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ट्रंप ने कहा था अमेरिका के पास इतने हथियार कि अनंतकाल तक लड़ सकते हैं, अब सच आ गया सामने

US Iran War: 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण करने और इजरायल द्वारा गाजा में सैन्य अभियान शुरू करने के बाद से अमेरिका अपने हथियारों के भंडार से अरबों डॉलर के हथियार इस्तेमाल कर चुका है. अब ईरान जंग में वो खुद हथियार चला रहा है.

ट्रंप ने कहा था अमेरिका के पास इतने हथियार कि अनंतकाल तक लड़ सकते हैं, अब सच आ गया सामने
US Iran War: क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान जंग घाटे का सौदा साबित होगा
  • डोनाल्ड ट्रंप सरकार व्हाइट हाउस में अमेरिका की प्रमुख रक्षा कंपनियों से हथियार उत्पादन बढ़ाने पर चर्चा करेगी
  • पेंटागन ईरान पर हमलों के बाद तेजी से घटते हथियार भंडार को पुनः भरने के लिए काम कर रहा है
  • ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका के पास हथियारों की लगभग असीमित सप्लाई है और लंबी जंग सफलतापूर्वक लड़ा जा सकता है
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US Iran War: ईरान से जारी जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप सरकार आने वाले शुक्रवार को व्हाइट हाउस में अमेरिका की सबसे बड़ी रक्षा कंपनियों के अधिकारियों से मिलने की योजना बना रही है. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ईरान पर हमलों और हाल के दूसरे सैन्य अभियानों के बाद तेजी से खाली हो रहे हथियारों के भंडार को फिर से भरने पर काम कर रहा है. इसलिए इस बैठक में हथियारों का उत्पादन तेज करने पर चर्चा होगी. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने यह रिपोर्ट इस योजना से परिचित पांच लोगों के हवाले से छापी है.

सूत्रों ने बताया कि लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन की मूल कंपनी RTX समेत कई महत्वपूर्ण सप्लायर कंपनियों को इस बैठक में बुलाया गया है. उन्होंने अपनी पहचान न बताने की शर्त पर यह बात कही क्योंकि यह बातचीत प्राइवेट है. यह बैठक दिखाती है कि वॉशिंगटन में हथियारों के भंडार को मजबूत करने की कितनी जल्दबाजी महसूस की जा रही है. ईरान में जारी जंग के शुरुआती 4 दिनों में ही बड़ी मात्रा में हथियारों का इस्तेमाल हुआ है.

लगातार जंग में बना हथियारों का सप्लायर, अब खुद चलाने की बारी...

इस रिपोर्ट के अनुसार 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण करने और इजरायल द्वारा गाजा में सैन्य अभियान शुरू करने के बाद से अमेरिका अपने हथियारों के भंडार से अरबों डॉलर के हथियार इस्तेमाल कर चुका है. इनमें तोपखाना सिस्टम, गोला-बारूद और एंटी-टैंक मिसाइलें शामिल हैं. अब जारी ईरान के संघर्ष में उन लंबी दूरी की मिसाइलों का भी ज्यादा इस्तेमाल हुआ है, जो कीव को दी गई मिसाइलों से भी अधिक दूरी तक मार कर सकती हैं.

सूत्रों में से एक ने कहा कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य हथियार बनाने वाली कंपनियों पर दबाव डालना होगा ताकि वे उत्पादन तेजी से बढ़ाएं. लॉकहीड मार्टिन, पेंटागन और व्हाइट हाउस ने इस बारे में टिप्पणी के अनुरोध पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया. RTX ने भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

ट्रंप ने कहा है- हमारे पास असीमित सप्लाई है

सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका के पास हथियारों की “लगभग असीमित सप्लाई” है और केवल इन्हीं सप्लाई का इस्तेमाल करके युद्ध “बहुत लंबे समय तक और बहुत सफलतापूर्वक” लड़े जा सकते हैं. व्हाइट हाउस की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका के उप रक्षा सचिव स्टीव फीनबर्ग हाल के दिनों में पेंटागन के साथ मिलकर लगभग 50 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव शुक्रवार तक जारी किया जा सकता है.

यह नया पैसा हाल के संघर्षों में इस्तेमाल हुए हथियारों को फिर से खरीदने और भंडार भरने के लिए होगा, जिनमें मिडिल ईस्ट के युद्ध भी शामिल हैं. हालांकि यह रकम अभी प्रारंभिक है और इसमें बदलाव हो सकता है. अमेरिका द्वारा ईरान पर सैन्य हमले करने के बाद हथियारों का उत्पादन बढ़ाने की कोशिश और तेज हो गई है. शनिवार को अमेरिका ने ईरान में टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल, एफ-35 स्टेल्थ लड़ाकू विमान और कम लागत वाले एक-तरफा हमला करने वाले ड्रोन इस्तेमाल किए थे.

टॉमहॉक मिसाइल बनाने वाली कंपनी रेथियॉन ने पेंटागन के साथ एक नया समझौता किया है, जिसके तहत भविष्य में हर साल 1,000 मिसाइलें बनाने का लक्ष्य रखा गया है. फिलहाल पेंटागन 2026 में इन मिसाइलों में से 57 मिसाइलें खरीदने की योजना बना रहा है, जिनकी औसत कीमत लगभग 13 लाख डॉलर प्रति मिसाइल है.

(इनपुट- रॉयटर्स)

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