अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ईरान के होर्मुज खोलने वाले समझौते के प्रस्ताव को ठुकरा दिया. तेहरान का कहना था कि इस प्रस्ताव से एक हफ्ते के अंदर होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोला जा सकता था. यह जलमार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बहुत अहम है और अब अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव का केंद्र बन गया है; यह टकराव लगभग सात महीनों से गतिरोध की स्थिति में है.
मुजतबा खामेनेई की रजामंदी का था समझौता
ईरानी मीडिया द्वारा शेयर किए गए वीडियो इंटरव्यू के एक अंश के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इससे पहले CBS न्यूज को बताया कि यह प्रस्ताव सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई के साथ "समन्वय" करके तैयार किया गया था. ईरान की योजना में मध्य पूर्व में (जिसमें लेबनान भी शामिल है) सभी तरह की शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को रोकने की बात कही गई है. यह जानकारी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दी, जिन्होंने इस हफ्ते की शुरुआत में ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात की थी.
शर्तें वहीं थीं, फिर भी नहीं माने ट्रंप
पेजेश्कियान ने कहा कि शर्तें वैसी ही हैं जैसी इस साल की शुरुआत में अमेरिका के साथ हुए समझौते में तय की गई थीं. इस समझौते में ईरान की रुकी हुई संपत्ति को जारी करने, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटाने और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने की बात कही गई थी. युद्धविराम के सातवें दिन ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल देगा. पेजेश्कियान ने CBS को बताया कि "यह प्रक्रिया उसी दिन शुरू हो जाएगी जिस दिन वे इसे स्वीकार कर लेंगे". उनके कार्यालय के अनुसार, न्यूयॉर्क में पेजेश्कियान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की और कहा, "ईरान बातचीत की मेज से पीछे नहीं हटा है, लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए, उसे अब अमेरिका पर भरोसा नहीं है."
अराघची ने संयुक्त राष्ट्र में कहा, "ईरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका को सात दिन का एक ठोस प्लान बताया है. अगर जरूरी शर्तें पूरी हो जाती हैं, तो जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है और सात दिनों के भीतर समुद्री आवाजाही सामान्य की जा सकती है. अब फैसला अमेरिका को करना है. ईरान जबरदस्ती, धमकियों या डराने-धमकाने को स्वीकार नहीं करता है और दबाव में आकर अपने संप्रभु अधिकारों से समझौता नहीं करेगा."
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