सुरक्षा खतरों से बचने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति अक्सर कड़े सुरक्षा घेरे में रहते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि खुद को दुश्मनों की नजरों से बचाने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति भी 'चकमा' तकनीक यानी डिकॉय प्लेन का इस्तेमाल करते हैं? हाल ही में तुर्की में अमेरिकी राष्ट्रपति की जान को खतरा था और इसके लिए उन्होंने ट्रक में छिपकर अपना प्लेन बदल लिया. दुनिया को लगा कि ट्रंप अपने एयर फोर्स वन प्लेन में बैठकर जा रहे हैं लेकिन ट्रंप चकमा देते हुए किसी और प्लेन से अमेरिका पहुंचे. अब ट्रंप ने भी इस बात को स्वीकर लिया है.
यह हैरान करने वाली रणनीति सिर्फ हाल ही में देखने को नहीं मिली है, बल्कि दो दशक पहले भी एक राष्ट्रपति को ऐसा करना पड़ा था.
साल 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के भारत-पाकिस्तान दौरे के दौरान भी ऐसा ही कुछ हुआ था.
बिल क्लिंटन का भारत से पाकिस्तान का सीक्रेट सफर
साल 2000 में जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत के दौरे पर थे, तब उन्हें पाकिस्तान भी जाना था. उस दौरान पाकिस्तान में सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर खतरे थे. अमेरिकी अधिकारियों को क्लिंटन की जान का डर था, इसलिए बेहद गुप्त तरीके से एक ऐसा प्लान तैयार किया गया जिसकी भनक किसी को नहीं लगी.
क्लिंटन ने मुंबई से इस्लामाबाद के लिए उड़ान भरी, लेकिन वह अपने पारंपरिक और पहचान वाले विमान 'एयरफोर्स वन' में सवार नहीं हुए. इसकी जगह उन्हें एक बिना किसी निशान वाले सीक्रेट विमान में बैठाया गया. असली एयरफोर्स वन आगे-आगे उड़ रहा था और क्लिंटन का खुफिया विमान ठीक उसके पीछे-पीछे चल रहा था.
इस सीक्रेट मिशन को इस कदर छुपाकर रखा गया था कि राष्ट्रपति के साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों को भी इसकी कानों-कान खबर नहीं हुई. यूएसए टुडे के एक पत्रकार, जो उस समय व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष थे, उन्हें मुंबई से उड़ान भरने से ठीक पहले जो लॉकहार्ट और ओवल ऑफिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने ऑफ-द-रिकॉर्ड इस सुरक्षा इंतजाम के बारे में बताया था.
पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी भारी चिंताएं थीं, क्योंकि प्रेस का एक बड़ा विमान इस्लामाबाद में व्हाइट हाउस के मुख्य विमान से पहले ही लैंड कर चुका था.
कैटरिंग ट्रक में छुपकर निकले डोनाल्ड ट्रंप
इसी तरह का हैरान कर देने वाला वाकया पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी देखने को मिला. वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप जब तुर्की के दौरे पर थे, तब ईरान की तरफ से सुरक्षा खतरों की आशंका को देखते हुए अधिकारियों ने उन्हें गुप्त तरीके से बाहर निकालने की रणनीति बनाई.
उस समय तुर्की के एयरपोर्ट पर तीन अमेरिकी विमान मौजूद थे. इनमें से एक कतर की ओर से गिफ्ट में दिया गया नया बोइंग 747-8 प्लेन भी था, जिसे भविष्य में एयरफोर्स वन बनना था. चूंकि इस नए प्लेन में अभी पुरानी एयरफोर्स वन जैसी उन्नत रक्षात्मक सुरक्षा प्रणालियां पूरी तरह से इंस्टॉल नहीं थीं, इसलिए सुरक्षा अधिकारियों ने एक मास्टरप्लान बनाया.
असली खेल इसके बाद शुरू हुआ. प्लेन के अंदर जाने के बाद ट्रंप और उनके कुछ खास सहयोगियों को सीक्रेट तरीके से एक कैटरिंग ट्रक के कंटेनर में बैठाया गया. यह वही हाइड्रोलिक ट्रक था जो आमतौर पर विमानों में खाना-पीना पहुंचाने के काम आता है.
इस ट्रक के कंटेनर को लिफ्ट के जरिए विमान के दरवाजे तक ऊपर उठाया गया था. ट्रंप बिना किसी की नजर में आए एयरफोर्स वन से निकले और कैटरिंग ट्रक के जरिए दूसरे छोटे सी-32ए (C-32A) सैन्य विमान तक पहुंच गए. इस ऑपरेशन में शामिल कई कर्मचारियों को भी इस पूरे सीक्रेट प्लान की भनक तक नहीं लगने दी गई थी.
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