- आर्कटिक में 8 देशों का क्षेत्राधिकार है- रूस, अमेरिका, कनाडा, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और आइसलैंड
- रूस ने आर्कटिक में कई पुराने सैन्य अड्डे फिर से खोले हैं और परमाणु-संचालित क्रूज मिसाइल का परीक्षण भी किया है
- अमेरिका और कनाडा ने NORAD के माध्यम से आर्कटिक क्षेत्र में अपनी हवाई रक्षा प्रणाली को आधुनिक बना रहे हैं
आर्कटिक धरती के सबसे उत्तरी भाग में स्थित एक ध्रुवीय क्षेत्र है, जहां बस बर्फ ही बर्फ है. इसी आर्कटिक में ग्रीनलैंड बसा है जिसपर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर है. ट्रंप किसी कीमत पर ग्रीनलैंड लेना चाहते हैं क्योंकि उनका कहना है कि यह अमेरिका के लिए अपनी रक्षा सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है. ग्रीनलैंड, डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है और वह दोनों किसी कीमत पर अमेरिका में शामिल होने से इनकार कर रहे हैं. वैसे क्या आपको पता है कि आर्कटिक में कुल आठ देशों का क्षेत्र आता है: रूस, अमेरिका, कनाडा, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और आइसलैंड. आर्कटिक में सर्दियों का औसत तापमान -34° सेल्सियस होता है. चलिए जानते हैं कि आर्कटिक के बर्फीले जमीनों और महासागर में इन आठों देशों ने कौन ने सैन्य हथियार और सैन्य ताकत छिपा रखे हैं.
रूस
आर्कटिक का आधा भूभाग रूसी क्षेत्र है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार 2005 के बाद से मॉस्को ने अपने आर्कटिक मुख्य भूमि और उत्तरी तट के द्वीपों पर, सोवियत काल के दसियों सैन्य अड्डों को फिर से खोला और आधुनिक बनाया है. रूस के लिए आर्कटिक द्वीपसमूह, नोवाया जेमल्या परमाणु हथियारों का परिक्षण स्थल रहा है और आज भी वहां रूस की तैयारी पूरी रहती है. हालांकि रूस ने 1990 के बाद से यहां परमाणु विस्फोट से संबंधित कोई परीक्षण नहीं किया है लेकिन पिछले साल अक्टूबर में, इसने नोवाया जेमल्या से अपनी परमाणु-संचालित ब्यूरवेस्टनिक क्रूज़ मिसाइल का टेस्ट लॉन्च किया था.
यह क्षेत्र रूस के उत्तरी बेड़े का भी घर है, जिसका मुख्यालय सेवेरोमोर्स्क में है और यह रूस की 12 परमाणु-सशस्त्र पनडुब्बियों में से छह का संचालन करता है. रूस के उत्तरी बेड़े के लिए उत्तरी अटलांटिक तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता नॉर्वेजियन स्वालबार्ड द्वीपसमूह और यूरोप के उत्तरी तट के बीच बैरेंट्स सागर के माध्यम से है. इसलिए उस पहुंच को निःशुल्क रखना मास्को के लिए आवश्यक है.
अमेरिका और कनाडा
1957 से, अमेरिका और कनाडा ने उत्तरी अमेरिकी एयरोस्पेस डिफेंस कमांड, जिसे NORAD के नाम से जाना जाता है, के माध्यम से परमाणु मिसाइलों सहित अपनी मातृभूमि के खतरों के खिलाफ संयुक्त रूप से बचाव किया है. IISS के अनुसार, वे NORAD का आधुनिकीकरण कर रहे हैं. कनाडा आर्कटिक और ध्रुवीय दृष्टिकोण (पोलर अप्रोचेज) को कवर करने वाले दो ओवर-द-क्षितिज रडार सिस्टम खरीद रहा है, जिनमें से पहला 2028 तक काम करने लगेगा. वहीं राष्ट्रपति ट्रंप गोल्डन डोम नाम की एक नई मिसाइल रक्षा प्रणाली बना रहे हैं, जिसके लिए उनका कहना है कि ग्रीनलैंड महत्वपूर्ण है.
