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ईरान के खार्ग द्वीप को धमकी देकर ट्रंप क्या हासिल करना चाहते हैं? जानें ईरान के लिए इस आइलैंड के क्या मायने

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खार्ग द्वीप को लेकर सख्त चेतावनी देकर दबाव की रणनीति अपनाई है. यह द्वीप ईरान के 90% तेल निर्यात का केंद्र है. कब्ज़े से बातचीत का दबाव बढ़ सकता है, लेकिन इससे क्षेत्रीय युद्ध और तेल कीमतों में भारी उछाल का खतरा है.

ईरान के खार्ग द्वीप को धमकी देकर ट्रंप क्या हासिल करना चाहते हैं? जानें ईरान के लिए इस आइलैंड के क्या मायने
  • खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत प्रबंध करता है और इसलिए इसकी रणनीतिक महत्ता है.
  • अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर बड़े पैमाने पर सटीक सैन्य हमले किए हैं जिसमें कई ईरानी सैन्य ठिकाने नष्ट हुए.
  • ईरान ने खार्ग द्वीप पर अतिरिक्त सैनिक और आधुनिक रक्षा प्रणालियां तैनात कर दी हैं.

खाड़ी क्षेत्र में स्थित खार्ग द्वीप, जो आकार में मैनहैटन के लगभग एक-तिहाई के बराबर है, ईरान के तेल उद्योग की जीवनरेखा माना जाता है. यही वजह है कि यह द्वीप अब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान पर दबाव बनाने की ताजा रणनीति के केंद्र में आ गया है.

सोमवार को ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए किसी समझौते पर राजी नहीं होता, तो अमेरिका ईरान के इस प्रमुख तेल निर्यात केंद्र को पूरी तरह नष्ट कर सकता है. इससे एक दिन पहले उन्होंने यह भी दावा किया था कि अमेरिकी सेना खार्ग द्वीप पर बहुत आसानी से कब्ज़ा कर सकती है.

क्या है खार्ग द्वीप?

भले ही खार्ग एक छोटा और कम आबादी वाला द्वीप हो, लेकिन यह ईरान के लिए बेहद अहम है. अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के कच्चे तेल के लगभग 90 प्रतिशत निर्यात का प्रबंधन यहीं से होता है. खाड़ी के उत्तरी हिस्से में स्थित खार्ग द्वीप, ईरानी तट से करीब 30 किलोमीटर दूर है और होर्मुज जलडमरूमध्य से 500 किलोमीटर से अधिक दूरी पर है. यहां तेल के कुएं भले ही न हों, लेकिन ईरान का सबसे बड़ा तेल टर्मिनल, पाइपलाइन नेटवर्क, स्टोरेज टैंक और अन्य अहम ढांचागत सुविधाएं मौजूद हैं.

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खार्ग द्वीप पर US की नजर

द्वीप पर सैन्य ठिकाने भी हैं, जिनमें से कुछ को पहले ही इजरायल-अमेरिका के हमलों में निशाना बनाया जा चुका है. 13 मार्च को अमेरिकी सेंटकॉम (सेंट्रल कमांड) ने कहा था कि अमेरिकी बलों ने खार्ग द्वीप पर बड़े पैमाने पर सटीक हमले किए, जिनमें नौसैनिक खदानों के भंडार, मिसाइल बंकर और 90 से अधिक ईरानी सैन्य ठिकाने नष्ट किए गए, जबकि तेल ढांचे को सुरक्षित रखा गया.

अमेरिकी खुफिया सूत्रों के हवाले से सीएनएन ने बताया कि हाल के हफ्तों में ईरान ने यहां अतिरिक्त सैनिक और रक्षा प्रणालियां तैनात की हैं, जिनमें कंधे से दागी जाने वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (MANPADS) और समुद्री खदानें शामिल हैं.

अमेरिका के पास क्या विकल्प हैं?

सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के पास खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा करने के लिए तीन रास्ते हो सकते हैं. हवाई हमला, समुद्री (एम्फिबियस) अभियान, या दोनों का संयुक्त इस्तेमाल. पेंटागन पहले ही पैराट्रूपर्स और मरीन सैनिकों को इस क्षेत्र में तैनात कर रहा है.

थिंक-टैंक ‘सूफ़ान सेंटर' के मुताबिक, यह सैन्य जमावड़ा ईरान के खिलाफ संभावित ज़मीनी अभियान की भूमिका तैयार कर रहा है. सेंटकॉम के पूर्व कमांडर जनरल जोसेफ वोटेल ने कहा कि खार्ग जैसे छोटे द्वीप पर कब्ज़ा करने के लिए लगभग 800 से 1,000 मरीन सैनिक पर्याप्त हो सकते हैं.

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि द्वीप पर कब्ज़ा करना और उसे लंबे समय तक अपने नियंत्रण में रखना अलग-अलग बातें हैं. स्कॉटलैंड स्थित सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर फिलिप्स ओ'ब्रायन के अनुसार, ईरानी मिसाइलों और ड्रोन की मार में आने वाला यह द्वीप अमेरिका के लिए बनाए रखना मुश्किल हो सकता है.

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ट्रंप ऐसा क्यों करना चाहते हैं?

ट्रंप के वास्तविक युद्ध लक्ष्य अभी स्पष्ट नहीं हैं. यह साफ नहीं है कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़रानी दोबारा शुरू करवाना चाहते हैं, तेहरान में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं, या ईरान को उसके परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर रियायतें देने के लिए मजबूर करना चाहते हैं.

हालांकि, अल्पकालिक रूप से खार्ग द्वीप पर कब्जा अमेरिका को ईरान पर बातचीत का दबाव बनाने का एक शक्तिशाली हथियार दे सकता है, क्योंकि ईरान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल से होने वाली आय पर निर्भर है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान अमेरिकी मांगों के आगे नहीं झुकता, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. खार्ग की आर्थिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने से वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आ सकता है और ईरान को होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजरानी रोकने के लिए और अधिक प्रेरणा मिल सकती है. जैसा कि ओ'ब्रायन ने चेतावनी दी, 'अगर ईरान अपना तेल बाहर नहीं भेज सकता, तो वह दूसरों के तेल को जाने क्यों देगा?'

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Satyam Baghel
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