- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ हवाई हमलों के बाद जमीनी हमले पर विचार कर रहे हैं.
- पेंटागन ने ईरान में सैनिकों की संभावित जमीनी तैनाती के लिए व्यापक रणनीति राष्ट्रपति को भेजी है.
- हालांकि ट्रंप ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि किन परिस्थितियों में वह जमीनी बलों के इस्तेमाल को मंजूरी देंगे.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को एक नए स्तर पर ले जा सकते हैं. डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हवाई हमलों के बाद अब जमीनी हमले को लेकर विचार कर रहे हैं. सीबीएस न्यूज ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि पेंटागन ने ईरान में अमेरिका अब सैनिकों की संभावित जमीनी तैनाती के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है और इस योजना को अमेरिकी राष्ट्रपति के पास भेजा गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च स्तर के सैन्य कमांडरों ने अमेरिका और इजरायल से जुड़े मौजूदा संघर्ष के बीच आगे की कार्रवाई को लेकर तैयारियों के लिए विशेष अनुरोध रखे हैं. हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि किन परिस्थितियों में वह जमीनी बलों के इस्तेमाल को मंजूरी देंगे. इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े विचार-विमर्श को गोपनीय रखा गया है, क्योंकि इसमें संवेदनशील सैन्य योजनाएं शामिल हैं.
ट्रंप ने जमीनी हमले को लेकर दिया ये जवाब
ओवल ऑफिस में ईरान में अमेरिका की जमीनी उपस्थिति की संभावना को लेकर पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि नहीं, मैं कहीं भी सेना तैनात नहीं कर रहा हूं. साथ ही कहा कि अगर मैं ऐसा कर रहा होता तो मैं निश्चित रूप से आपको नहीं बताता.
साथ ही व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि पेंटागन की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मुश्किल की स्थिति में कमांडर-इन-चीफ के पास अधिकतम विकल्प मौजूद रहे. उन्होंने कहा कि ऐसी तैयारियां अंतिम निर्णय का संकेत नहीं देतीं हैं. साथ ही उन्होंने बताया कि जैसा कि राष्ट्रपति ने कल ओवल ऑफिस में कहा था, वे इस समय कहीं भी ग्राउंड फोर्सेज भेजने की योजना नहीं बना रहे हैं.
सीबीएस न्यूज के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान में संभावित जमीनी अभियान की स्थिति में ईरानी कर्मियों और अर्धसैनिक बलों को पकड़ने और हिरासत में लेने से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की है. इसमें यह भी शामिल है कि ऐसे लोगों को किन स्थानों पर लाया जाएगा और कहां रखा जाएगा.
82वीं एयरबोर्न डिवीजन तैनाती के लिए तैयार
इस बीच, अमेरिका ने 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के कुछ हिस्सों को क्षेत्र में संभावित तैनाती के लिए तैयार किया है. साथ ही इसमें मरीन कॉर्प्स की मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट और आर्मी की ग्लोबल रिस्पॉन्स फोर्स भी शामिल है. रिपोर्ट में कहा गया है कि हजारों अमेरिकी मरीन पहले से ही मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहे हैं. कैलिफोर्निया से तीन नौसैनिक जहाज हाल ही में करीब 2,200 मरीन को लेकर रवाना हुए हैं. यह संघर्ष शुरू होने के बाद भेजी गई दूसरी ऐसी यूनिट है, जबकि पहले भेजी गई यूनिट अभी भी रास्ते में है.
इन सैन्य गतिविधियों को पेंटागन की उस रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके तहत राष्ट्रपति के सामने सभी संभावित सैन्य विकल्प खुले रखे जा सकें और क्षेत्र में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अमेरिका की बड़ी तैयारी पहले से ही की जा सके.
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