- ईरानी हमलों में तीसरे अमेरिकी सैनिक की मौत की पुष्टि हो गई है और अब डोनाल्ड ट्रंप बदला लेने के मूड में हैं
- डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि ईरानी हमलों में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की याद में हमले किए जा रहे हैं
- मार्को रुबियो ने कह दिया है कि सेना का कोई भी काम सुरक्षित नहीं होता. यह सब अपने आप में खतरनाक होता है
अमेरिका और ईरान की जंग एक बार फिर चरम पर पहुंच चुकी है. ईरानी हमलों में तीसरे अमेरिकी सैनिक की मौत की पुष्टि हो गई है और अब डोनाल्ड ट्रंप बदला लेने के मूड में हैं. अमेरिकी सेना ने लगातार नौवीं रात ईरान पर हमला बोला है. एक तरफ ट्रंप कह रहे हैं कि ईरानी हमलों में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की याद में, उन्हें सम्मान देने के लिए हमले किए जा रहे हैं. वहीं अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कह दिया है कि सेना का कोई भी काम सुरक्षित नहीं होता. यह सब अपने आप में खतरनाक होता है. इस नाजुक मोड़ पर मार्को रुबियो का यह बयान शहीदों के परिवारों को शायद रास नहीं आए.
ईरान की सरकारी मीडिया ने कहा है कि अमेरिका के नए हमलों के बाद तबरीज, चाबहार, कोणार्क, बंदर महशहर और बंदर इमाम खुमैनी में विस्फोट की सूचना मिली है.
एक और अमेरिकी सैनिक की मौत
अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने रविवार को कहा कि ईरान के हमलों में अमेरिकी सेना के एक तीसरे सैनिक की मौत हो गई है. युद्ध का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में और लड़ाकू विमान भेजने शुरू कर दिए हैं. पेंटागन ने बताया कि शनिवार को उत्तरी इराक में ईरान के एक गिराए गए अटैक ड्रोन को नष्ट करने के दौरान सैनिक की मौत हो गई.
मार्को रुबियो का बयान
जब अमेरिका के विदेश मंत्री से शहीद हुए सैनिकों के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "लेकिन देखिए, हमारी सेना दुनिया भर में, खासकर उस इलाके में लेकिन हर जगह, हर दिन बहुत खतरनाक काम करती है. हमारे यहां ऐसे लोग भी रहे हैं जिनकी ट्रेनिंग के दौरान जान चली गई. सेना जो भी काम करती है, उसमें से कुछ भी सुरक्षित नहीं होता. यह सब अपने आप में खतरनाक होता है..."
जब तीन सैनिकों की मौत हो गई हो, तब उन शहीदों के परिवार वालों को शायद यह बयान रास नहीं आए.
अभी भी बातचीत के लिए राजी अमेरिका- रुबियो
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका अभी भी ईरान के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत असल होनी चाहिए. रुबियो ने कहा, "हम जवाब देते रहेंगे. अगर बातचीत का रास्ता खुलता है, यानी अगर ईरान के लिए कुछ अच्छा करने वाले लोग जीतते हैं और सिस्टम या बातचीत की कमान संभालते हैं, तो यह बहुत अच्छी बात होगी... लेकिन अफसोस की बात है कि अभी हालात ऐसे नहीं हैं."
यह भी पढ़ें: धधक रही खाड़ी- अमेरिका का लगातार नौवीं रात ईरान पर हमला, होर्मुज में तेल जहाज धुआं-धुआं
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं