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ईरान के हमलों को रोकने में खत्म हो जाएंगी अमेरिका के इंटरसेप्टर मिसाइलें? चीन-रूस के लिए 'मौका-मौका'

US-Israel War against Iran: “ऐसा खतरा है कि इससे पहले कि ईरान की मिसाइलें खत्म हों, अमेरिका और उसके साथी देशों के पास इंटरसेप्टर मिसाइलें खत्म हो सकती हैं”... जानिए एक्सपर्ट ऐसा क्यों कह रहे हैं.

ईरान के हमलों को रोकने में खत्म हो जाएंगी अमेरिका के इंटरसेप्टर मिसाइलें? चीन-रूस के लिए 'मौका-मौका'
US-Israel War against Iran: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग जारी है
  • US और ईरान के बीच चार दिन से जारी युद्ध में अमेरिकी सेनाओं ने सैकड़ों ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया है
  • अमेरिका के पास बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर की संख्या सीमित है, जो युद्ध लंबे समय तक चले तो खत्म हो सकती हैं
  • ईरान के पास लगभग 2500 बैलिस्टिक मिसाइल हैं, जो अमेरिका और इजरायल के इंटरसेप्टर मिसाइलों से अधिक मानी जाती हैं

अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान की जंग जारी है. युद्ध को शुरू हुए 4 दिन हो गए हैं और बात हथियारों के जखीरे की हो रही है, सैन्य ताकत की हो रही है. अब तक अमेरिकी सेनाओं ने पिछले कुछ दिनों में ईरान की सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों को गिराया है. लेकिन इससे यह सवाल उठ रहा है कि अगर यह युद्ध कई हफ्तों तक चलता रहा तो अमेरिका के पास एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलें कितने समय तक बचेंगी. ईरान ने शनिवार, 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के बड़े हवाई हमले के जवाब में खाड़ी के उन देशों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं, जहां अमेरिकी सैनिक और उसके सैन्य अड्डे मौजूद हैं.

न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी जनरल डैन केन ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका ने “सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया है जो अमेरिकी सेनाओं, उनके पार्टनर देशों और क्षेत्रीय स्थिरता को निशाना बना रही थीं.” यह तो सही है कि इन मिसाइलों को रोकना एक सफलता है क्योंकि इससे वे अपने लक्ष्य पर नहीं गिर पाईं. लेकिन इसकी कीमत भी है, क्योंकि इन्हें रोकने के लिए महंगी और आधुनिक इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल करनी पड़ती हैं, जिनकी संख्या सीमित है.

रिपोर्ट के अनुसार थिंक-टैंक स्टिम्सन सेंटर की सीनियर एक्सपर्ट केली ग्रिको ने कहा कि “ऐसा खतरा है कि इससे पहले कि ईरान की मिसाइलें खत्म हों, अमेरिका और उसके साथी देशों के पास इंटरसेप्टर मिसाइलें खत्म हो सकती हैं. हालांकि यह पूरी तरह निश्चित नहीं है.”

अमेरिका पर भारी ईरान का मिसाइल जखीरा?

युद्ध की शुरुआत में इजरायल ने अनुमान लगाया था कि ईरान के पास लगभग 2,500 बैलिस्टिक मिसाइलें हैं. ग्रिको के अनुसार यह संख्या “संभवतः अमेरिका और इजरायल के कुल इंटरसेप्टर मिसाइलों से भी ज्यादा है.” हालांकि अमेरिका और इजरायल मिसाइल लॉन्च करने वाले ठिकानों और भंडारण स्थानों को ढूंढकर नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं. इसलिए असल मुकाबला यह है कि ईरान कितनी तेजी से मिसाइलें लॉन्च करता है और अमेरिका-इजरायल कितनी तेजी से उनके लॉन्च ठिकानों को नष्ट करते हैं.

उत्पादन से ज्यादा है डिमांड

अमेरिका के जनरल डैन केन ने कहा कि ईरानी ड्रोन भी खतरा हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि कितने ड्रोन गिराए गए. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि “हमारी प्रणालियां इन ड्रोन से निपटने में प्रभावी साबित हुई हैं और तेजी से लक्ष्य पर हमला कर रही हैं.”

इसपर ग्रिको ने कहा कि ड्रोन को गिराने के लिए भी इंटरसेप्टर इस्तेमाल हो रहे हैं, लेकिन मिसाइलों जितने बड़े स्तर पर नहीं. असली कमी बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर की है. युद्ध कितने समय तक चलेगा, यह भी तय करेगा कि कितने इंटरसेप्टर की जरूरत पड़ेगी. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संघर्ष कितने समय तक चलेगा.

अमेरिकी अधिकारियों, जिनमें डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं, ने कहा है कि यह युद्ध कई हफ्तों तक चल सकता है. हालांकि सोमवार को ट्रंप ने कहा, “हम अपनी तय समय-सीमा से पहले ही काफी आगे बढ़ चुके हैं.” उन्होंने कहा, “शुरुआत में हमने चार से पांच हफ्तों का अनुमान लगाया था, लेकिन हमारे पास उससे ज्यादा समय तक युद्ध चलाने की क्षमता है.”

अमेरिकी रक्षा प्रमुख पीट हेगसेथ ने पहले कहा था कि युद्ध की समय-सीमा अलग-अलग हो सकती है, “चार हफ्ते, दो हफ्ते, छह हफ्ते. यह कम भी हो सकता है या ज्यादा भी.”

ऐसे में अटलांटिक काउंसिल के रक्षा कार्यक्रम के डॉयरेक्टर जो कोस्टा ने कहा कि “अगर ईरान के साथ युद्ध लंबा चलता है तो इससे अमेरिका के महत्वपूर्ण एयर डिफेंस इंटरसेप्टर भंडार पर भारी दबाव पड़ सकता है, जिनकी जरूरत चीन और अन्य वैश्विक चुनौतियों के लिए भी है.” उन्होंने कहा, “यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और इजरायल ईरान की मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने की क्षमता को कितनी जल्दी खत्म कर पाते हैं.”

ग्रिको ने कहा कि इंटरसेप्टर मिसाइलों के मामले में उत्पादन मांग के बराबर नहीं चल पा रहा है. उन्होंने कहा, “यूरोप, इंडो-पैसिफिक और मध्य-पूर्व- हर क्षेत्र में मिसाइल रक्षा सिस्टम और इंटरसेप्टर की भारी जरूरत है. लेकिन अमेरिका उन्हें जितनी तेजी से इस्तेमाल कर रहा है, उतनी तेजी से उन्हें बना नहीं पा रहा.”

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Ashutosh Kumar Singh
Chief Sub Editor
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