- पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की इच्छा जताई
- उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की सरकार और सेना तनाव कम करने के लिए सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभा रही है
- ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति दी थी लेकिन अमेरिका पूरा परमाणु कार्यक्रम खत्म करना चाहता है- पाकिस्तान
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भी कमाल का देश है. यह बात किसी भी तरह पॉजिटिव तरीके से नहीं ली जानी चाहिए. जो देश खुद जंग में उलझा हुआ है, जिसके नूर खान एयरबेस तक तालिबानी लड़ाके हमला कर रहे हैं, जो अफगानिस्तान के साथ ओपन वॉर में है, वो ईरान और अमेरिका के बीच शांति कराने की बात कर रहा है. दरअसल पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने मंगलवार, 3 मार्च को कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने के लिए तैयार है.
उन्होंने पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन में बोलते हुए कहा, “पाकिस्तान तैयार है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत इस्लामाबाद में कराई जाए.” उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक और रक्षा स्तर की बातचीत में “बहुत सक्रिय और सकारात्मक भूमिका” निभाई है. उन्होंने सीनेट को यह भी बताया कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति दी थी, लेकिन अमेरिका चाहता है कि तेहरान का पूरा परमाणु कार्यक्रम ही खत्म कर दिया जाए.
अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की प्रक्रिया “सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही थी.” उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की ऑस्ट्रिया यात्रा का भी जिक्र किया, जहां उनकी मुलाकात अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख से हुई थी. डार ने कहा कि एजेंसी के प्रमुख को उम्मीद थी कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है.
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि पिछली रात उनकी ओमान के विदेश मंत्री से बात हुई थी. उन्हें बताया गया कि अमेरिका और ईरान के बीच आखिरी दौर की बातचीत “सकारात्मक माहौल में” खत्म हुई थी. डार ने कहा, “उन्होंने मुझे बताया कि बातचीत के बाद ओमान के विदेश मंत्री वॉशिंगटन गए, जहां उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति से मुलाकात की और कहा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है.”
इन घटनाओं के बाद अचानक हुए हमले पर चिंता जताते हुए डार ने कहा, “यह वही बात फिर से हुई है जो पिछले साल जून में हुई थी.” यह जून में इज़राइल और ईरान के बीच हुए 12 दिन के युद्ध की ओर इशारा था.
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