बीच आखिर समझौता हो ही गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने बुधवार को ही दोनों देशों के बीच हुए MoU पर दस्तखत कर दिए. फ्रांस पहुंचे ट्रंप ने पेरिस के वर्साय पैलेस में इस MoU पर साइन किए. इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों भी मौजूद थे.
लेकिन जिस वर्साय पैलेस में ट्रंप ने ईरान के साथ हुए MoU पर साइन किए, ये वही पैलेस है जहां जून के महीने में ही 107 साल पहले एक ऐसा समझौता हुआ था, जिसने हिटलर की तानाशाही को जन्म दिया. वर्साय में जो संधि हुई थी, उसे हिटलर ने जर्मनी की 'जिल्लत' के तौर पर देखा और फिर जो हुआ, वह काला इतिहास बन गया.
🚨 President Donald J. Trump has SIGNED the Iran Memorandum of Understanding at Versailles in France. 🇺🇸 pic.twitter.com/JQ6qlbvFAF
— The White House (@WhiteHouse) June 17, 2026
4 साल की भयानक लड़ाई के बाद 1919 में वर्साय में पहला विश्व युद्ध खत्म हुआ था. लेकिन यह संधि कुछ लोगों के लिए 'शांति समझौता' तो कुछ के लिए 'जबरन थोपा गया आदेश' थी. इसी संधि ने दूसरे विश्व युद्ध की नींव रखी.
क्या हुआ था?
1914 में पहला विश्व युद्ध शुरू हुआ. 4 साल तक लंबी चली लड़ाई के बाद 11 नवंबर 1918 को सीजफायर हुआ. इस युद्ध की शुरुआत भी जर्मनी ने ही की थी.
इस जंग में जीते 4 बड़े देश- अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और इटली के नेता पेरिस के वर्साय पैलेस में मिले. रूस (सोवियत संघ) इस बातचीत में शामिल नहीं था. हारे हुए देश- जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, बुल्गारिया और तुर्की को इसमें शामिल नहीं किया गया था.

Photo Credit: chateauversailles.fr
आखिरकार 28 जून 1919 में वर्साय पैलेस में वर्साय की संधि पर दस्तखत हुए. इस संधि ने युद्ध शुरू करने के लिए जर्मनी को जिम्मेदार ठहराया. जर्मनों पर कठोर पाबंदियां लगाई गईं. जर्मनी को अपने कई इलाके गंवाने पड़े. उसकी सेना कमजोर कर दी गई. युद्ध शुरू करने के लिए जर्मनी पर भारी जुर्माना लगाया गया.
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...तब भी '14 पॉइंट्स' थे
आज अमेरिका और ईरान के बीच में जो MoU हुआ है, उसमें 14 पॉइंट्स पर ही सहमति बनी है. 1919 में वर्साय की संधि पर साइन होने से पहले तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने अपना 14 पॉइंट का एक प्लान पेश किया. वुल्सन के प्लान को उस समय 'सभी युद्धों को खत्म करने वाला युद्ध' कहा गया.
वुल्सन के 14 पॉइंट्स की तीन बड़ी बातें थीं. पहली- विल्सन ने कहा कि हर देश की जनता खुद तय करे कि उन्हें किसके साथ रहना है. दूसरी- बातचीत सबके सामने हो. और तीसरी- ऐसी जंग दोबारा न हो, इसके लिए 'जनरल एसोसिएशन ऑफ नेशंस' बने. यही बाद में 'लीग ऑफ नेशंस' और फिर 'संयुक्त राष्ट्र' बना.

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लेकिन ऐसा हुआ नहीं... वुल्सन के 14 पॉइंट्स को मानने के लिए जर्मनी तैयार था लेकिन 1919 में जब वर्साय की संधि पर साइन हुए तो इन 14 पॉइंट्स को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. ब्रिटेन और फ्रांस ने बदले की आग में सारा इल्जाम जर्मनी पर डाल दिया.
विल्सन के जो 14 पॉइंट्स थे, उनमें सजा की बजाय 'शांति' की बात थी. जबकि वर्साय संधि ने जर्मनी को बेइज्जत किया. इस संधि से युद्ध भले ही खत्म हो गया था लेकिन संधि उन बुनियादी मुद्दों को हल करने में नाकाम रही जिनके कारण युद्ध शुरू हुआ था. इस संधि के बाद जर्मनी की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई. इस संधि ने ही एडॉल्फ हिटलर और उनकी नाजी पार्टी के साथ-साथ दूसरे विश्व युद्ध की बुनियाद रखी.
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हिटलर और वर्साय पैलेस
1933 में हिटलर जर्मनी का चांसलर बना. 1939 में दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया. हिटलर की नाजी सेना एक के बाद एक इलाकों को हथियाती रही. पेरिस पर हिटलर की नाजी सेना जमकर बमबारी की.

14 जून 1940 की सुबह जर्मन सेना वर्साय पैलेस में घुस गई और उस पर कब्जा कर लिया. अगली सुबह पैलेस की छतों पर नाजी सेना का झंडा लहराता हुआ दिखाई दिया. अगले कुछ हफ्तों में जर्मन सैनिक और अफसर पैलेस में भर गए. 23 जून 1940 को हिटलर खुद पेरिस आया था. हालांकि, वह इस पैलेस में नहीं गया.
जर्मन सैनिकों के कब्जे से पहले वर्साय पैलेस को खाली करवा लिया गया था. कब्जे के बाद जर्मन सैनिकों ने इस पर नाराजगी जताई और उसे पहले जैसा करने को कहा. 1943 आते-आते वर्साय पैलेस जंग का अखाड़ा बनती जा रही थी. फ्रांस के लिए यह सबसे बड़ी चिंता थी. क्योंकि वर्साय पैलेस के आसपास बमबारी हो रही थी और उसे डर था कि कहीं इससे पैलेस को नुकसान न हो.

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जून 1944 तक वर्साय को मित्र देशों की सेना ने जर्मन सेना से आजाद कराने के लिए घेर लिया. दोनों तरफ से भयंकर गोलीबारी हुई. बम बरसे. आखिरकार 25 अगस्त 1944 को जनरल लेक्लेर की सेना ने वर्साय को आजाद करा लिया. जर्मन सैनिक यहां से भाग गए. जब ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिक वहां पहुंचे तो वर्साय ने उनका स्वागत किया.
ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिकों को वर्साय पैलेस के उसी 'हॉल ऑफ मिरर्स' में ले जाया गया, जहां 25 साल पहले वर्साय की संधि पर दस्तखत हुए थे.
कुछ महीनों बाद 30 अप्रैल 1945 को हिटलर ने आत्महत्या कर ली. 8 मई 1945 को उसकी सेना ने सरेंडर कर दिया. बाद में 15 अगस्त 1945 को जापानी सेना ने भी सरेंडर कर दिया और इसके साथ ही एक सनक से शुरू हुआ दूसरा विश्व युद्ध खत्म हो गया.
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