अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम को खो दिया है. रिपब्लिकन पार्टी के अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम का 71 साल की उम्र में निधन हो गया है. वैसे तो लिंडसे के ऑफिस ने बताया है कि शनिवार को छोटी और अचानक हुई बीमारी के बाद उनका निधन हुआ. एक बयान में बताया गया कि मेडिकल एग्जामिनर ने शुरुआती जांच की है और पता चला है कि लिंडसे ग्राहम की मौत दिल की मुख्य धमनी, 'एओर्टा' के फटने से हुई है. लेकिन लिंडसे ग्राहम की मौत के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. कट्टर दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर लॉरा लूमर ने तो यहां तक दावा किया है कि ईरान या रूस ने लिंडसे को जहर दिया है.
लिंडसे ग्राहम की मौत पर कॉन्सपिरेसी थ्योरी का बाजार गर्म
लॉरा लूमर ने तुरंत लिंडसे ग्राहम की टॉक्सिकोलॉजी जांच की मांग की और कहा कि हो सकता है रूस ने सीनेटर को जहर दिया हो. उनके पास सिर्फ इतना सबूत है कि एक दिन ग्राहम यूक्रेन में थे, और अगले ही दिन उनकी मौत हो गई. लूमर ने जोर देकर कहा कि यह कोई कॉन्स्पिरेसी थ्योरी नहीं है. इसके बाद उन्होंने संभावनाओं का दायरा बढ़ाते हुए ईरान का नाम भी इसमें शामिल कर लिया. उन्होंने कहा कि ग्राहम को पहले ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड से धमकियां मिल चुकी थीं, इसलिए हो सकता है कि ईरानी सरकार ने उन्हें खत्म कर दिया हो. लेकिन रूस और ईरान पर लूमर के इन आरोपों के साथ कोई सबूत पेश नहीं किया गया था.
ट्रंप के MAGA आंदोलन से जुड़े पॉडकास्टर क्लिंट रसेल ने तो इससे भी आगे बढ़कर बात की. उन्होंने कहा कि ग्राहम ने यूक्रेन में एक ड्रोन फैसिलिटी का दौरा किया था और बाद में रूस ने उस जगह पर बमबारी की. इससे उन्होंने यह नतीजा निकाला कि इस बात की "काफी संभावना" है कि रूस ने सेनेटर को भी खत्म कर दिया हो. लेकिन सच्चाई यह है कि ग्राहम की यूक्रेन में मौत नहीं हुई है. वे बमबारी में शामिल नहीं थे, और तब तक वॉशिंगटन लौट चुके थे. लेकिन कॉन्स्पिरेसी थ्योरी की दुनिया में तर्क का नंबर लास्ट में आता है.
कौन थे लिंडसे ग्राहम?
ग्राहम अमेरिका की विदेश नीति के मामलों में वॉशिंगटन की सबसे प्रभावशाली आवाजों में से एक थे. वे अक्सर अमेरिका को एक ऐसे देश के तौर पर पेश करते थे जो दुनिया भर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने को तैयार हो, भले ही उनकी अपनी पार्टी पर ऐसे राष्ट्रपति का कब्जा हो गया हो जो इस सोच पर खुलेआम शक करते थे. अमेरिका के बारे में इसी सोच के साथ, ग्राहम आखिर तक यूक्रेन के पक्के समर्थक बने रहे, जबकि ट्रंप का समर्थन कमजोर पड़ रहा था.
जब ट्रंप दूसरे कार्यकाल के लिए लौटे, तो ग्राहम ने ईरान के प्रति उनके आक्रामक रवैये का स्वागत किया, लेकिन जब राष्ट्रपति ने 'यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट' को खत्म किया, NATO की अहमियत पर सवाल उठाए, ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सहयोगियों के खिलाफ सैन्य बल के इस्तेमाल का सुझाव दिया और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तारीफ की, तो वे ज़्यादातर चुप ही रहे.
ग्राहम ने ईरान को अलग-थलग करने और उसके मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को सीमित करने वाली नीतियों का भी समर्थन किया. उन्होंने पिछले साल परमाणु ठिकानों पर हमला करने के ट्रंप के फैसले का स्वागत किया था और वहां हुए हालिया संघर्ष का समर्थन किया. एक समय, ग्राहम ने ईरानी तेल प्रोसेसिंग के लिए अहम जगह, खार्ग द्वीप पर कब्जा करने के लिए जमीनी सेना का इस्तेमाल करने की वकालत की थी.
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