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अब अमेरिकी मिसाइलों के निशाने पर पानी! ईरान से बड़ा संकट कुवैत पर क्यों मंडरा रहा?

US Iran War Updates: कुवैत के समुद्र के पानी को पीने लायक बनाने वाले प्लांट पर लगातार दूसरे दिन ईरान ने हमला किया है. वहीं अमेरिका ने ईरान के प्लांट पर हमला बोला है.

अब अमेरिकी मिसाइलों के निशाने पर पानी! ईरान से बड़ा संकट कुवैत पर क्यों मंडरा रहा?
US Iran War: समुद्र के पानी को पीने लायक बनाने वाले प्लांट भी जंग की चपेट में (फोटो- NDTV)

मिडिल ईस्ट की जंग एक बार फिर सिर्फ मिसाइलों और बमों तक सीमित नहीं रह गई है. अब फिर से निशाने पर वह चीज है जिसके बिना जिंदगी चल ही नहीं सकती- पानी. ईरान और अमेरिका के हमलों में समुद्र के पानी को पीने लायक बनाने वाले प्लांट भी चपेट में आने लगे हैं. सबसे बड़ी चिंता कुवैत जैसे देशों की है, जहां पीने के पानी की लगभग पूरी  जरूरत ऐसे ही प्लांट से पूरी होती है. ऐसे में अगर ये हमले बढ़े, तो जंग का सबसे बड़ा असर आम लोगों की प्यास पर पड़ सकता है.

कुवैत और ईरान, दोनों के प्लांट पर हमला

कुवैत के एक बिजली और समुद्र के पानी को पीने लायक बनाने वाले प्लांट (desalination plants) पर रविवार को लगातार दूसरे दिन ईरान ने हमला किया है. यह जानकारी कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने दी. वहीं शनिवार को ईरान के एक प्रांतीय अधिकारी ने कहा था कि अमेरिका के मिसाइल हमले में भी देश का एक समुद्री पानी को पीने लायक बनाने वाला प्लांट क्षतिग्रस्त हुआ था. 

ये प्लांट समुद्र के पानी को पीने के पानी में बदलते हैं. मिडिल ईस्ट के देशों में इनकी बहुत बड़ी भूमिका है. ये लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह हैं और सूखे के समय दूर-दराज के इलाकों तक पीने का पानी पहुंचाने में मदद करते हैं. इस क्षेत्र के कुछ देश पीने के पानी के लिए लगभग पूरी तरह ऐसे प्लांट पर ही निर्भर हैं.

कुवैत और ओमान में पीने के मीठे पानी की करीब 90% जरूरत ऐसे प्लांट से पूरी होती है. बहरीन में यह आंकड़ा 85% और सऊदी अरब में करीब 70% है. अबू धाबी, दुबई, दोहा, कुवैत सिटी और जेद्दा जैसे बड़े खाड़ी शहर लगभग पूरी तरह ऐसे प्लांट से मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं.

ईरान को थोड़ी राहत है क्योंकि पीने के पानी के लिए ईरान अपने खाड़ी पड़ोसी देशों जितना इन प्लांट पर निर्भर नहीं है. फिर भी समुद्र किनारे और द्वीपों में रहने वाले लोगों तक पानी पहुंचाने और सूखे के असर को कम करने में इनकी अहम भूमिका है.

पहले भी हुए हैं हमले

मार्च में जब मौजूदा संघर्ष शुरू हुआ था, तब भी ऐसे प्लांट को निशाना बनाया गया था. उस समय वर्ल्ड वाटर काउंसिल, जो संयुक्त राष्ट्र से जुड़ा एक संगठन है और दुनिया में जल सुरक्षा के लिए काम करता है, ने इन हमलों की निंदा की थी. संगठन ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह पालन करने की अपील की थी. अपने बयान में संगठन ने जिनेवा कन्वेंशन के उस नियम का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि लड़ाई के दौरान आम लोगों के जीवन के लिए जरूरी संसाधनों, जैसे पीने के पानी की व्यवस्था और उसकी सप्लाई, पर हमला नहीं किया जा सकता.

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