- अमेरिकी सेना ने कसरक से वापसी शुरू कर दी है क्योंकि सीरियाई सरकार और स्थानीय परिस्थितियां बदल रही हैं.
- यह वापसी ISIS के खिलाफ लड़ाई और अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव के संकेत देती है.
- इससे सीरिया में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदल सकता है और रणनीतिक गठबंधन की नई रूपरेखा बन सकती है.
दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पूर्वोत्तर सीरिया के सबसे बड़े सैन्य अड्डे से अपने फौज की वापसी शुरू कर दी है. स्थानीय सुरक्षा और सेना सूत्रों के अनुसार कसरक स्थित इस मुख्य बेस से दर्जनों ट्रकों, भारी हथियारों और बख्तरबंद वाहनों को निकाला गया और वहां से बाहर की हाईवे पर इराक की ओर बढ़ते देखा गया. यह वापसी ऐसे समय में हो रही है जब सीरियाई सरकार ने इस क्षेत्र पर अपना नियंत्रण धीरे-धीरे बनाया है. अमेरिकी सेना के मुताबिक यह कदम स्थितियों के अनुसार और सोच-समझकर लिया गया है, लेकिन इस बात पर किसी तरह की आधिकारिक टिप्पणी नहीं मिली कि यह वापसी स्थायी होगी या अस्थायी.
दरअसल, पिछले महीने ही सीरियाई सरकार ने कुर्द नेतृत्व वाली सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत कुर्द बलों और संस्थानों को धीरे-धीरे राज्य में एकीकृत किया जाएगा. यह समझौता एक दशक से भी अधिक समय तक चले संघर्ष के बाद सीरियाई सेना के पूर्वोत्तर भूभाग पर फिर से कब्जा करने के बाद हुआ, यह इलाका एसडीएफ के नियंत्रण में था. बड़े नुकसान के बाद एसडीएफ युद्धविराम पर सहमत हुआ था, जिसके बाद उसके कब्जे वाले अधिकांश क्षेत्र सीरियाई सरकार के नियंत्रण में आ गए हैं.

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बड़ा बदलाव, अहम कारण
कसरक के बेस से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की तस्वीरों के साथ ही अल-शद्दादी और अल-तान्फ नाम के दो अन्य अहम बेस से भी अमेरिकी सैनिकों की वापसी की खबरें आ चुकी हैं. बता दें कि कसरक वो जगह है जहां अमेरिकी सेनाएं और गठबंधन बल कई सालों से इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के खिलाफ ऑपरेशन संचालित कर रहे थे. जानकारों का मानना है कि यह वापसी सिर्फ अमेरिकी सेना की वापसी का नहीं है बल्कि सीरिया में बदलते राजनीतिक और सैन्य संतुलन का नतीजा है.
उनके मुताबिक पिछले कुछ महीनों में सीरियाई सरकार ने उत्तर-पूर्वी इलाके में नियंत्रण स्थापित करना शुरू कर दिया है. खासकर उन इलाकों में जहां पहले कुर्द बलों का प्रभुत्व था.
#US forces have begun withdrawing from Qasrak, Syria's #Jazira. Dozens of trucks, some carrying armored vehicles, left #Hasakah Monday, #Reuters reported. A full pullout could take weeks, leaving only #Rmeilan base. #AFP says the US may end its presence in #Syria within a month. pic.twitter.com/slSCk1k03I
— Al-Jumhuriya English (@aljumhuriya_eng) February 24, 2026
कुर्द और सीरियाई सरकार के बीच पिछले महीने हुए समझौते के तहत सीरियाई सेनाओं ने उन इलाकों के कुछ हिस्सों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है.
साथ ही यह भी बताया गया कि सीरिया में आईएसआईस की मौजूदगी पिछले सात-आठ सालों में बेहद कमजोर हुई है. इस समूह ने कुछ साल पहले इलाके से अपना नियंत्रण खो दिया था. अमेरिकी सेना के मुताबिक इस नई स्थिति में यहां उसे अपने सशस्त्र बलों की तैनाती की जरूरत न के बराबर लगी है क्योंकि अब सीरियाई सरकार खुद आंतक विरोधी लड़ाइयों के लिए जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार दिख रही है.
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अमेरिकी रणनीति
एसडीएफ के साथ अमेरिका लंबे समय से साझेदारी कर रहा था, पर अब वो सीरियाई सरकार के अधिक नजदीक है. तो जैसे ही स्थानीय राजनीति में शक्ति संतुलन के समीकरण में बदलाव आया, अमेरिकी रणनीति भी इसके अनुरूप बदल गई. सीरिया में लंबे समय से चले गृह युद्ध जैसी स्थिति, यहां रूस और ईरान जैसी ताकतों की मौजूदगी के बीच अभी-अभी सीरियाई सैनिकों के कुर्द इलाकों पर नियंत्रण से अमेरिका यह सोचने के लिए मजबूर हुआ कि वहां सेना की उपस्थिति से अधिक क्षेत्रीय गठबंधनों और राजनीतिक समाधान पर जोर देना जरूरी है.
कसरक बेस से क्या निकाला गया?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार कसरक बेस से भारी ट्रकों के काफिले निकले जिनमें बख्तरबंद वाहन और अन्य सैन्य उपकरण शामिल थे. इन वाहनों को कमिशली शहर के बाहर की हाईवे पर इराक-सीमा की ओर जाते देखा गया. हालांकि अभी भी रमेलान-नेर स्थित एक और छोटा बेस बरकरार रखा गया है, जो कि इराक सीमा के पास है और जहां से अमेरिका गठबंधन सेना की मौजूदगी बनाए रखेगा.
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ISIS का परिदृश्य
ISIS ने भले ही अपना राजनैतिक साम्राज्य खो दिया हो, लेकिन छोटे-छोटे हमलों और स्लीपर सेल गतिविधियों के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कर रहे हैं. रिपोर्टों के मुताबिक ISIS ने पिछले दिनों कुछ हमलों की जिम्मेदारी ली है, जिसमें एक सैनिक और एक नागरिक की मौत भी हुई थी. मौजूदा स्रोतों के मुताबिक अमेरिकी सैनिकों के वहां से हटने की यह प्रक्रिया कई हफ्तों में पूरी होने की संभावना है. कुछ अधिकारियों के अनुसार यह वापसी स्थायी भी हो सकती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका भविष्य में फिर से कोई बड़ा सैन्य संचालन करेगा या नहीं.
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
इस बड़ी सैन्य वापसी के कई स्तरों पर प्रभाव दिखाई देंगे. पहला, सीरियाई सरकार की स्थिति मजबूत होगी और कुर्द ताकतों का प्रभाव कम होगा. दूसरा, साझेदारी के स्तर पर अमेरिका को सीरिया में अपने साथियों, खासकर कुर्द बलों के साथ स्ट्रैटेजिक रिश्ते को लेकर फिर से सोचना होगा. तीसरा, रूस और ईरान जैसे देश पहले से ही सीरिया में प्रभाव रखते हैं, और अमेरिका की वापसी से यह प्रभाव और भी बढ़ सकता है. चौथा, अमेरिकी सैनिकों की पूर्वोत्तर सीरिया से वापसी इराक-तुर्की-सीरिया के सीमावार्ती इलाकों में सुरक्षा और राजनीतिक संतुलन पर भी अपना असर छोड़ेगा, आने वाले दिनों में इस पर दुनिया की निगाहें होंगी.
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