डेनमार्क के साथ एक रक्षा समझौते के तहत वाशिंगटन के पास उत्तरी ग्रीनलैंड में पिटफिक स्पेस बेस है. इसके अलावा इसके अधिकांश आर्कटिक बल अलास्का में आठ ठिकानों पर स्थित हैं और लगभग 22,000 सैन्य कर्मी हैं. अलास्का अमेरिका का अपना क्षेत्र है जिसे उसने रूस से खरीदा था. वहीं कनाडा के पास पांच आर्कटिक बेस हैं, जिनमें एल्समेरे द्वीप पर एक सिग्नल इंटेलिजेंस स्टेशन अलर्ट भी शामिल है, जो दुनिया का सबसे उत्तरी स्थायी रूप से बसा हुआ इलाका है.
डेनमार्क
डेनमार्क की संयुक्त आर्कटिक कमान का मुख्यालय ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक में है. इसमें लगभग 150 सैन्य और नागरिक कर्मी हैं. जेएसी कांगेरलुसुआक एयरपोर्ट के साथ-साथ पूर्वी और उत्तर-पूर्वी ग्रीनलैंड में चार छोटे सैन्य स्टेशनों पर भी मौजूद है. जेएसी के पास पिटफिक (अमेरिकी सैन्य बेस) में एक संपर्क अधिकारी है. इसका सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल एक सैन्य इकाई है जो पूर्वोत्तर ग्रीनलैंड की विषम परिस्थितियों में लंबी दूरी की टोह लेती है. डॉग स्लेज पेट्रोल का मतलब है कि डेनमार्क के सैनिकों को ट्रेंड कुत्तों की टोली खींचती है और दूर-दराज के बर्फीले इलाकों में ये गश्ती लगता हैं. इस पेट्रोल टीम का ट्रंप ने मजाक उड़ाया था.
स्वीडन और फिनलैंड
स्वीडन के पास आर्कटिक सर्कल के उत्तर में कोई बेस नहीं है, लेकिन बोथोनिया की खाड़ी के उत्तरी तट पर लूलिया में एक वायु सेना बेस है, और लगभग 40 किमी अंदर बोडेन में दो रेजिमेंट के साथ एक सेना बेस है. वहीं फिनलैंड का आर्कटिक सर्कल पर रोवनेमी में एक एयरपोर्ट है, और फिनिश लैपलैंड में उत्तर की ओर एक जेगर ब्रिगेड बेस है. नाटो में शामिल होने के बाद से, दोनों देश अपनी सेनाओं को बाकी गठबंधन के साथ एकीकृत कर रहे हैं.
नॉर्वे
नॉर्वे आर्कटिक सहित उत्तरी अटलांटिक के लगभग 2 मिलियन वर्ग किमी के विशाल समुद्री क्षेत्र के लिए नाटो का मॉनिटर है. इसके कई सैन्य ठिकाने आर्कटिक सर्कल के ऊपर हैं. इसके चार एयरपोर्ट हैं, जिनमें से एक इसके नए F-35 लड़ाकू विमानों के लिए, दो नौसेना अड्डे, कई सैन्य अड्डे और हमले की स्थिति में सुदृढीकरण के लिए आने वाले नाटो सहयोगियों के लिए एक रिसेप्शन सेंटर है. नॉर्वे के आर्कटिक द्वीपसमूह स्वालबार्ड पर कोई सैन्य ठिकाने नहीं हैं.
आइसलैंड
उत्तरी अटलांटिक द्वीप नाटो का सदस्य है लेकिन इसमें कोई सेना नहीं है, केवल तटरक्षक सेवा है. यह रेकजाविक के पास केफ्लाविक एयरपोर्ट पर रोटेशनल डिप्लॉयमेंट में अमेरिकी नौसेना पी-8ए पोसीडॉन समुद्री-गश्ती विमान की मेजबानी करता है. आइसलैंडिक हवाई क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए नाटो के लड़ाकू विमान समय-समय पर केफ्लाविक में घूमते रहते हैं. तैनाती आम तौर पर साल में तीन बार, दो से तीन सप्ताह तक चलती है.
(इनपुट- रॉयटर्स)
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